सार्थक के विशेष बच्चों की कलात्मक राखियों ने जीता दिल

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 
 सार्थक स्कूल के विशेष बच्चों के सहयोग से तैयार की गई हस्तनिर्मित एवं कलात्मक राखियों और शगुन के लिफाफों की प्रदर्शनी एवं बिक्री का आयोजन 18 अगस्त को बिपिन दोशी एवं रसीला बेन दोशी के निवास, रत्नाबांधा रोड, धमतरी में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रदर्शनी में शहर की उत्कृष्ट कलाकार सुश्री प्रार्थना दुग्गड़ की हस्तनिर्मित सुंदर आरती की थालियां, शुभ-लाभ हैंगिंग, तोरण एवं अन्य सजावटी सामग्री भी आकर्षण का केंद्र रही।
प्रदर्शनी का उद्घाटन कल्पवृक्ष जैन महिला ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती रूपल जैन लोढा ने रिबन काटकर किया। सार्थक स्कूल के बच्चों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीमती स्वाति लोढा एवं हर्षा कोचर भी उपस्थित रहीं।
सार्थक के यज्ञदत्त, मनीषा, ईशु, कुलदीप,एकलव्य एवं वत्सला ने उत्साहपूर्वक अपने हाथों से बनाई राखियां अतिथियों को दिखाईं। अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा एवं मेहनत की सराहना की तथा राखियां और शगुन के लिफाफे खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया
श्रीमती रूपल जैन लोढा ने कहा कि विशेष बच्चों द्वारा इतनी सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार करना उनकी प्रतिभा, मेहनत और प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उनकी बनाई वस्तुओं को खरीदना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सार्थक स्कूल के इस प्रयास की सराहना करते हुए बच्चों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी
राखी मेकर्स बच्चों को रूपल, स्वाति एवं हर्षा की ओर से प्रोत्साहन राशि और चॉकलेट्स
बच्चों के उत्साह और मेहनत से प्रभावित होकर श्रीमती रूपल जैन लोढा, श्रीमती स्वाति लोढा एवं हर्षा कोचर की ओर से सार्थक के राखी मेकर्स बच्चों को प्रोत्साहन राशि एवं चॉकलेट्स के बॉक्स उपहार में दिए गए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की
प्रशिक्षकों का वक्तव्य—“चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उतना ही रोचक और प्रेरणादायक भी”
सार्थक स्कूल की प्रशिक्षक मैथिली गोड़े, देविका दीवान, कौशल्या यादव एवं काजल रजक ने बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को प्रशिक्षण देना चुनौतीपूर्ण तो है ही, लेकिन उतना ही रोचक और प्रेरणादायक भी है। बच्चों को छोटी-छोटी प्रक्रियाओं को समझाने और लगातार अभ्यास कराने में समय लगता है, लेकिन जब वे स्वयं कोई वस्तु तैयार करते हैं तो उनके आत्मविश्वास और खुशी का अनुभव अलग ही होता है।
छह वर्षों से राखी निर्माण का प्रशिक्षण, इस वर्ष बच्चों ने दिखाया नया हुनर
सार्थक की सचिव ने बताया कि विगत छह वर्षों से विशेष बच्चों के हितार्थ सार्थक स्कूल में राखियां तैयार कराई जा रही हैं। इस वर्ष बच्चों ने पहले से अधिक उत्साह और जुनून के साथ काम किया है। उन्होंने क्रिस्टल बॉल्स, रंग-बिरंगे मोतियों, फूल-पत्ती, मोरपंखी वीरा, स्वीट ब्रदर पेंडल सहित विभिन्न सजावटी सामग्रियों का उपयोग कर मोली एवं अलग-अलग डोरियों में आकर्षक राखियां तैयार की हैं।उन्होंने बताया कि अब बच्चों की राखियों की फिनिशिंग भी बेहतर होने लगी है। मोतियों को पकड़ने-पिरोने में क्रम बताने अथवा गांठ बांधने जैसे कुछ कार्यों में उन्हें थोड़ी मदद की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन 
सार्थक की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने बताया
प्रदर्शनी में रखी अधिकांश राखियां बच्चों ने स्वयं तैयार की हैं। इसके पीछे प्रशिक्षकों की मेहनत भी महत्वपूर्ण है, जिसका सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि, आने वाले रक्षाबंधन तक बच्चे इन कार्यों में और अधिक कुशल एवं आत्मनिर्भर होंगे।
डॉ. दोशी ने बताया कि बच्चों को शगुन के लिफाफे और तिरंगा बैज बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विशेष बच्चों में कौशल विकास के साथ स्वरोजगार की भावना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
तेज बारिश के बावजूद बच्चों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे 
प्रदर्शनी में राधिका जोशी, नेहा लोढा, अर्चना नीरज नेताम, ज्योति शांडिल्य, संतोष शाह, सुलेखा जोशी, विशाल शाह, मोना शाह एवं रेखा कुकरेजा सहित अनेक लोगों ने राखियां एवं अन्य सामग्री खरीदी।
उन्होंने कहा कि, इन राखियों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें विशेष बच्चों ने अपने हाथों से बनाया है। इसी भाव से वे तेज बारिश के बावजूद प्रदर्शनी में पहुंचे और बच्चों की बनाई राखियां खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया। सार्थक की सचिव स्नेहा राठौड़ ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सहसचिव वंदना मिराणी तथा कार्यकारिणी सदस्य पायल खंडेलवाल एवं सुमन शर्मा का विशेष सहयोग रहा।

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