संजय छाजेड़
धमतरी। लाखों रूपये के रिक्शा एवं टिप्पर खरीदी को लेकर नगर निगम इन दिनों सुर्खियां बटेर रहा है। यहां कार्य के नाम पर लाखों, करोड़ों की योजनाएं बनती हैं। लेकिन यह नहीं देखा जाता कि उक्त स्थल मालिकाना हक का है अथवा रेल्वे विभाग का और धड़ाधड़ कार्य की स्वीकृति लेकर उस ओर कदम बढ़ाया जाता है और बाद में ऐसे कार्य में लगाई गई राशि का व्यर्थ में खर्च करना साबित होता है। निगम में बैठे अधिकारियों की इस प्रकार की कार्यशैली को लेकर शहर की जनता में खासी नाराजगी देखी जा रही है। इनका कहना है कि नागरिकों की समस्याओं को लेकर यहां बैठे अधिकारी पूरी तरह सक्रिय नहीं है। विकास से अधिक उन्हें अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की चिंता रहती है जिसके कारण लोगों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं श्रृंखलाओं में अब एक नई बात धमतरिहा के गोठ के संज्ञान में आई है जिसके चलते यह बात सामने आई है कि निगम में एक ओर शासकीय योजनाओं के नाम पर लाखों, करोड़ों रूपये लगाये जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट में कार्यरत 8 लोग जो निगम में कार्य ही नहीं कर रहे हैं उन्हें प्रत्येक माह लाखों का भुगतान निगम से किये जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसमें से एक कर्मचारी दिल्ली में है, लेकिन वेतन निगम से होने की खबर है। यह सिलसिला लंबे समय से जारी है।
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के ऊपर जाकर यहां पदस्थ कुछ अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। पिछले माह ही शहर में कचरा संग्रहण हेतु 79 रिक्शा एवं दो टिप्पर खरीदी किये गये जो शहर के वार्डों में कभी नहीं देखे गये। खरीदी के पश्चात इन रिक्शों का उपयोग नहीं होने से इसे कबाड़ के रूप में वर्कशॉप में रख दिया गया है। इसी तरह अभी हाल ही में कांटा तालाब स्थित भूमि में करोड़ों की लागत से चौपाटी इत्यादि का निर्माण कराये जाने की तैयारी चल रही है। खबर है कि यह भूमि दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के भूभाग में से एक बेशकीमती जमीन है जिसमें निर्माण कार्य के पूर्व निगम द्वारा दपूम रेल्वे विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। इससे पहले भी औद्योगिक वार्ड में नगर पालिका परिषद से लेकर निगम बनने तक अनेक निर्माण कार्य कराये गये जिसमें लाखों रूपये की लागत लगाई गई किंतु दपूम रेल्वे के लोगों ने जब यहां के 400 निवासियों को हटाये जाने की कार्यवाही की तब उक्त निर्माण कार्य भी क्षतिग्रस्त हो गया। यहां बैठे अधिकारियों को यह देखना चाहिये था कि उक्त क्षेत्र जब रेल्वे भूमि के नाम पर है और औद्योगिक वार्ड में आता है तो निर्माण के पूर्व रेल्वे विभाग से अनुमति लेनी चाहिये थी लेकिन नहीं लिया गया जिसका परिणाम तोडफ़ोड़ के रूप में तब्दील हो गया। इसी तरह कांटा तालाब क्षेत्र में चौपाटी आदि का निर्माण को लेकर निगम के अधिकारी लगे हुए हैं। इन्होंने रेल्वे विभाग से कोई अनुमति प्राप्त नहीं की है, न ही इस संबंध में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से कोई अनुमति प्राप्त की है। इस तरह यहां पदस्थ अधिकारियों के निर्माण कार्यों के प्रति रूचि संदेह के दायरे में आ रही है।
विश्वसनीय सूत्रानुसार पता चला है कि एक तरफ निर्माण कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है और रेल्वे के लिये आरक्षित भूमि में चौपाटी का निर्माण किया जा रहा है। शासन एवं नागरिकों के पैसे से रिक्शा, टिप्पर खरीदी करने के बाद उसे नहीं चलाया जा रहा है और उक्त रिक्शा, टिप्पर निगम के वर्कशॉप में पड़े-पड़े कंडम स्थिति में पहुंच चुके हैं। इन्हीं सब भर्राशाही का यह आलम है कि यहां पिछले कई वर्षों से 8 कर्मचारियों को कार्य पर रखना बताकर उन्हें भुगतान किया जा रहा है जिनके बारे में बताया गया है कि ये कर्मचारी यहां कार्य करते ही नहीं हैं और उन्हें भुगतान किया जा रहा है। इन 8 कर्मचारियों में एक कर्मचारी ऐसा है जो दिल्ली में रहता हेै, उसे भी निगम भुगतान कर रहा है। इस तरह अधिकारियों की नादिरशाही के चलते मुफ्त में ऐसे लोगों को वेतन बांटा जा रहा है जिससे शासन एवं नागरिकों के पैसे का सीधे सीधे दुरूपयोग हो रहा है। निगम के बारे में अनेक ऐसे समाचार मीडिया की सुर्खियों में आते रहते हैं। लेकिन इन पर कभी भी जांच अथवा कार्यवाही नहीं होती जिससे ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बिना जानकारी दिये इस प्रकार की खरीदी, निर्माण कार्य अब 8 कर्मचारियों को पिछले लंबे समय से निगम के अधिकारी आंख मूंदकर वेतन का भुगतान कर रहे हैं जो निगम में कार्यरत ही नहीं हैं। जागरूक लोगों ने इस खबर को धमतरिहा के गोठ को जानकारी देते हुए शासन एवं प्रशासन से इसकी त्वरित जांच की मांग की है। ऐसे जागरूक लोग शीघ्र ही कलेक्टर अबिनाश मिश्रा एवं संवेदनशील महापौर रामू रोहरा से मिलकर निगम में हो रहे भर्राशाही, भ्रष्टाचार एवं कार्य नहीं करने वाले कर्मचारियों को भुगतान के संबंध में शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं इस पूरे मामले को लेकर निगम आयुक्त प्रिया गोयल से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया परंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया। निगम उपायुक्त श्री सार्वा से दूरभाष पर संपर्क कर इस मामले में पूछा गया तो उनका कहना है कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है। आपके माध्यम से यह मेरे संज्ञान में आ रहा है। पूरी फाईल देखने के बाद ही इस मामले में कोई जानकारी दे पाऊंगा।

