जनपद पंचायत के अघोषित सीईओ की जिम्मेदारी निभा रहे दो संविदा कर्मी

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 

धमतरी । प्रदेश मुखिया विष्णुदेव साय, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने पूरी तरह कृत संकल्पित हैं। यहां तक जिला कलेक्टर अबिनाश मिश्रा भी इस पैटर्न  पर चल रहे हैं। लेकिन उनके अधिनस्थों का दुव्यर्वहार, आमजनों से काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। सूपा बोले तो बोले, छलनी भी बोलती है की तर्ज पर जनपद पंचायत के दो संविदा कर्मी अघोषित रूप से सीईओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन दोनों संविदा कर्मियों के बारे में बताया जाता है कि एक की नियुक्ति मूलत: एक ट्रेनर के रूप में हैं एवं दूसरे की नियुक्ति एक विभाग में है। लेकिन ये मूल काम से दूर रहकर सारे महत्वपूर्ण कार्य इनके द्वारा संपादित किया जा रहा है। वहीं इनमें से एक संविदा कर्मी के खिलाफ महिलाओं द्वारा गंभीर शिकायत भी शामिल है। और तो और महिलाओं को सम्मान देने की शासन की घोषणाओं को इनके द्वारा नजरअंदाज कर महिलाओं से न सिर्फ दुव्यर्वहार कर रहे हैं बल्कि उन्हें सताने के लिये उनके बैठने वाली कुर्सियों केंवाच पाउडर जैसे खुजलीनुमा पाउडर डालकर तमाशा देखा जाता है जिसकी शिकायत महिलाओं ने आज से एक वर्ष पूर्व जिला पंचायत सीईओ को दी। लेकिन महिला होते हुए भी महिलाओं की उक्त शिकायत पर अभी तक कार्यवाही नहीं की। वहीं ट्रेनर हेतु संविदा पद पर कार्यरत कर्मी का तो हाल इससे भी बुरा है। वह ट्रेनिंग को छोडक़र जनपद पंचायत के सभी मलाईदार विभागों की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है। बिना भेंट-पूजा, दोनों ही संविदा कर्मी किसी भी कार्य को करने के लिये तैयार नहीं होते। इनका दो-टूक शब्द रहता है कि हमें अधिकारी का आदेश है, और हम उसी के अनुसार कार्य करते हैं जिसकी पूरे जनपद पंचायत में चर्चा है।

भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार बहुत हद तक कम हुआ है। पूर्व के दोषी अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे हैं, आगे भी इसकी जांच जारी है। अभी हाल ही में मगरलोड विकासखंड अंतर्गत शिक्षाकर्मी फर्जीवाड़ा में तीन अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन अभी भी ऐसे अधिकारी, कर्मचारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। हालांकि कलेक्टर श्री मिश्रा द्वारा सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त तथा काम में किसी भी प्रकार कोताही और आने वाले लोगों से मधुर व्यवहार करने की हिदायत दी गई है। इसके बाद भी जनपद पंचायत धमतरी में संविदा कर्मी के रूप में पदस्थ एक प्रशिक्षक द्वारा अपने मूल कार्य को नजरअंदाज कर जितने भी मलाईदार विभाग हैं, उसकी जिम्मेदारी निभाई जा रही है जिससे अधिकारी और इस संविदाकर्मी की मिलीभगत का पता चलता है। इनमें से एक संविदा कर्मी तो अपने आप को कलेक्टर का खास बताकर लोगों से दुव्यर्वहार, अपनी आदतों में शुमार कर चुका है। शासन की महत्वपूर्ण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जवाबदारी जनपद पंचायत के माध्यम से संचालित होते आ रही है जिनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शासन की उन योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी जाती है और दूरदराज से आने वाले ग्राम पंचायतों के इन प्रतिनिधियों को उक्त कार्य सौंपा जाता है। लेकिन ऐसे लोग जब उक्त संविदा ट्रेनर के पास कार्य के पूछताछ के लिये जाते हैं तो उन्हें पहले तो घुमाया जाता है और बाद में अभद्र व्यवहार करते हुए उनसे गलत सलूक किया जाता है जिससे ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिनिधि उक्त संविदा कर्मी के पास जाने के लिये कतराने लगे हैं।

जनपद पंचायत में ही एक अन्य संविदा कर्मी की भी वहां तूती बोल रही है। इनके द्वारा ग्राम अछोटा की रीपा में कार्यरत महिलाओं से अभद्र व्यवहार करने की लिखित शिकायत जिला पंचायत सीईओ को 12 महिलाओं ने पूर्व वर्ष में दिया था। लेकिन हद तो गई कि एक महिला अधिकारी के होते हुए महिलाओं के साथ किये गये दुव्यर्वहार की अब तक जांच नहीं की गई जो सवालिया निशान खड़े करता है कि एक महिला अधिकारी के होते हुए उक्त रीपा सेंटर में कार्यरत महिलाओं की कुर्सियों में खुजली वाला पाउडर छिडक़कर उन्हें सताया, उनसे अभद्र व्यवहार किया। उनसे बिजली बिल का पैसा मांगा, इसके बाद भी जांच नहीं हो सकी। ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ प्रतिनिधियों ने बताया कि वहां सीईओ मात्र शो-पीस बनकर रह गये हैं और सारी महत्वपूर्ण जवाबदारी इन दोनों को सौंप दिये हैं और इनके माध्यम से सारे कार्य संपादित कराये जा रहे हैं। खबर तो यह भी है कि जब तक जरूरतमंद ग्रामीण इन दोनों संविदा कर्मियों से मुलाकात नहीं करते, कोई भी काम अधिकारी नहीं करते जिससे कलेक्टर के स्वच्छ प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है। कलेक्टर एक ओर जिले के ग्रामीणों को उनकी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के लिये एक दिन लगने वाले जनदर्शन को उन्होंने पूरे सप्ताह चलाये जाने की व्यवस्था की है जिससे दूरदराज से आने वाले लोगों को आसानी से उनकी मांग एवं अन्य कार्यों का समाधान होते आ रहा है जिसकी समूचे जिले में खासकर ग्रामीण क्षेत्र में खासी चर्चा है।

बताया गया है कि जितने भी जरूरतमंद महिला, पुरूष उक्त संविदा कर्मियों के समक्ष जाकर अपनी समस्याओं, मांगों को बताना चाहते हैं ओैर उस पर कार्यवाही की मांग करते हैं तो ये दोनों संविदा कर्मी उनकी बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर कर देते हैं और अपनी बात को उनके समक्ष रखकर उन्हें मजबूर करते हैं कि ये दोनों संविदा कर्मी जैसा कह रहे हैं, वैसा वे करें। इस बात को लेकर कुछ ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सीईओ से संपर्क किया तो उन्होंने भी उक्त दोनों संविदा कर्मियों के द्वारा निर्धारित किये गये बातों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होने की बात कही जिससे हम लोगों के समक्ष मायूसी छा गई और हम मजबूर होकर उनकी बातों को मानने के लिये बाध्य हो गये। इस तरह के कार्य होने से एक ओर छग शासन की स्वच्छ छवि को बिगाडऩे के लिये ये दोनों संविदा कर्मी पूरी तरह से जुट गये हैं जिन पर कलेक्टर धमतरी से विकासखंड के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने जांच कर उपरोक्त संविदा कर्मियों को वहां से अन्यत्र स्थानांतरित करने की गुहार लगाई हेै। उल्लेखनीय रहे कि राज्य शासन ने पिछले दिनों कुछ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के स्थानांतरण आदेश जारी किये थे जिसमें धमतरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का भी नाम उक्त सूची में शामिल है। शासन के स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट उल्लेख हेै कि 10 दिवस के भीतर इन्हें नवीन पदस्थापना स्थल पर जाकर पदभार ग्रहण करना  है परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी इनका मोह धमतरी से भंग नहीं हुआ। 

*इस परिप्रेक्ष्य में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव आईएएस के मोबाईल नंबर 7011152403 पर संपर्क किया गया, उनके मोबाईल में रिंग गया परंतु उन्होंने मोबाईल रिसीव नहीं किया, इसी वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।*

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