संजय छाजेड़
धमतरी। जिला अस्पताल में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। रिटायर्ड शिक्षक यादराम साहू और उनकी पत्नी, जो वर्तमान में शिक्षिका हैं, ने देहदान का संकल्प लेते हुए औपचारिक पंजीयन कराया। मूलत, सिवनीकला के निवासी यह दंपती इन दिनों रुद्री में रह रहा है। यादराम साहू ने बताया कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा जीवन जीते हुए हमेशा समाज के लिए कुछ सार्थक करने की इच्छा रही। करीब चार दशक तक शिशु मंडल में सेवाएं देने के दौरान ही उनके मन में यह विचार आया कि मृत्यु के बाद शरीर को नष्ट होने देने के बजाय उसे मेडिकल शिक्षा और जरूरतमंदों के काम में लगाया जाए। उन्होंने कहा कि लगभग 25 वर्षों से वे इस निर्णय को लेकर मन बना चुके थे और अब उसे अमल में लाया है। उनका मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए मानव शरीर का अध्ययन बेहद जरूरी होता है। देहदान से भावी डॉक्टरों को सीखने का अवसर मिलता है और कई मामलों में अंगदान से किसी की जिंदगी भी बचाई जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब शरीर अंततः मिट्टी में मिल जाना है, तो उससे पहले उसे समाज के काम में लगाना ही सही निर्णय है। श्रीमती दिनेश्वरी साहू ने कहा कि एक शिक्षक होने के नाते ज्ञान बांटना उनका कर्तव्य रहा है। उन्होंने महसूस किया कि मृत्यु के बाद भी शरीर किसी विद्यार्थी के अध्ययन या किसी जरूरतमंद के उपचार में काम आ सके तो यही सबसे बड़ी संतुष्टि होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने भी देहदान का संकल्प लिया और जिला अस्पताल पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।जिला अस्पताल में पंजीयन के दौरान चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी की गईं। दंपती की इस पहल को वहां मौजूद लोगों ने प्रेरणादायक बताया और उम्मीद जताई कि इससे अन्य लोग भी आगे आकर देहदान के लिए प्रेरित होंगे।
