लगातार बारिश, गंगरेल सहित अन्य बांध हुए लबालब, कभी भी खुल सकता है गेट

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 
धमतरी 30 अगस्त। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से जिले के बांधों में जल स्तर में भारी वृद्धि हो रही है। वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया हेै। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी लगातार बारिश से जिलेवासियों को दो-चार होना पड़ रहा है। नदी, नाले उफान पर हैं, संभावना जताई जा रही है कि यदि इसी प्रकार बारिश होते रही तो गंगरेल बांध सहित जिले के अन्य बांधों के गेट खुलने के कगार में पहुंच जायेंगे। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एच एल कुरेशिया के द्वारा प्रेषित जानकारी के अनुसार रविशंकर सागर जलाशय गंगरेल बांध में अब तक 90.72 प्रतिशत पानी का भराव हो चुका है वहीं मुरूमसिल्ली बांध में 98.72 प्रतिशत, दुधावा में 82.37 प्रतिशत, सोंढूर में 68.90 प्रतिशत जल का भराव हो चुका है। यहां यह बताना लाजिमी है कि सोंढूर, दुधावा, मुरूमसिल्ली बांधों के लबालब होने पर वहां से छोड़े जाने वाला सीधे गंगरेल बांध में पहुंचेगा जिससे गंगरेल बांध का जल स्तर बढ़ सकता है और गेट खोलने की नौबत आ सकती है। 
 धमतरी शहर के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित उक्त बांधों के कैचमेंट एरिया में लगातार बारिश के चलते बांधों का जल स्तर नियमित बढ़ रहा है जिसे लेकर जल संसाधन विभाग के अधिकारी अपनी पैनी नजर से लगातार स्थिति का जायजा ले रहे हैं। दो दिनों से लगातार बारिश के चलते एक ओर बांधों का जल स्तर लगातार बढते जा रहा है वहीं दूसरी ओर अनवरत बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कुछ क्षेत्रों का बारिश के चलते धमतरी मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। जिला प्रशासन भी पूरी तरह से ऐसी विषम परिस्थितियों की सूचनाएं एकत्र कर वैकल्पिक व्यवस्था कराने में लगा हुआ है। मौसम विभाग की सूचना के अनुसार बंगाल की खाड़ी में उठ रहे तूफान की वजह से 18 राज्यों सहित छत्तीसगढ़ में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे अनवरत बारिश से देखने में आया है कि ऐसे हालात में आने वाले पर्यटकों को नौकायन का लाभ संबंधित व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा है जो किसी खतरे से कम नहीं। इस स्थिति को देखते हुए जागरूक लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक मौसम साफ न हो जाये, तब तक ऐसे नौकायन पर रोक लगाई जाये। 
 बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान के चलते 18 राज्यों में छत्तीसगढ़ भी शामिल है जहां भारी से अति भारी बारिश होने की जानकारी व्हाट्सअप में वायरल हो रही है। लोगों का मानना है कि इसी तूफान के चलते धमतरी शहर एवं आसपास के ईलाकों में लगातार बारिश के चलते जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है। बांधों का जल स्तर भी लगातार बढ़ रहा है जिसे देखने के लिये दूरदराज यहां तक बाहरी प्रांत के भी पर्यटक मनोरम दृश्य का लाभ उठाने के उद्देश्य से अपने परिवार सहित बांधों के समीप निर्मित स्थिति को निहारने पहुंच रहे हैं। बारिश से किसी भी प्रकार का अहित न हो, ऐसा मानते हुए बांध क्षेत्रों में रेस्क्यू दल नियुक्त किया गया है जो बांधों के क्षेत्र में पहुंचकर लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। गौरतलब रहे कि गंगरेल बांध में कांकेर जिले के लखनपुरी, चिनौरी क्षेत्र के कैचमेंट एरिया से भारी पानी की आवक होती है। गंगरेल बांध का पानी लगभग 32 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। जल संसाधन विभाग द्वारा चिनौरी गेज पर कर्मियों की नियुक्ति हर वर्ष की जाती रही है, इस वर्ष भी चिनौरी गेज पर यह कर्मी वहां लगे वॉटर लेबल के नापने वाले गेज पर खड़े होकर लगातार निगरानी करते हैं और अपने अधिकारियों को समय समय पर होने वाले पानी की आवक की जानकारी देते हैं जिससे उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां व्यवस्था की जाती है। लगातार हो रही बारिश से बांधों का जल स्तर बढ़ रहा है वहीं किसानी कार्य में भी काफी सहूलियत होना बताया गया है।
जिले के विभिन्न बांधों में आज तक के भराव की स्थिति-
 रविशंकर सागर जलाशय गंगरेल बांध-प्रदेश का सबसे बड़ा बांध गंगरेल बांध में कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश से पानी की आवक आने वाले दिनों में और बढऩे की संभावना है। समाचार लिखे जाने तक 32 टीएमसी की क्षमता वाले गंगरेल बांध अब तक 90.72 प्रतिशत से भी अधिक भर चुका है। वर्तमान में अभी कैचमेंट एरिया से 10 हजार क्यूसेक, मुरूमसिल्ली में ऑटोमेटिक सायफन सिस्टम चालू होने से लगभग 1500 क्यूसेक, दुधावा से 300 क्यूसेक आवक हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में गंगरेल बांध पूरी तरह भर जायेगा क्योंकि कैचमेंट एरिया के अलावा अन्य बांधों से भी गंगरेल बांध में पानी पहुंच रहा है। 
 मुरूमसिल्ली बांध-पूरे एशिया का एकमात्र ऑटोमेटिक सायफन वाला बंाध मुरूमसिल्ली भी लगातार बारिश के चलते 98.72 प्रतिशत तक भर चुका है। बांध भरने के बाद वहां लगा ऑटोमेटिक सायफन सिस्टम खतरे के निशान के पहुंचने के पूर्व प्रारंभ हो चुका है और समाचार लिखे जाने तक मुरूमसिल्ली बांध से लगभग 1500 क्यूसेक पानी की आवक गंगरेल बांध में हो रही है। यहां यह बताना लाजिमी है कि उक्त बांध का निर्माण अंग्रेजों द्वारा किया गया है।
 दुधावा जलाशय-कांकेर जिले में आने वाला दुधावा जलाशय में लगातार हो रही बारिश से पानी की आवक में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। दुधावा बांध में अब तक 82.37 प्रतिशत का भराव हो चुका है। यहां हो रहे भारी आवक के चलते दुधावा जलाशय भी पूरी तरह भरने के कगार पर है। वर्तमान में दुधावा जलाशय से 300 क्यूसेक पानी गंगरेल बांध मेें छोड़ा जा रहा है। 
 सोंढूर जलाशय-जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में निर्मित सोंढूर जलाशय में इन दिनों पानी की आवक लगातार जारी है। विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सोंढूर बांध अब तक लगभग 70 प्रतिशत तक भर चुका है और लगातार हो रही बारिश के चलते वर्तमान में लगभग 1000 क्यूसेक पानी की आवक बांध में हो रही है।
 जिले में हो रही लगातार बारिश के मद्देनजर जिले के संवेदनशील कलेक्टर अबिनाश मिश्रा पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। वे अपने मातहतों के साथ स्थिति पर नजर बनाये हुए हैं। श्री मिश्रा ने जिलेवासियों से आव्हान किया है कि भारी बारिश को देखते हुए बांध एवं नदी, नालों के करीब न जायें। वहीं किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है जिसमें अप्रिय स्थिति होने पर वहां फोन कर इसकी जानकारी दी सकती है।
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