रेल्वे की भूमि पर निगम के अधिकारी करोड़ों की लागत से चौपाटी निर्माण की तैयारी में

धमतरिहा के गोठ
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 संजय छाजेड़ 

धमतरी 5 अक्टूबर। दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे का कुछ भाग नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक 7 में आता है। इससे पूर्व इस रेल्वे की भूमि पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत सेप्टिक इत्यादि का निर्माण किया गया था, सडक़ें बनाई गई थी, पानी की सप्लाई भी निर्बाध रूप से जारी थी। लेकिन जब बड़ी रेल लाईन के लिये यहां सर्वे किया गया तो नगर पालिका द्वारा निर्माणाधीन सडक़, सेप्टिक, पानी सप्लाई को भी धराशायी कर दिया गया। नगर पालिका ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर रेल्वे की जमीन पर बिना अनुमति के यह निर्माण कर नागरिकों की राशि का खुलकर यहां दुरूपयोग किया। इसी तरह अब खसरा नंबर 161 के क्षेत्र से भविष्य में निकलने वाली बालोद, बस्तर रेल लाईन के लिये आरक्षित भूमि में चौपाटी इत्यादि का निर्माण लाखों रूपये की लागत से कर रहे हैं। निगम को कायदे से उक्त आरक्षित भूमि में किसी भी निर्माण को लेकर रेल्वे विभाग से पहले अनुमति प्राप्त करनी चाहिये थी, उसके पश्चात निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिये था किंतु ऐसा नहीं किया जा रहा है। एक बार फिर इसमें खर्च की गई राशि का नुकसान भविष्य में निगम को उठाना पड़ सकता है। दपूम रेल्वे विभाग के पत्र क्रमांक 632/700 दिनांक 1.9.25 को दी गई जानकारी में यह बताया गया कि धमतरी में रेल्वे क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों को राज संपदा अधिकारी द्वारा निष्कासन आदेश किया जा चुका है और अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध निष्कासन कार्य जारी है। बावजूद निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ढाई करोड़ की लागत से उक्त भूमि पर चौपाटी आदि निर्माण के लिये उक्त स्थल को प्रस्तावित किया जा रहा है जो कि शासन एवं जनता के राशि की सीधे बर्बादी है। शहर के जागरूक नागरिकों ने संवेदनशील कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से मांग की है कि रेल्वे की जमीन पर निगम द्वारा बिना अनुमति उक्त स्थल पर प्रस्तावित किसी भी प्रकार के निर्माण के पूर्व संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही की जाये। 

निगम के द्वारा शहर के अन्य वार्डों के साथ साथ औद्योगिक वार्ड भी क्षेत्र में आता है। यहां बकायदा निगम द्वारा रहवासियों को शहरी स्तर की वह सारी सुविधाएं दी जा रही हैं जिसमें कुछ भाग दपूम रेल्वे ने अपना बताते हुए बड़ी रेल लाईन के लिये निर्माण कार्य हेतु बनाई गई सडक़, स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाये गये शौचालय को तहस-नहस कर दिया। वहीं अन्य सुविधाएं भी जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंच चुकी है। इस क्षेत्र में निगम द्वारा लाखों रूपये की लागत से यहां के निवासियों को सारी सुविधाएं दी गई थी। लेकिन यहां से लोगों को बेदखल किया गया और निगम द्वारा बनाये गये अन्य सुविधाओं को भी अतिक्रमण हटाने के समय ध्वस्त किया गया। निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिये था कि निर्माण के पहले वे दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे से इसकी अनुमति प्राप्त करे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और निर्माण कर दिया गया जिसमें आये खर्च की राशि व्यर्थ हो गई। इसी तरह अब शासकीय अभिलेखों में खसरा नंबर 161 जो रेल्वे के लिये आरक्षित और घास जमीन के रूप में दर्ज है, इसे लेकर रेल्वे के अधिकारियों ने जांच एवं कार्यवाही की बात तो कही है। लेकिन इस क्षेत्र में फिर से निगम के कुछ लोगों द्वारा जान बूझकर लाखों रूपये की लागत से चौपाटी इत्यादि का निर्माण किये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है जिसके तहत आने वाले समय में यहां इसका निर्माण हो जायेगा किंतु लोगों का ऐसा कहना है कि जब यह क्षेत्र रेल्वे के लिये आरक्षित है तो इसका उपयोग निगम किस अधिकार के तहत कर रहा है। जिस तरह औद्योगिक वार्ड की सुविधाओं का हुआ, उसी तरह अब इस क्षेत्र में होने वाले निर्माण का भी हो सकता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि निगम के जिम्मेदार अधिकारी एवं कुछ चुने हुए जनप्रतिनिधि उक्त स्थल का निरीक्षण भी किये हैं।

तत्कालीन कलेक्टर रजत बंसल ने उक्त भूमि को आरक्षित करने को लेकर एक पत्र दपूम रेल्वे के डीएम को लिखा था जिसके आधार पर यह पता चला है कि उक्त खसरा नंबर 161 का विशालकाय भूभाग बालोद एवं बस्तर क्षेत्र के बड़ी रेल लाईन के लिये आरक्षित रखा गया है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि निगम द्वारा पूर्व वर्षों में भी यहां अटल गार्डन इत्यादि का निर्माण लाखों रूपये की लागत से करवाया गया है। जहां गार्डन में लगाये गये मनोरंजन एवं खेलकूद के सामान पूरी तरह जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। जहां चौपाटी का निर्माण किया जाना है, उस क्षेत्र में आवागमन भी रिस्क भरा रहता है। चूंकि इस क्षेत्र में जाने के लिये सडक़ बनी है जिसके आजू-बाजू जंगलनुमा झाडिय़ां उग चुकी हैं जहां से जलजनित जीव, सांप इत्यादि का खतरा रहता है। इसके दूसरे रास्ते को लेकर विवाद भी कायम है जो किसी निजी व्यक्ति का बताया जा रहा है। पूर्व में निर्माण हुए कार्यों की स्थिति को देखते हुए इस क्षेत्र में चौपाटी का निर्माण भी व्यर्थ साबित होगा क्योंकि शहर के अंतिम छोर में बनाये जा रहे इस चौपाटी के स्थान पर जाने के लिये नागरिक तैयार भी नहीं होंगे। जागरूक लोगों का कहना है कि अन्य गार्डन शहर में स्थापित हैं, उनकी भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। नेहरू गार्डन जैसे गार्डन उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं और यहां पदस्थ अधिकारी अपने स्वार्थपूर्ति के लिये ऐसे विवादित स्थलों में जाकर शासन से प्राप्त होने वाली राशि का दुरूपयोग करने के लिये तत्पर हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि नगर निगम में पूर्ववर्ती शहरी सरकार के समय भी अनेक भ्रष्टाचार उजागर हुए जिसके लिये आज शहरी सत्ता में बैठे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने शिकायत तक की थी और जांच की बात भी कही थी। लेकिन निगम में निर्वाचित होने के बाद ये लोग उक्त शिकायतों को नजरअंदाज कर दिये। 

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की दशा अधिकारियों की तानाशाही के चलते चिंतनीय है। यहां पदस्थ कुछ अधिकारी अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने परिचितों को सप्लाई एवं कार्य का ठेका दिलाने में मशगूल हैं। खबर तो यह भी है कि यहां पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा बिलासपुर जिला के रहने वाले संबंधी से सप्लाई ऑर्डर इत्यादि करवा रहे हैं। इनके ऊपर कार्यों के आबंटन में भी भेदभाव का आरोप लग रहा है। अब वे ऐसे विवादित क्षेत्र में लाखों की लागत से निर्माण को लेकर तत्पर दिखाई दे रहे हेैं। इस निर्माण के पूर्व इन्होंने दपूम रेल्वे से कोई अनुमति प्राप्त नहीं की है। आने वाले वर्षों में जब बड़ी रेल लाईन धमतरी पहुंचेगी और यहां से बालोद, बस्तर तक बड़ी रेल लाईन निकाली जायेगी तो उस समय बिना अनुमति के होने वाले निर्माण को फिर से ध्वस्त किया जायेगा जिसकी संपूर्ण जवाबदारी निगम में बैठे अधिकारियों की होगी जो जान बूझकर ऐसे विवादित स्थलों में चौपाटी जैसे निर्माण को तवज्जो दे रहे हैं। पूर्व में भी निगम में हुए भ्रष्टाचार के लिये यहां पदस्थ कुछ अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं। नई शहरी सरकार के आने के बाद नागरिकों का ऐसा मानना था कि ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण किया जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और आज यहां निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बात न मानते हुए अधिकारियों की एक टीम पूरी तरह इन्हें नीचा दिखाने के फिराक में ऐसे विवादित कार्यों को अंजाम देने में मशगूल हैं। 


रेल्वे की भूमि पर चौपाटी एवं अन्य निर्माण को लेकर महापौर रामू रोहरा से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है, निगम के अधिकारियों से चर्चा के बाद ही इस मामले में कुछ कहना संभव होगा। वहीं निगम उपायुक्त श्री सार्वा से प्रतिनिधि ने जब पूछा कि रेल्वे की भूमि पर करोड़ों रूपये खर्च कर निर्माण कार्य करवाया जा रहा है, क्या इसके लिये रेल्वे विभाग से आपके द्वारा अनुमति ली गई है, मैं दस्तावेजों को देखने के बाद ही कुछ जानकारी दे पाऊंगा, वर्तमान में इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

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