जिला पंचायत कार्यालय में अधिकारी, कर्मचारी मस्त-जनता पस्त

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन

धमतरी ,2 अप्रेल । जिले के अधिकारियों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा घोषित शनिवार, रविवार की लगातार छुट्टी मिलने से उनकी बल्ले-बल्ले है। लेकिन प्रदेश के मुखिया ने यह भी निर्देश दिया था कि प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी अपने कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम तक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से करें। लेकिन धमतरी जिला एक ऐसा अभागा जिला है जहां उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। कार्यालय तो सुबह समय पर खोल दिया जाता है, लेकिन अधिकारी, कर्मचारियों के कार्यालय आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। चपरासी द्वारा उनके आगमन के पूर्व एसी, कूलर, पंखे, लाईट चालू कर दिया जाता है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण 31 मार्च शुक्रवार को दोपहर लगभग सवा तीन बजे देखने को मिला जहां जिला पंचायत कार्यालय में अधिकांश अधिकारी, कर्मचारी अपने स्थान से नदारद थे। मात्र गिनती के लोग ही अपने सीट पर नजर आये। तुर्रा यह कि जिला पंचायत का सभागृह जहां एक भी व्यक्ति उपस्थित नहीं था, लेकिन सभागृह के सभी एसी, लाईट, पंखे चल रहे थे।  इसके अतिरिक्त अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा शासकीय वाहनों का भी उपयोग अपने सामान खरीदी के लिये किया जा  रहा है जिससे शासन को एक ओर बिजली बिलों का भारी भुगतान फिजूल में भरना पड़ रहा है वहीं निजी कामों के लिये शासकीय वाहनों का उपयोग भी डीजल, पेट्रेाल की बर्बादी का कारण बन रहा है। जिला पंचायत कार्यालय में इन दिनों अधिकारी, कर्मचारी पूरी तरह मदमस्त हैं, वहीं जनता अपने परेशानियों को लेकर पस्त है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा गत वर्ष तमाम अधिकारियों, कर्मचारियों को शनिवार, रविवार को छुट्टियों की सौगाम दे दी गई जिससे अधिकारी, कर्मचारी जो पहले प्रथम एवं अंतिम शनिवार को भी कार्य करते देखे जाते थे, उन्हें दोनों दिन की छुट्टी मिलने से कार्य में काफी आसानी हो रही है किंतु मुख्यमंत्री द्वारा ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों से अपील की गई थी कि वे अपने निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर अपने कर्तव्य का पालन करें। लेकिन इसका अक्षरश: पालन नहीं हो रहा है। अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय पहुंचें अथवा न पहुंचे, चपरासी द्वारा कूलर, पंखा, एसी चालू कर अपने अधिकारी की उपस्थिति का इंतजार करते देखे गये हैं। लेकिन कुछ अधिकारी 12 बजे पहुंचते हैं, कुछ तो पहुंचते ही नहीं और जो 12 बजे पहुंचने वाले अधिकारी हैं वे समय से पहले ऑफिस से गायब हो जाते हैं और एसी, पंखा, कुलर, लाईट निरंतर चलते रहता है। ऐसा भी नहीं है कि कार्यालय छोडऩे के पहले विद्युत उपकरणों को बंद कर दिया जाये ताकि भारी भरकम बिजली बिलों का भुगतान न करना पड़े। लेकिन किसी में इतनी हमदर्दी नहीं है कि ऐसा करने का साहस दिखायें और ऐसे ही कार्यालयों में उपरोक्त उपकरण घंटों चलते रहते हैं। जिला पंचायत में तो इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखा गया है।

    जिला पंचायत में जिस प्रकार अधिकारियों की अनुपस्थिति में एसी, पंखा, कूलर, लाईट चलाये जाने की प्रथा है वैसी ही प्रथा कुछ कार्यालयों में भी देखी गई है जिसे उपस्थित लोगों ने भर्राशाही बताते हुए ऐसे लापरवाह अधिकारी, कर्मचारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिये जाने की मांग के साथ ही ऐसे लोगों ने शनिवार, रविवार को शासकीय वाहनों के निजी उपयोग को लेकर भी खासी नाराजगी जाहिर की है। अनेक ऐसी शासकीय वाहनें हैं जिसमें अधिकारी नदारद रहते हैं और उनके परिवार के लोग शॉपिंग इत्यादि करते हैं। कुछ शासकीय वाहनें बाजारों के ईर्दगिर्द भी नजर आती हैं। लगातार बिजली के उपकरणों का दुरूपयोग किये जाने, शासकीय वाहनों का निजी उपयोग किये जाने से शासन को लाखों रूपये का बिजली बिल, डीजल खर्च का भार उठाना पड़ रहा है। ऐसे अधिकारी की मनमानी रूकनी चाहिये। 

हद तो यह है कि ऐसी सब समस्याओं को लेकर जिला स्तर के अधिकारी कभी भी ध्यान नहीं दिये जबकि उन्हें ऐसा नहीं करने की हिदायत दिया जाना चाहिये था। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिन अधिकारियों को जिले की जनता की समस्याओं को त्वरित निराकरण करने का जिम्मा दिया गया हैऐसे जिम्मेदार अधिकारी जब उनसे कतराने लगेंकिसी से बात नहीं करना चाहेंतब जिले का भगवान ही मालिक है। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि हम दूरदराज से अपने गांव की समस्या लेकर आये हैं और अधिकारी से मिलना चाह रहे हैंलेकिन उनके पास हमारी समस्या को सुनने का समय ही नहीं है। ऐसी हालत में जिले का विकास कहां तक संभव है।

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