धमतरिहा के गोठ के खबर का बड़ा असर - डी.एम.एफ. फंड का करोड़ों रुपया जिले में नियम विरुद्ध खर्च,प्रवर्तन निदेशालय(ई.डी.) ने लिया संज्ञान

धमतरिहा के गोठ
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धमतरी। डी एम एफ फण्ड को लेकर लगातार मिल रही शिकायत एवं इसमें हुए घोर भ्रष्टाचार को लेकर संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छग का पत्र क्रमांक/4698/स्था-01/नक्र/2022 नवा रायपुर अटल नगर दिनांक 21.07.2023 ने पत्र जारी कर बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय भारत सरकार/क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा ई.डी.अंडर सेक्शन 50 पीएमएलए-आरईजी के तहत बिंदुवार चाही गई है। चाही गई जानकारी के परिपालन में प्रदेश के विभिन्न कार्यालय सहित धमतरी जिले से भी जानकारी मांगी गई है जिससे डी.एम.एफ. फण्ड का उपयोग किये गये विभागों में खलखली मच गई है। डीएमएफ फण्ड से लगभग 20 करोड़ रूपये की राशि स्कूल निर्माण के नाम पर खर्च की गई है। उक्त राशि को खर्च करने में किसी भी तरह का नियम पालन नहीं किया गया है। ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाकर लगभग 15 करोड़ से अधिक की राशि जिले में खर्च की गई है। जिले के पूर्व अधिकारी ने तो डीएमएफ फण्ड का ऐसा बंदरबांट किया है कि जैसे यह राशि शासन की न होकर उनका यह निजी फण्ड है। डीएमएफ फण्ड के दुरूपयोग को लेकर धमतरिहा के गोठ में लगातार समाचार प्रसारित किया जाता रहा है। डी.एम.एफ. के अलावा सीएसआर फंड जिसका उपयोग सिर्फ विकास कार्यों के लिए किया जाना होता है उक्त फंड की लगभग 1 करोड़ की राशि को स्कूल डीस्मेंटल के नाम पर खर्च किये जाने को लेकर भी जाँच की मांग तेज हो गई है , जिले के जागरूक नागरिकों ने डी.एम.एफ सीएसआर फंड में हुए करोड़ों की राशि की उच्च स्तरीय जाँच की मांग व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है | 

संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छग के पत्र के अनुसार ईडी को धमतरी जिले में खर्च की गई डीएमएफ फण्ड की राशि के संबंध में जो जानकारी मांगी गई है उससे संबंधित विभागों में अभी से दहशत का वातावरण देखा जा रहा है। नगरी स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय को बनाने के नाम पर जहां 10 करोड़ रूपये खर्च किये गये हैं वहीं मगरलोड में भी बने उक्त स्कूल निर्माण के नाम पर लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाकर खर्च की गई है | यहीं नहीं नगरी के पुराने स्कूल भवन  को डीस्मेंटल के नाम पर 1 करोड़ रूपये खर्च करना अपने आप में भ्रष्टाचार को साबित करता है| स्कूल निर्माण करने वाले सम्बंधित ग्राम पंचायत के सचिव व सरपंच ने करोड़ों रुपये की राशि नगद आहरण की है जबकि पंचायती राज अधिनियम  में 5000 रूपये से अधिक की राशि का भुगतान चेक या आरटीजीएस से भुगतान का प्रावधान है  इससे भी यह बात स्पष्ट होती है  कि उक्त स्कूल निर्माण में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया है | बिना जीएसटी नंबर के फर्म, निलंबित जीएसटी नंबर के फर्म को भी लाखों रुपये की राशि का भुगतान भी उक्त स्कूल निर्माण में किया गया है जिसका खुलासा सुचना के अधिकार अधिनियम से प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट होता है | इस मामले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित सरपंचों, सचिवों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है। डीएमएफ फण्ड के दुरूपयोग को लेकर समय समय पर इसे प्रसारित किया गया था किंतु तत्कालीन कलेक्टर के दबाव के कारण  ऐसे अधिकारी जिन्होंने डीएमएफ फण्ड का खुलकर दुरूपयोग किया है, उनके द्वारा इसका विरोध नहीं किया गया। और तो और वहां कार्यरत एक ठेकेदार ने आरईएस उप अभियंता को यहां तक धमकी दिया कि आप ज्यादा कमियां निर्माण कार्यों में न निकालें अन्यथा मैं कलेक्टर का खास आदमी हूँ तुम्हारा  तत्काल तबादला कर दूंगा  जिसकी शिकायत भी सम्बंधित अधिकारी द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारीयों से की गई थी लेकिन इस पर भी कोई  कार्यवाही नहीं की गई | इस प्रकार स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के निर्माण में शुरू से ही भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है। अब जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने डी.एम.एफ. फंड के बारे में पूरी जानकारी मांगी है तो नागरिकों की उम्मीद जगी है की अब दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होगी | 

बताया जाता है कि भौमिकी तथा खनिकर्म छग के उपरोक्त पत्र की प्रतिलिपि डिप्टी डायरेक्टर प्रवर्तन निदेशालय भारत सरकार/क्षेत्रीय कार्यालय ए-1 ब्लॉक 2 रायपुर के अलावा संचालक भौमिक तथा खनिकर्म छग इंद्रावती भवन, विशेष सचिव छग शासन खनिकर्म विभाग कलेक्टर धमतरी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत धमतरी को भी दी गई है। इस मामले में संपूर्ण जानकारी प्रवर्तन निदेशालय ईडी के कार्यालय में अधिकारियों को प्रस्तुत करना होगा। जिन्होंने भी इस कार्य में लापरवाही बरती तत्काल एक्शन लिया जायेगा, ऐसा माना जा रहा है। धमतरिहा के गोठ द्वारा डीएमएफ फण्ड के दुरूपयोग को लेकर लगातार समाचार प्रसारण किया गया है। नगरी, सिहावा क्षेत्र के जागरूक नागरिकों के जानकारी दिये जाने पर समाचार प्रकाशन के बाद काफी प्रसन्नता देखी गई थी जिन्होनें यह कहते हुए कि डीएमएफ फण्ड का दुरूपयोग स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय निर्माण में किया गया है, उसे बिना भय के प्रसारित कर शासन का ध्यानाकर्षित करवाया। शायद इसी का असर है कि उक्त निर्माण में डीएमएफ फण्ड का दुरूपयोग किये जाने के साथ साथ छग के विभिन्न जिलों से भी इसकी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय द्वारा मांगी गई है। अब देखना यह है कि मांग अनुसार जानकारी कब भेजी जाती है। गौरतलब रहे कि इस मामले की जानकारी लेने जब इस प्रतिनिधि ने सूचना का अधिकारी अधिनियम 2005 के तहत आवेदन लगाया था तो संबंधित जनसूचना अधिकारी ने तत्कालीन कलेक्टर के दबाव में जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई थी तब इसकी दूसरी अपील आयोग में की गई थी और वहां जनसूचना अधिकारी पर 25 हजार रूपये का दंड आरोपित किया गया था।

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