संजय छाजेड़
व्याख्यान वाचस्पति परम पूज्य जयानंद मुनि जी महाराज साहेब के सुशिष्य रत्न गणाधीश पन्यास प्रवर श्री विनय कुशल मुनि गणी जी, परम पूज्य नन्दीसेन मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री वीरभद्र मुनि गणी जी(विराग मुनि जी), परम पूज्य भव्य मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सोमभद्र मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सुहस्ति भद्र मुनि जी महाराज साहेब, शतावधानी बालमुनि हंसभद्र जी महाराज साहेब श्री पार्श्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार में विराजमान है।
आज प्रवचन माध्यम से परम पूज्य भव्य मुनि जी महाराज साहेब ने फरमाया कि आज हम संसार में सुख खोजने का प्रयास कर रहे है जबकि ज्ञानीजन संसार के त्याग में सुख देखते है। हम परिवार का ध्यान रखने की जिम्मेदारी स्वयं की मानते है और जिनशासन की जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देते है। कारण यह है कि परिवार को अपना मानते है प्राथमिकता देते है किंतु जिनशासन के प्रति अपनत्व नहीं दिखता। जिनशासन के प्रति प्राथमिकता दिखाई नहीं देती। हम संसार में एक अच्छी व्यवस्था स्वयं के लिए और अपने परिवार के लिए चाहते है। लेकिन आत्मा के अच्छी स्थिति के बारे में सोचते भी नहीं है। जीवन भर धन- धन करते हमारा निधन हो जाता है। और जीवन भर कमाया हुआ धन साथ नहीं जाता। वास्तविकता में आज हम जो भी करते है अपने नाम की प्रसिद्धि के लिए करते है जिनशासन के लिए नहीं करते। जबकि हमें अपने द्रव्य का सउपयोग साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका, जिनमंदिर आदि
सात क्षेत्रों में करना चाहिए। जिनशासन के प्रति हमारे जीवन में अहोभाव दिन प्रतिदिन कम होते जा रहा है। अगर हमारे जीवन में स्वयं के ऊपर या परिवार में किसी के ऊपर कोई कष्ट आये दुख आए तो उसे दूर करने के लिए हम तत्पर रहते है। जबकि जिनशासन पर कोई कष्ट आये तो हमारी तत्परता दिखाई ही नहीं देती। ज्ञानीजन हमेशा जिनशासन की प्रभावना के लिए तत्पर रहते है। श्रेणिक राजा 70 वर्ष की उम्र से धर्म से जुड़े और 92 साल की उम्र में उनका देहावसान हो गया। अर्थात केवल 22 वर्ष में इस प्रकार धर्म का पालन किया और जिनशासन की प्रभावना की। कि स्वयं परमात्मा महावीर अपने अंतिम देशना में उन्हें उत्कृष्ट श्रावक ( परम आरद) कहते है। हमें भी अपने जीवन में धर्म को प्रथम स्थान में रखना चाहिए। ज्ञानीजन कहते है धर्म कार्य में विलंब करना बहुत खतरनाक होता है। संसार में कोई भी सुख धर्म के बिना नहीं मिलता। हमें साधु जीवन कठिन दिखाई देता है। किंतु साधु जीवन धर्म से जुड़ने का और शाश्वत सुख प्राप्त करने का मार्ग है। शास्त्रकार भगवंत ने जीवन में आत्मा के विकास के लिए धर्म को समझाया था। किंतु हम स्वयं को छोड़कर सबकी चिंता करते है। विचार कीजिए हमारा क्या होगा। आने वाला भव कैसा होगा। धर्म को केवल पढ़ने वाला और किया जाने वाला क्रिया नहीं समझना चाहिए, बल्कि धर्म को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। चार प्रकार के धर्म होते है दान, शील, तप और भाव। इनमें से कोई भी धर्म करने के लिए जीवन वैराग्य गुण का होना आवश्यक है।
वैराग्य के कारण ही संसार के प्रति आसक्ति आती है साथ ही धर्म और संयम की ओर झुकाव होता है।
हम संसार के कार्यों में सुख खोजते है और जीवन भर संसार बढ़ाने वाले कार्य करते है। लेकिन ज्ञानीजन कहते है धर्म में सुख है लेकिन फिर भी धर्म करने का प्रयास भी नहीं करते। ये जो दुर्लभ मानव जीवन हमें मिला है, इसका पल पल हम यूं ही व्यर्थ करते जा रहे है। इस जीवन को हमे निरर्थक करने के स्थान पर सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
तपस्या निमित्त श्री जैन युवा मंडल द्वारा *त्रिदिवसीय कार्यक्रम* का आयोजन किया गया था। जिसमें दिनांक 22 मई को 1 घंटा का सामूहिक नवकार जाप का आयोजन किया गया था। जाप में लगभग 240 श्रावक श्राविका वर्ग उपस्थित रहे। इस एक घंटे के जाप में लगभग 31000 बार नवकार मंत्र का जाप सभी के द्वारा किया गया।
दिनांक 23 मई को सामूहिक सामयिक रखा गया था। प्रवचन के समय लगभग 250 की संख्या में श्रावक श्राविकाओं द्वारा सामूहिक सामयिक किया गया।
आज सामूहिक पूजा का आयोजन
आज दिनांक 24 मई दिन रविवार को सामूहिक पूजा रखा गया था। इस कार्यक्रम में श्री पार्श्वनाथ जिनालय में श्री रानूलाल जी विनय कुमार जी पारख के निवास स्थान से, श्री आदिश्वर जिनालय गोलबाजार में श्री मदनलाल जी मनोज कुमार जी पारख के निवास स्थान से एवं श्री अभिनंदन स्वामी जिनालय, शांति कॉलोनी में श्री धनपत जी मनीष जी बरडिया के निवास स्थान से गाजे बाजे के साथ बड़ी संख्या में श्रावक श्राविका पूजा करने जिनालय पहुंचे।
तीनों जिनमंदिर में मिलकर लगभग 300 की संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने सामूहिक पूजा का लाभ लिया।
उक्त सभी कार्यक्रम में लूणकरण गोलछा, पारसमल गोलछा, धनपत बरडिया, विनय पारख, लक्ष्मीलाल लूनिया, मदनलाल पारख, सुरेश बच्छावत, राहुल सेठिया, धनराज लूनिया, पिंटू डागा, मनीष बरडिया, पिंटू बरडिया, मानक लुनिया, शिशिर सेठिया, कुशल चोपड़ा, महावीर डागा, निशांत बोहरा, महावीर श्रीश्रीमाल, मयूर गोलछा, विजय दुग्गड़, संकेत बरडिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
