संजय छाजेड़
धमतरी । विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा आचार संहिता लगने के पूर्व ऐसे अधिकारी, कर्मचारी जिनका कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक पूर्ण हो चुका है, ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों की सूची तलब की थी जिसके तहत समूचे प्रदेश के ऐसे लोगों को स्थानांतरित किया गया। पिछले दिनों मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा प्रदेश के तीन कलेक्टर, दो एसपी, एडीशनल एसपी को भी हटाकर उनके स्थान पर अन्य लोगों की नियुक्ति किये जाने की कार्यवाही चल रही है। लेकिन धमतरी जिला एक ऐसा जिला है जहां अधिकारी, कर्मचारी 15 वर्षों से पदस्थ हैं जिनके संबंध में अनेकों बार उनके स्थानांतरण की मांग की गई। मांग अनुरूप स्थानांतरण भी हुआ, लेकिन राजनीतिक एप्रोच के चलते यह अधिकारी पुन: धमतरी में पदस्थ होने में कामयाब हो गये। ऐसे लोगों के विरूद्ध चुनाव आयोग क्यों कार्यवाही नहीं कर रहा है, यह जनचर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार जिले में वर्षों से पदस्थ खाद्य अधिकारी का स्थानांतरण आज तक नहीं हुआ है जिसे लेकर नागरिकों ने चुनाव पदाधिकारी से मांग की है कि वर्षों से जमे उक्त अधिकारी का तत्काल जिले से बाहर स्थानांतरण किया जाना चाहिये क्योंकि इनका संबंध राजनीतिक दल के नेताओं से रहा है जिसकी वजह से ये चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि धमतरी जिले में खाद्य शाखा में बसंत कोर्राम जो कि खाद्य निरीक्षक के रूप में यहां पदस्थ किये गये थे, वर्ष 1999 में इनका जब धमतरी आगमन हुआ, उसके बाद आज तक ये पदोन्नति पाकर खाद्य अधिकारी तक का सफर तय कर चुके हैं। लेकिन इनका स्थानांतरण सूची में नाम नहीं है। इसी तरह शिक्षा विभाग के बीआरसी भी वर्षों से पदस्थ हैं। इसी तरह जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों में भी अनेक अधिकारी, कर्मचारी जो नेतागिरी में भी शामिल रहे हैं, ऐसे लोगों का स्थानांतरण भी नहीं किया गया। जबकि जल संसाधन विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी का वर्ष 2013-14 में चुनाव के दौरान काफी शिकायतें मिलने पर पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी ने उनको जिला निर्वाचन कार्यालय में संलग्र किया था। ऐसे लोग आज भी वर्ष 2023 के चुनाव में स्थानांतरित नहीं किये गये। खबर के मुताबिक खाद्य निरीक्षक से खाद्य अधिकारी बने बसंत कोर्राम का स्थानांतरण पूर्व में हुआ था। लेकिन इनके द्वारा अपने आकाओं के दरबार में मत्था टेककर उक्त स्थानांतरण को रद्द करवाकर पुन: धमतरी में अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया। चूंकि राजनीतिक दलों के नेताओं से इनके बेहद याराना संबंध है, जिसकी वजह से इनकी पकड़ मजबूत है और यही कारण है कि इनका जब-जब स्थानांतरण ऐसे ही पहुंच वाले नेताओं के द्वारा रद्द करवाने में सहयोग किया जाता रहा है जिसकी वजह से नागरिकों द्वारा यह मांग बलवती हो रही है।
छग शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय द्वारा 28 जून 2010 को आदेश जारी कर बसंत कुमार कोर्राम को धमतरी से कांकेर के लिये स्थानांतरित किया गया था। लेकिन इसके बाद इन्होंने अपनी वापसी कांकेर से धमतरी वर्ष 2011 में करवा ली। तबसे ये अभी तक उसी कार्यालय में पदस्थ हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से उपरोक्त तथ्य मालूम चले हैं। जिलेवासियों का कहना है कि एक ओर चुनाव आयोग अर्थात मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों का स्थानांतरण होना चाहिये। चूंकि पिछले दिनों प्रदेश के कुछ आईएएस, आईपीएस अधिकारियों का तबादला भी किया गया है जिनके स्थान पर दूसरे अधिकारी को पदस्थ करने की कवायद चल रही है। ऐसे में धमतरी जिले में पदस्थ खाद्य अधिकारी खाद्य विभाग, जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ बीआरसी सहित जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों में लंबे समय से अधिकारी, कर्मचारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं होता, इसे लेकर एक लंबी-चौड़ी बहस जिले में होने लगी है। अब देखना है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छग शासन ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों पर क्या कार्यवाही करता है। सूत्रों के मुताबिक यह भी पता चला है कि ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों के विरूद्ध मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक शिकायत भी जागरूक लोगों द्वारा प्रेषित की जा रही है। जागरूक लोगों का यह भी कहना है कि इनके रहते धमतरी जिले में निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में बाधा भी उत्पन्न हो सकती है।

