कलेक्टर के फर्जी सील, हस्ताक्षर, आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी के नाम से हुई रजिस्ट्री

धमतरिहा के गोठ
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 संजय छाजेड़

धमतरी । राजस्व न्यायालय में ऐसे अनेक पक्षकार हैं, जो जल्द न्याय पाने के लिये लगातार पेशियों पर उपस्थित होते आ रहे हैं। लेकिन ऐसे लोगों को तत्कालिक न्याय नहीं मिल पाता। लेकिन वर्ष 2022 में एक ऐसा प्रकरण आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी को बेचने का प्रकाश में आया है जिसमें हर एक दिन में पेशी देकर उस प्रकरण को त्वरित निराकरण कर दिया गया। हद तो यह है कि प्रकरण दाखिल दफ्तर होने के बाद भी नये सिरे से उसे आदेश होने के पश्चात फर्जी हस्ताक्षर से क्रेता और विक्रेताओं को अनैतिक लाभ पहुंचाने के लिये यह कृत्य किया जाना पाया गया है जिसके चलते उक्त आदिवासी व्यक्ति को गैर आदिवासी व्यक्ति को भूमि बेचने की अनुमति मिल गई किंतु आदेश के बाद उक्त अवधि में वह भूमि विक्रय नहीं की जा सकी। इसे लेकर प्रकरण जो दाखिल दफ्तर हो चुका था उसे बाहर निकालकर दो लाईन का एक पृथक से आदेश कर कलेक्टर का फर्जी सील, हस्ताक्षर किया गया है, जो जांच का विषय है। उक्त आदिवासी की जमीन धमतरी निवासी एक सामान्य वर्ग के व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्री करा ली गई। इस पूरे प्रकरण में क्रेता, विक्रेता की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जो आदिवासी की जमीन गेैर आदिवासी को विक्रय करने की अनुमति दी गई है उसमें क्रेता का नाम ही नहीं है। यह गंभीर जांच का विषय है कि बिना नाम के कैसे किसी को अनुमति दी जा सकती है। शासन स्तर पर इस पूरे मामले की शिकायत होने की भी खबर है।

 मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि चेतन नाग पिता मनिहार नाग हल्बा आदिवासी ने संबलपुर तहसील नगरी, जिला धमतरी के आधिपत्य की मड़वापथरा रानिमं धमतरी स्थित भूमि खसरा नंबर 223/2 रकबा 1.40 हे, खनं 237 रकबा 0.68 हे को गैर आदिवासी के पक्ष में विक्रय करने की अनुज्ञा हेतु छग राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(6) के तहत कलेक्टर धमतरी के न्यायालय में 1.2.22 को आवेदन पेश किया। अगली पेशी इसमें 3.2.22 निर्धारित की गई। जबकि अन्य राजस्व प्रकरणों में इतनी करीब की तारीख नहीं दी जा रही है। अन्य पक्षकारों को कम से कम 7 से 15 दिन की अवधि के अंतराल में पेशियां दी जाती है। उक्त आवेदन पर यह मामला एक्सप्रेस 2.2.22 को प्रस्तुत हो गया। अनुविभागीय अधिकारी ने भी 2.2.22 को नायब तहसीलदार को यह प्रकरण प्रेषित कर दिया। 3 फरवरी 2022 को तहसीलदार धमतरी के न्यायालय में यह प्रकरण कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से प्राप्त करना ऑर्डर शीट में उल्लेखित है और इसमें 3.2.22 की ऑर्डर शीट के अनुसार 21.2.22 की तारीख दर्ज है। इसी तरह 21.2.22 को नायब तहसीलदार के न्यायालय में मामला प्रस्तुत हुआ। पश्चात 22.2.22 को यह मामला अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के न्यायालय में पहुंचा। 28.2.22 को यह मामला अनुविभागीय अधिकारी के न्यायालय से कलेक्टर धमतरी को 3.3.22 को प्रस्तुत किया गया जिसमें 17.3.22 को आदिवासी को गैर आदिवासी के मध्य बिक्री करने की अनुमति तत्कालीन कलेक्टर पदुम सिंह एल्मा ने दे दी। मुख्य तथ्य यह है कि 17.3.22 को आदेश के पश्चात यह मामला दाखिल दफ्तर कर दिया गया जिसमें 22.3.22 को कलेक्टर का हस्ताक्षर है। नाटकीय घटनाक्रम के चलते 19.12.22 को फिर से दो लाईन का आदेश उक्त आदेश में जुड़ गया जबकि सूचना के अधिकार के तहत दिनांक 7.6.24 को दिये गये जानकारी में उक्त दो लाईन का कहीं उल्लेख ही नहीं है। इस तरह विक्रेता के आवेदन पर अगस्त 2023 तक विक्रय विलेख निष्पादन की स्वीकृति दी गई जिसमें तत्कालीन कलेक्टर के फर्जी सील, हस्ताक्षर होने की बात को नहीं नकारा जा सकता।

 आदिवासी वर्ग के व्यक्ति की भूमि को गैर आदिवासियों को बेचने की जो श्रृंखलाएं चली हैं, उसके तहत यह प्रथम मामला है जिसमें अधिकारियों द्वारा इस राजस्व प्रकरण में तत्कालिक निर्णय लेते हुए निराकरण किया गया है, जो जांच का विषय बताया जा रहा है। सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व प्रकरण क्रमांक 202202130100002 वर्ष 2021-22 विषय अ-21 किसी आदिवासी भूमिस्वामी की भूमि का अंतरण की अनुमति किसी ऐसे व्यक्ति को देना जो आदिवासी जाति का न हो, में चेतन नाग पिता मनिहार नाग निवासी ग्राम संबलपुर तहसील नगरी के द्वारा जो दस्तावेज प्रकरण में संलग्र किये गये हैं, उसके अनुसार 1 फरवरी 2022 को आवेदन प्रस्तुत किया गया था जो कलेक्टर न्यायालय से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से होकर नायब तहसीलदार के न्यायालय में पहुंचा। इश्तेहार प्रकाशन 3.2.22 को जारी किया गया और बयान लिये गये। बयान देने वालों का न्यायालय में किस तारीख को यह बयान लिया गया इसका उल्लेख नहीं है। और तो और स्थल जांच पंचनामा में उल्लेखित वृक्षों का मूल्यांकन वन विभाग से कराये जाने का निर्णय लिया गया था। वह भी नहीं लिया गया। राजस्व निरीक्षक के 17.2.22 के प्रतिवेदन के अनुसार स्थल पर ग्रामीणजन, ग्राम कोटवार की उपस्थिति में गुलमोहर के 5, आरकेसिया 5, सेन्हा 70-80 लगभग, हर्रा-बेहड़ा 5, कहुआ 2, बीजा 1, साजा 2, हर्रा 2-3, महुआ 3, कुसुम 3, मुण्डी 1, करंज 10, शीशम 6, छातीम 20, धनबोहार 5 के वृक्ष मौजूद होना बताया गया है। इसके बाद भी क्रेता, विक्रेताओं ने जीवित वृक्षों को धड़ल्ले से कटाई कर दिया गया। जबकि न्यायालय को इस संबंध में वन विभाग की अनुमति प्राप्त करने के निर्देश विक्रेता को दिया जाना चाहिये था। इस प्रकरण में यदि उच्च स्तरीय जांच होती है तो क्रेता, विक्रेताओं को जो अनैतिक लाभ पहुंचाया गया और इस प्रकरण में जो खामियां दिखी हैं, वह जांच का विषय है।

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