संजय जैन
धमतरी । ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी तर्ज पर विद्युत व्यवस्था को बनाये रखने के लिये राज्य शासन के अधिकारियों द्वारा समय समय पर पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि क्रेडा से संबंधित समस्त कार्यों को संबंधित विभाग द्वारा ही कराया जाये। किसी अन्य विभाग से किसी भी हालत में कार्य न कराया जाये। लेकिन देखा जा रहा है कि धमतरी जिले में इस आदेश को धत्ता बताकर संबंधित अधिकारी द्वारा अपनी मनमर्जी चलाते हुए यह कार्य किसी अन्य से करवाया जा रहा है जबकि नियमानुसार क्रेडा को ही यह कार्य दिया जाना चाहिये था। सूत्रों ने बताया कि अधिकारी द्वारा उपरोक्त कार्यों को लेकर जब उनसे पूछा गया कि आप क्रेडा से कार्य क्यों नहीं करा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं किसी उच्चाधिकारी का आदेश नहीं मानता, मुझे जो करना है मैं करूंगा। बताया जाता है कि जनपद द्वारा अन्य विभागों को एजेंसी बनाकर करवाये गये लाखों रूपये के कार्यों में जमकर नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया है। अगर इन कार्यों की जांच कराई जाये तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम को बनाने एवं इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की व्यवस्था करने की शासन की महत्वपूर्ण योजना है। इसे लेकर जनपद पंचायत द्वारा अपने अधिनस्थ ग्राम पंचायतों में लगने वाले ऐसे पोल एवं अन्य कार्य को क्रेडा विभाग से न कराकर किसी अन्य से करवाया जा रहा है। ऐसे निर्माण कार्यों को करने वालों को क्रेडा से संबंधित कोई तजुर्बा नहीं है जिनके द्वारा पोल को स्थापित करने के लिये दूरी को दरकिनार कर पोल लगाया गया है जिसमें लगने वाले तार बीच-बीच से झूलते नजर आ रहे हैं। कहीं खंभे झुक गये हैं तो कहीं लाईटें नहीं जल रही हैं। यह सब तकनीकि जानकारी नहीं रखने के कारण सौर ऊर्जा निर्माण में यह सब कमियां देखी जा रही है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन करने के लिये सोलर सिस्टम से बिजली की व्यवस्था की जाये। इस हेतु क्रेडा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्र प्रेषित कर ऐसे कार्यों को इसी विभाग से कराये जाने का निर्देश दिया है। इसकी प्रतिलिपि अन्य विभागों को यहां तक कलेक्टर को भी प्रेषित की गई है किंतु पिछले लंबे समय से जनपद सीईओ द्वारा उक्त पत्र की अवहेलना करते हुए यह कार्य संपादित कराया जा रहा है जिसमें अनेक खामियां होने की जानकारी प्राप्त हुई है।
छग क्रेडा के पत्र क्रमांक 8015/क्रेडा आर आई-03/2020-21 दिनांक 9 अक्टूबर 2020 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी छग स्टेट क्रेडा के द्वारा पत्र प्रेषित कर विभागाध्यक्ष छग शासन, कलेक्टर सभी जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को प्रेषित करते हुए कहा गया था कि राज्य में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत आधारित योजनाओं का क्रियान्वयन छग राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण(क्रेडा) के माध्यम से कराया जाये। इस पत्र में भारत शासन के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अक्षय ऊर्जा आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु क्रेडा को राज्य नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया जिसकी प्रतिलिपि समस्त विभागों, निगम, मंडलों, अद्र्धशासकीय संस्थाओं एवं जिलाध्यक्ष को प्रेषित की गई है। इस पत्र में यह भी कहा गया है कि अक्षय ऊर्जा स्त्रोत आधारित योजनाओं के कार्य स्वयं निविदा आमंत्रित कर कराये जा रहे हैं जो कि शासन के आदेश का खुला उल्लंघन है। इस योजना के तहत करोड़ों रूपये आबंटित किये गये हैं जिससे धमतरी के लोहरसी एवं कुरूद के रामपुर को क्लस्टर बनाते हुए कुछ गांवों को चिन्हित कर वहां की जरूरतों के हिसाब से विकास कार्य करवायें परंतु देखा जा रहा है कि शासन के उक्त पत्र को जनपद सीईओ धत्ता बताते हुए उसका घोर उल्लंघन कर रहे हैं और उपरोक्त कथन कर अपनी तुगलकी नीति को दर्शा रहे हैं।
शासन के द्वारा प्रत्येक कार्यों के लिये विभिन्न विभागों को निर्माण एजेंसी बनाया जाता है। समय समय पर मिलने वाले निर्देशों का पालन किया जाता है ताकि योजनाओं की गुणवत्ता बरकरार रह सके किंतु जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों तथा राज्य शासन के उच्चाधिकारियों के पत्र का पालन नहीं किया जा रहा है और अपनी मनमानी की जा रही है। इसे लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी काफी नाराजगी देखी जा रही है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जो काम सौर ऊर्जा का करवाया जा रहा है उसमें लगे कर्मचारी को ऐसे कार्यों की जानकारी नहीं है और वे जो कार्य कर रहे हैं वो निर्धारित मापदंडों के विपरीत किये गये हैं जिसके कारण यह योजना चर्चा के दायरे में है। इन्होंने यह भी मांग की है कि जितने भी काम सौर ऊर्जा से संबंधित ग्रामों में हुए हैं उसकी उच्च स्तरीय जांच की जाती है तो अनेक गंभीर त्रुटियां नजर आयेंगी। इस मामले को लेकर जनपद पंचायत सीईओ से संपर्क करने की कोशिश की गई किंतु उन्होंने मोबाईल रिसीव नहीं किया जिससे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। कलेक्टर से ग्रामीणों ने इसकी जांच करवाने की मांग की है।


