अगर बंधन से निकलना हो तो स्वयं को छोटा समझना चाहिए

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 
धमतरी/ रुद्री रोड हनुमान मंदिर में चल रही हनुमान कथा में परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए आज सुंदरकांड की कथा बताएं, लंका दहन की प्रसंग में गुरुजी बताए कि जितना ही बड़े बनोगे उतना ही बंधन छोटा बन जाओ बंधन से मुक्त हो जाओगे अहंकार समाप्त इर्षा समाप्त एकदम सरल बन जाना चाहिए। सरल लोग बंधन से मुक्त हो जाते हैं, रावण के सभा में हनुमान जी भी बहुत छोटे बन गए और बाहर निकाल कर पूछ को बढ़ा दिया । पूंछ बढ़ती गई , और जितना अधिक पूछ बढ़ा उतने अधिक कपड़ा तेल लगने लगा। दरबार में कुछ बचा नहीं रावण का गोदाम खाली हो गया रावण ने आदेश दिया पूरे लंका से लिया जाय, सब के घर से लिया और लंका छोटा सा साम्राज्य नहीं है लंका एक बड़ा सा विशाल देश है और पूरे राष्ट्र से हनुमान जी की पूंछ में कपड़ा बांधने के लिए कपड़ा आने लग गया सब के सब हनुमान जी की पूछ में समस्त तेल घी कुछ बचा ही नहीं, हनुमान जी की पूछ कम नहीं हो रही है जिसने स्वयं को छोटा बना लिया है उसकी पुछ कभी कम नहीं होती है। उसकी कुछ बढ़ती जाती है। हनुमान जी की पूंछ बढ़ते जा रही है और पूरे देश भर के लोग या लीला देखने के लिए तमाशा देखने के लिए और उपहास करने के लिए सब के सब आए । भगवान जितना तमाशा देखने वाले थे खुद ही तमाशा बना रहे हैं । और हनुमान जी के पूछ में आग लगा देते हैं हनुमान जी इधर-उधर लंका में सबके महल में जाते हैं और पूरी लंका में आग लग जाती है, अचानक हनुमान जी की दृष्टि उल्टे लटके हुए शनि देव पर पड़ती है, रावण शनिदेव को उल्टा लटका कर रखे थे,नीचे सिर था और ऊपर पैर। हनुमान जी देखे यह बंधे हुए है भाग नहीं पाएगा ,आग लगेगी तो फिर यह भी जल जाएगा तो इसे मुक्त कर देना चाहिए , हनुमान जी रस्सी को खोल दिए जब खोले तो शनि महाराज खड़े हो गए ,हनुमान जी ने कहा कि आप का पूर्ण परिचय दीजिए, शनिदेव कहते है जो भी हूं बड़ा खतरनाक लग रहा है । मेरा नाम शनि है मैं नौ ग्रहों में मेरा नाम शनि है , मेरे वक्र दृष्टि से जो सोना अभी धूमिल हो रहा है काला पड़ रहा है अब मेरी कोप दृष्टि इसके ऊपर सीधे पड़ेगी अभी तक मेरी दृष्टि सोने की लंका पर पढ़ नहीं रही थी तुम्हारे अग्नि की ज्वाला अपनी लपेट में ले चुकी है सोना काला पड़ने लगा है किंतु अभी भस्म नहीं हो पा रहा है अब मेरी दृष्टि इसके ऊपर पड़ेगी क्योंकि अब मैं सीधा हो गया अब मेरी दृष्टि पड़ेगी वक्र दृष्टि से मैं इसे देखूंगा लंका को और पूरी लंका अब भस्म होकर के जलेगी किंतु हनुमान तुमने मुझे मुक्त किया है इसलिए मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि जो भी तुम्हारा सुमिरन करेगा जो भी तुम्हारी पूजा भक्ति करेगा उसे पर सी शनि का प्रकोप कभी नहीं होगा । जिनको भी शनि की साढ़ेसाती ढैया या महादशा चलती रहती है उनको हनुमान जी की आराधना जरूर करनी चाहिए। काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही।

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