संजय छाजेड़
धमतरी जिले के बांधा-दुगली में शंभु शक्ति स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा संस्थान की पहल पर 1 सितंबर को प्रदेश स्तरीय पारंपरिक वैद्यराजों की बैठक आयोजित की गई। बाजार स्थल बांधा में हुई इस बैठक में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे वैद्यराजों ने अपनी समस्याओं और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में मुख्यमंत्री की ओर से पारंपरिक वैद्यराजों के लिए घोषित मानदेय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही प्रदेश में संचालित आठ अलग-अलग पारंपरिक वैद्यराज संघों को एकजुट करने और एक साझा संगठन बनाने को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
वैद्यराजों ने छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की गतिविधियों में पारंपरिक वैद्यराजों की भूमिका को और मजबूत करने की मांग रखी। उनका कहना है कि सदियों से चली आ रही स्थानीय चिकित्सा पद्धति और जड़ी-बूटी के ज्ञान को संरक्षण देने में वैद्यराजों की भागीदारी जरूरी है।
वैद्यराज प्रेमचंद देवदास ने कहा कि धमतरी सहित प्रदेश के वैद्यराजों, सिरहा, गनिया, गायता और मांझी को नियमित मासिक मानदेय मिलना चाहिए। इसके अलावा आवास और बीमा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि वैद्यराज अपने पूर्वजों से मिले ज्ञान के आधार पर लंबे समय से लोगों को जरूरत के समय निशुल्क सेवा देते आ रहे हैं, लेकिन अब तक शासन स्तर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया है।
बैठक में नगरी क्षेत्र के कोटाभरी में हर वर्ष आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय ऋषि पंचमी पर्व का भी उल्लेख किया गया। वैद्यराजों ने बताया कि कोटाभरी-डोंगरडूला क्षेत्र में औषधीय जड़ी-बूटियों के संरक्षण को लेकर पूर्व में भूमिपूजन किया गया था। वहीं, कोटाभरी कोटेश्वर धाम में करीब 4.30 हेक्टेयर भूमि संस्थान को दिए जाने की घोषणा के बावजूद अब तक पट्टा जारी नहीं होने की बात सामने आई।
