धमतरी। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हुए आरएसएस ने पथ संचलन किया। जहां से स्वयंसेवक गुजरे नगरवासियों ने फूलों की बौछार कर उनका स्वागत किया। अंत में गौशाला मैदान में मंचीय कार्यक्रम हुआ जहां मुख्य वक्ता ने युवाओं से भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 12 जनवरी को स्वामी
विवेकानंद के जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान दोपहर
1.30 बजे गौशाला मैदान से स्वयंसेवकों ने पथ संचलन शुरू किया। पथ संचलन शहर के मुख्य
मार्गों से होते गौशाला मैदान में पहुंचकर समाप्त हुआ। रामबाग में संघ के स्वयंसेवक
दिनेश पटवा, नगर प्रचार प्रमुख उमेश सिंह बशिष्ट, गुलाब चोपड़ा, शिवाजी साहू, योगेश
साहू,उत्कर्ष बरडिया, नागेश, महक पटवा तथा सदर बाजार में भाजपा के जिलाध्यक्ष शशि पवार,
बिथिका विश्वास,कविन्द्र जैन सहित अन्य भाजपाइयों ने संचलन में चल रहे स्वयंसेवकों
पर पुष्पवर्षा की। दोपहर 3 बजे मंचीय कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मुख्य वक्ता आरएसएस के
प्रांत व्यवस्था प्रमुख किशोर सिंह थे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार
आज भी उतने महत्वपूर्ण थे जितना उस समय में थे। आज षड्यंत्रकारी शक्तियां युवा शक्ति
को छिन्न.भिन्न करने का काम कर रही हैं। ये शक्तियां भारत को आगे बढ़ता और विश्वगुरू
बनता देखना नहीं चाहती है। युवाओं के मन में प्रांतवाद, क्षेत्रवाद, स्वार्थवाद भर
रहे हैं। भारत युवाओं का देश है, जहां पर युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। षड्यंत्रकारी
शक्तियां जानती हैं कि युवा पीढ़ी सबल हो जाएगी तो भारत सर्वशक्तिशाली होगा। वे ऐसा
होने देने नहीं चाहते हैं। इन षड्यंत्रकारी शक्तियों को मुंहतोड जबाब देते हुए हमें
देश और समाज के लिए काम करना है। केवल भारत देश के कल्याण के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता
के कल्याण के लिए भारत को विश्वगुरू बनकर सबका नेतृत्व करना होगा। इसके लिए देश को
खुदीराम बोस,चंद्रशेखर आजाद,भगत सिंह जैसे युवाओं की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में गणेश्वर प्रसाद निर्मलकर जिला
कार्यवाह, सुनील यदु सह जिला कार्यवाह, मनोज नेताम, कामता प्रसाद साहू बौद्धिक कार्यवाह,
वेदू प्रसाद साहू,राकेश साहू, निलेश राजा, मोहनलाल साहू, हरिवंश साहू, गौतम साहू, मनोज कश्यप आदि उपस्थित थे।
शिवाजी
से सीखें मैनेजमेंट
छत्रपति
शिवाजी महराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि शिवाजी ने मात्र 16
साल की उम्र में पहला किला जीता था। उनका मैनेजमेंट काफी तगडा था। कौन आदमी किस काम
आ सकता हैए किस व्यक्ति में कैसा गुण है, उससे कैसा काम लिया जा सकता है वे बखूबी जानते
थे। जब पूरा देश औरंगजेब के भय से कांप रहा था। लोग अपने को हिन्दू बोलने से डरते थे।
उस समय शिवाजी ने स्वराज का झंडा उठाया। अपने लोगों को संगठित किया और औरंगजेब को धूल
चटाई। हमारे युवा खुद की शक्ति को पहचानने लगेंगे तो वे देशए समाज के साथ खुद के लिए उपयोगी साबित होंगे।

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