संजय छाजेड़
23 जुलाई को श्री आदिश्वर जिनालय से निकलेगा भव्य मंगल प्रवेश, हजारों श्रद्धालु होंगे शामिल, आयंबिल तप करने का किया गया आह्वान
धमतरी। जैन समाज के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल चातुर्मास पर्व को लेकर धमतरी में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर में धर्म, साधना, तप और आराधना के इस महापर्व की शुरुआत 23 जुलाई 2026, गुरुवार को परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज सा. आदि ठाणा-4 के भव्य मंगल प्रवेश के साथ होगी। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में गुरु भगवंत की अगवानी करेंगे।
परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज सा. कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्य निपुणा श्री जी म.सा. की सुशिष्या तथा संघ स्नेह वारिधि, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी म.सा. की सुशिष्या हैं। उनके धमतरी आगमन को जैन समाज अत्यंत सौभाग्य का विषय मान रहा है। उनके सान्निध्य में पूरे चातुर्मास के दौरान प्रवचन, धर्मसभा, स्वाध्याय, तप, आराधना एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज के साथ-साथ आम नागरिक भी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
मंगल प्रवेश यात्रा प्रातः 8 बजे गोल बाजार स्थित श्री आदिश्वर जिनालय से प्रारंभ होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गुरु भगवंत का नगर में भव्य स्वागत किया जाएगा। आयोजन को लेकर समाज के विभिन्न प्रकोष्ठों एवं स्वयंसेवकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
इस अवसर पर जैन समाज द्वारा सभी श्रावक-श्राविकाओं से आयंबिल तप करने की भावना रखने का आग्रह किया गया है। आयंबिल की व्यवस्था श्री पार्श्वनाथ जिनालय, इतवारी बाजार में की गई है। साथ ही आयंबिल करने वाले सभी तपस्वियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना नाम पूर्व में श्री पार्श्वनाथ जिनालय कार्यालय में दर्ज करा दें, जिससे आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जा सकें।
चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र गोलछा ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज सा. का धमतरी आगमन पूरे समाज के लिए अत्यंत सौभाग्य और गौरव का विषय है। उनके पावन सान्निध्य में समाज के लोगों को धर्म, संस्कार और सदाचार का अमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले प्रवचन, स्वाध्याय, तप एवं विभिन्न धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को जैन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। समिति का प्रयास है कि यह चातुर्मास धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक एवं यादगार बने।
वीरेंद्र गोलछा ने धमतरी सहित आसपास के क्षेत्रों के सभी श्रावक-श्राविकाओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे 23 जुलाई को प्रातः आयोजित भव्य मंगल प्रवेश में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर गुरु भगवंत का स्वागत करें तथा धर्मलाभ प्राप्त करें। उन्होंने आयंबिल तप करने वाले श्रद्धालुओं से भी समय रहते अपना पंजीयन कराने का आग्रह किया।
