संजय छाजेड़
धमतरी, 29 जुलाई। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बुधवार को रुद्री रोड स्थित होटल जिंजर में "समझदार पालक – सशक्त प्रदेश" विषय पर एक प्रेरणादायी एवं सहभागितापूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों के समग्र विकास, सकारात्मक पालन-पोषण एवं बदलते सामाजिक परिवेश में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक एवं सशक्त बनाना था। कार्यशाला में बड़ी संख्या में अभिभावक दंपत्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे कार्यक्रम के दौरान सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर रामू रोहरा ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार का सकारात्मक वातावरण और जागरूक अभिभावक भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि किसी भी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की पहली पाठशाला उसका परिवार होता है और उसके प्रथम शिक्षक माता-पिता होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण, संवादपूर्ण पारिवारिक संस्कृति तथा भावनात्मक सहयोग प्रत्येक अभिभावक की जिम्मेदारी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ समय बिताने, उनकी भावनाओं को समझने, उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनने तथा विश्वास का वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समझदार पालक ही सशक्त समाज और विकसित प्रदेश की नींव रखते हैं।
रायपुर से आईं प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. गार्गी पांडे ने बदलते समय में बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल युग की चुनौतियों तथा अभिभावकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माता-पिता का व्यवहार बच्चों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और भविष्य को सीधे प्रभावित करता है। उन्होंने व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के साथ प्रभावी संवाद, सकारात्मक अनुशासन तथा भावनात्मक जुड़ाव के सरल एवं उपयोगी उपाय बताए।
कार्यशाला में अभिभावकों के लिए अनेक सहभागितापूर्ण एवं मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें दंपत्तियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में अधिकांश अभिभावकों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार का आयोजन उन्होंने पहली बार देखा, जहां केवल बच्चों की नहीं बल्कि माता-पिता की जिम्मेदारियों और व्यवहार पर भी गंभीर एवं व्यवहारिक चर्चा की गई। उपस्थित दंपत्तियों ने आयोग से आग्रह किया कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं ताकि अधिक से अधिक परिवार इसका लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम का प्रभाव केवल सभागार तक सीमित नहीं रहा। आयोग की टीम ने नगरी विकासखंड के ग्राम घटुला में भी सामान्य शेड के नीचे बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। बच्चों से उनकी पढ़ाई, सपनों, पारिवारिक वातावरण, खेलकूद, शिक्षा और भविष्य को लेकर खुलकर चर्चा की गई। टीम ने बच्चों को उनके अधिकारों, आत्मविश्वास, शिक्षा के महत्व तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित यह संवाद बच्चों और स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं सार्थक साबित हुआ।
कार्यक्रम का सफल संचालन आयोग अध्यक्ष के सचिव दिव्यांशी शर्मा ने प्रभावी एवं सहज शैली में किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, विभिन्न सत्रों तथा गतिविधियों का समन्वय करते हुए अभिभावकों को पूरे कार्यक्रम से जोड़कर रखा। उन्होंने कहा कि राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का उद्देश्य केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को जागरूक बनाकर परिवारों में सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है, ताकि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, संस्कारित और आत्मविश्वास से भरपूर भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।
