अतिक्रमण पर आखिर कब चलेगा निगम का बुलडोजर

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 

धमतरीसहायक संचालक नगर निवेश तथा ग्राम निवेश धमतरी द्वारा अनाधिकृत विकास के नियमितिकरण हेतु प्रस्तुत आवेदन को निरस्त कर दिया गया। 8 मई को निरस्त किये गये आवेदन की जानकारी अनाधिकृत निर्माण करवाने  वाले सुरेश वल्र्यानी को कार्यालय के पत्र क्रमांक 469/अविनि/प्रक्र-53/नग्रानि/2023 दिनांक 8.5.2023 को सूचित करते हुए उक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, आयुक्त, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आदि को प्रेषित की गई है। उक्त ज्ञापन सदस्य, सचिव जिला नियमितिकरण प्राधिकारी एवं सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश धमतरी के हस्ताक्षर से जारी की गई है। उक्त पत्र में कहा गया है कि खसरा क्रमांक 411/88 का भाग रकबा 2681 वर्गफुट कालोनी/गली श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड पर आपके द्वारा किये गये अनाधिकृत विकास के नियमितिकरण के बारे में प्रस्तुत आवेदन नियमितिकरण अधिनियम 2002 (क.21 सन 2002) एवं (संशोधन) अधिनियम 2022 की धारा 7 के उपबंधों के अधीन नियमितिकरण की शर्तों के अनुसार नहीं है। लोकहित में नहीं होने के कारण उसे निरस्त किया जाता है। इसके बाद तोडऩे में आखिर देरी क्यों की जा रही है, यह जनचर्चा का विषय बना हुआ है।

                   सिहावा रोड मुख्य मार्ग से अंदर की ओर शांति कालोनी चौक के आगे स्थित भूमि को पृथक-पृथक पंजीकृत बिक्रीपत्र के जरिये सन्मुखदास बुधवानी, महेश चावला, राजेश वाधवानी, मनीष बुधवानी, मनीष अग्रवाल, आशीष पाटीदार, रौनक अग्रवाल, प्रदीप सेठिया ने इसकी शिकायत नगर पालिक निगम को करते हुए उक्त अवैध निर्माण को तोड़े जाने की मांग की है। शिकायत पत्र में निगम को उन्होंने बताया कि उनके द्वारा पृथक-पृथक रूप से भूमि खरीदी गई। आने-जाने के लिये 20 फुट चौड़ा एवं 70 फुट लंबा मार्ग दिया गया था। उपरोक्त 20*70 रकबा 1400 वर्गफुट जो खसरा नंबर 416/16 का नया नंबर 411/91 है, में से रास्ते के रूप में सुरक्षित रखने के लिये किशोर जसवानी एवं पांच अन्य व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत दिनांक 20.12.2018 को किया गया था। इसके अलावा खसरा नंबर 411/98 रकबा 20*40 वर्गफुट आवागमन रास्ते के लिये दिलीप सुंदरानी एवं एक अन्य के नाम पर पंजीकृत है। इस प्रकार अतिक्रमणकारी सुरेश कुमार वल्र्यानी द्वारा 20*110 वर्गफुट कुल 2200 वर्गफुट आम रास्ते को भी अतिक्रमित कर उसमें छज्जा निर्माण इत्यादि कर लिया गया है। यह भी बताया है कि उपरोक्त अतिक्रमणकारी द्वारा खसरा नंबर 411/88 रकबा 2681 वर्गफुट को क्रय किया गया है एवं उपरोक्त भूमि पर मकान निर्माण के नाम पर निगम से भूतल एवं प्रथम तल की अनुमति ली है किंतु उसके द्वारा भूतल 1125 वर्गफुट एवं प्रथम तल 1125 वर्गफुट में आवासीय निर्माण न करते हुए निगम के द्वारा दी गई अनुमति का घोर उल्लंघन किया गया। साथ ही उसके द्वारा 3100 वर्गफुट के भूतल एवं प्रथम तल दोनों का कुल रकबा 6200 वर्गफुट में भव्य व्यवसायिक काम्प्लेक्स का निर्माण करवा लिया गया है जिसमें व्यवसायिक काम्प्लेक्स के नियमानुसार पार्किंग स्थल नहीं है।

                   शिकायत पत्र में शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया है कि वर्तमान में बिना अनुज्ञा के द्वितीय तल में भी निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है जबकि नगर निगम द्वारा 27.6.2020, 5.8.2022 तथा 22.8.2022 को नोटिसें जारी कर सुरेश वल्र्यानी को निर्देशित किया गया था कि वह 25.8.2022 के भीतर अतिरिक्त निर्माण हटाते हुए एमओएस का पालन करे। लेकिन इसके बाद भी उनके द्वारा निगम की तीनों नोटिसों का पालन नहीं किया गया जो कि अनुज्ञा शर्तों एवं नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 307 एवं 308 का उल्लंघन है। इस भूमि का पटवारी द्वारा भी सीमांकन किया गया। उन्होंने भी अपने प्रतिवेदन में अवैध निर्माण की पुष्टि की है और इतने दिन गुजर जाने के बाद भी, जबकि उनके नियमितिकरण का आवेदन ग्राम नगर निवेश तथा निगम के द्वारा रद्द कर दिया गया है, इसके बाद भी उनके द्वारा स्वेच्छा से अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है और शिकायतकर्ताओं को देख लेने की धमकी दी जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि निगम के लोग मेरे उक्त व्यवसायिक काम्प्लेक्स को छूने की हिम्मत भी नहीं रखते। यह मामला चूंकि समूचे शहर में चर्चित है और लोगों ने कहा कि एक व्यक्ति नगर निगम के लिये चुनौति बना हुआ है जबकि यही मामला यदि किसी गरीब व्यक्ति का होता तो शायद नगर निगम का जेसीबी या तोडू दस्ता उक्त स्थल पर पहुंचकर बिना उसके सुनवाई किये उसके मकान को तोडऩे पर आमादा हो जाता। निगम अधिनियम एवं ग्राम तथा नगर निवेश के अधिनियम के अंतर्गत जब उक्त भाग को नियमितिकरण की पात्रता अतिक्रमण के कारण ही नहीं दी गई है तो ऐसे अतिक्रमण को हटाने में निगम को अब किसी भी प्रकार की रियायत नहीं करनी चाहिये ताकि अन्य अतिक्रमणकारियों को इससे सबक हासिल हो सके। अब देखना है कि निगम क्या कार्यवाही करता है? इस संबंध में निगम आयुक्त से संपर्क कर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया परंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया।


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