संजय छाजेड़
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भक्ति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक रंगों का सुंदर संगम देखने को मिला। आयोजन में मुख्य रूप से आदरणीय राजयोगिनी सरिता दीदी जी ( संचालिका, जिला धमतरी ) बहन कामिनी कौशिक (लायंस क्लब), सुषमा नंदा (संचालिका, शिवनंदा अस्पताल), डॉ. आस्था नंदा, डॉ. श्रुति वसानी, डॉ. मुरारी वसानी, बहन स्वाति भलाल एवं पार्वती बहन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात बाल कृष्ण एवं राधा के मनमोहक स्वरूप को झूला झुलाया गया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक उमंग से सराबोर रहा।
कार्यक्रम में राजयोगिनी सरिता दीदी जी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण केवल पूजनीय देवता ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कारों, पवित्रता, प्रेम, सत्यता और दिव्य गुणों के प्रतीक हैं। उन्होंने उपस्थित जनों को श्रीकृष्ण के जीवन एवं आचरण से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में भी पवित्रता, सद्भावना, प्रेम और श्रेष्ठ कर्मों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के गुणों को जीवन में धारण करना ही जन्माष्टमी मनाने का वास्तविक उद्देश्य है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत “सतयुग का कृष्ण” विषय पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका रही। नाटिका के माध्यम से सतयुग की पवित्रता, सुंदरता, दिव्यता और श्रीकृष्ण के श्रेष्ठ चरित्र को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। बच्चों के अभिनय, संवाद और नृत्य ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
इसके साथ ही अन्य बच्चों ने भी विभिन्न भजनों, गीतों एवं नृत्य की सुंदर प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। बच्चों की प्रतिभा और उत्साह ने पूरे वातावरण को आनंद एवं उमंग से भर दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर केक काटकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की खुशियां मनाई गईं तथा सभी बच्चों को स्नेह स्वरूप सौगात प्रदान की गई। इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा बच्चों एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन को श्रेष्ठ संस्कारों, पवित्र विचारों और दिव्य गुणों से सजाने की प्रेरणा लेने का पर्व है।
