वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार भारत लोकतंत्र से ग़ुलामी की ओर अग्रसर हो रहा है-कविता योगेश बाबर

धमतरिहा के गोठ
0


संजय जैन 

भारत एक लोकतांत्रिक प्रणाली पर कार्य करने वाला देश है जिसकी आबादी वर्तमान समय में 140-145 करोड़ के आस पास है कि जो कि विश्व की सबसे बड़ी लोकतंत्र व्यवस्था है जिसका संविधान बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने लिखी थी इसकी ख़ूबसूरती और सुंदरता की चर्चा पूरे विश्व में होती है लेकिन आज के वर्तमान समय में जब से  भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में बैठी है इस लोकतांत्रिक व्यवस्था और इसके संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है कि न्यायपालिका व्यवस्था लोकतंत्र और संविधान आज ख़तरे में दिखाई देता है भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के समय जिन चीज़ों का उल्लेख करते हुए सत्ता हासिल की थी उनकी कार्यप्रणाली को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि उन बातों का उनके कार्य कलापों में  कहीं भी उल्लेख आ रहा है महँगाई बेरोज़गारी भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया है और धर्म की राजनीति को आगे रखकर आज भाई को भाई से एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाकर अपनी राजनीतिक रोटी भारतीय जनता पार्टी की सरकार सेक रही है अभी हाल का उदाहरण मणिपुर राज्य है जहाँ पिछले चार महीने से सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं आगजनी लूटपाट बलात्कार की घटना बड़े पैमाने पर की जा रही है लेकिन हमारे प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों और मन की बात बताने में व्यस्त है वर्तमान में संसद में मॉनसून सत्र चल रहा है जहाँ विपक्ष के द्वारा मणिपुर के मुद्दे को लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया एवं विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री जी से तीन सवाल पूछे गए थे मणिपुर क्यों जल रहा है प्रधानमंत्री अभी तक मणिपुर क्यों नहीं गए मणिपुर की समस्या सुलझाने के लिए उनके द्वारा क्या प्रयास किया गया जिसके परिणाम स्वरूप संसद में प्रधानमंत्री का संबोधन गत दिनों हुआ उस 2 घंटे 20 मिनट के भाषण में उन्होंने सिर्फ़ विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए विपक्ष को भ्रष्टाचारी बताते हुए अपनी बात कही मणिपुर पर उन्होंने दो मिनट का भी समय अपने भाषण में ज़िक्र नहीं किया जो कि बहुत ही दुर्भाग्य जनक एवं देश के लिए अलोकतांत्रिक है आज प्रधानमंत्री मोदी संवेदनहीन हो गए हैं जिन्हें देश के एक राज्य की चिंता नहीं है वो व्यक्ति क्या  देश की चिंता करेगा उन्होने सिर्फ़ चिंता है हर राज्य में चुनाव जीतना अपनी सरकार बनाना और जिन राज्यों में उनकी सरकार नहीं है वहाँ के नेताओं को डराकर धमकाकर ED और CBI का डर दिखाकर भाजपा ज्वाइन कराना और उनके साथ मिलकर सरकार बनाना सिर्फ़ सरकार बनाने की प्रक्रिया में ही उनका मन और दिमाग़ लगा रहता है जनता को अपनी झूठी बातों के जाल में फंसाकर आज चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो उन सब पर उनके चहेते व्यापारिक संगठनों का क़ब्ज़ा हो गया है और देश की वास्तविक स्थिति जनता के सामने पेश नहीं की जा रही है जो की घोर निंदनीय है ऐसे में भारत की जनता को इन सब बातों को स्वयमेव समझने सोचने और निर्णय लेने की ज़रूरत है आज हमारा भारत का सबसे बड़ा लोकतंत्र वापस एक बार फिर तानाशाही व ग़ुलामी की ओर अग्रसर होने जा रहा है
 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)