संजय जैन
धमतरी 25 जुलाई। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा अपने अपने स्तर पर लोगों के बीच पहुंचने का क्रम जारी है किंतु कांग्रेस में जिस प्रकार चार चिन्हारियों का रवैया है, उससे कांग्रेसजनों में बेहद नाराजगी देखी जा रही है। इनका कहना है कि साढ़े चार साल से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी न तो हमारी पूछपरख हुई, न तो हमारे काम हुए। अब ऐसे नेताओं के नेतृत्व में काम सौंपा जाता है तो हम कतई नहीं करेंगे। ऐसी नाराजगी को लेकर ही पिछले दिनों भाजपा के पुरानी मंडी में आयोजित कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोगों ने कांग्रेस छोडक़र भाजपा की सदस्यता ग्रहण किया। इससे पूर्व भी तेज तर्रार महिला, पूर्व पार्षद नम्रता माला पवार, रेखा शांडिल्य जैसे कांग्रेस नेत्रियों ने इन्हीं चार चिन्हारियों के असभ्य व्यवहार को देखते हुए कांग्रेस छोडक़र भाजपा में प्रवेश किया था जिससे शायद राजधानी में बैठे नेताओं की नींद नहीं खुली। यही कारण है कि निष्ठावान कांग्रेसियों का पार्टी से लगातार मोह भंग हो रहा है।
कांग्रेस संगठन की बात करें तो संगठन के जिम्मेदार नेताओं ने कभी भी जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की पूछ परख नहीं की है। राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक नेतृत्व के आव्हान पर वर्ष में साल भर तक पुण्यतिथी, जयंती मनाये जाने के साथ साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे। लेकिन जबसे वर्तमान संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी की नियुक्ति हुई है, तबसे ऐसी बैठकें नाममात्र के बराबर हो रही हैं जिसका प्रमुख कारण यह है कि ये चार चिन्हारी जानते हैं कि हमें अपना समय काटना है और इनके प्रति कार्यकर्ताओं में कोई सम्मानजनक स्थिति नहीं हैं। इसी वजह से ऐसे कार्यक्रमों में जब आज का सत्तापक्ष, विपक्ष में था और पुण्यतिथी, जयंती आदि कार्यक्रमों में इनकी संख्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। विशालकाय राजीव भवन कार्यकर्ताओं के न रहने की वजह से वीरान सा लगने लगा है जिसकी चिंता इन पदाधिकारियों को नहीं है। सभी अपने अपने पद का लाभ उठा रहे हैं। कार्यकर्ताओं के इसी काम को लेकर इनके द्वारा कोई रूचि नहीं दिखाई जा रही है। उपेक्षित कांग्रेसी जब राजीव भवन पहुंचते हैं तो वहां पदाधिकारियों के द्वारा अधिकृत कर्मचारी ही उनको सलाह देकर उन्हें विदा कर देते हैं। निराशा लिये ऐसे कार्यकर्ता राजीव भवन से निकलकर संगठन के वर्तमान पदाधिकारियों को कोसते हुए निकलते हैं।
विधानसभा चुनाव को दो माह बाकी है और जो कार्यकाल पिछले समय से जब कांग्रेस सरकार ने सत्ता प्राप्त की थी, उस समय से लेकर अब तक पहले कांग्रेस भवन को तोड़वा दिया गया और बैठकें एक पदाधिकारी के रायपुर रोड स्थित मकानों में होती रहीं। जब राजीव भवन का निर्माण हुआ, उसका उद्घाटन हुआ तो उसके बाद भी लोगों का आना जाना कम हो गया। संगठन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों द्वारा सप्लाई, रेत में कमीशनबाजी, जैसे कार्यों में संलिप्त रहे हैं जिसे देखते हुए कांग्रेसजनों ने कहा कि जब ऐसे लोग अपने स्वार्थपूर्ति से फुर्सत पा जायेंगे, तब ये कार्यकर्ताओं की सुध लेंगे तो उस समय कार्यकर्ता भी इनको जवाब देगा। हद तो यह है कि कांग्रेस संगठन में राजधानी में बैठे अनेक लोग हैं। ऐसे नेताओं, यहां तक मंत्रियों को भी कार्यकर्ताओं की सुध लेने की फुर्सत नहीं है। पहले जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में कवासी लखमा थे, इन्हें हटाकर श्रीमति अनिता भेडिय़ा को जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया। लेकिन समीप के जिले की होने के बाद भी इन्होंने कभी भी कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ली। अब चूंकि चुनाव करीब है तो ऐसे कार्यकर्ता जो पार्टी को जिताने तन, मन, धन से कार्य करते हैं, वे लोग ही अपनी उपेक्ष को लेकर भारी आक्रोशित हैं। इनका कहना है कि नेताओं की लापरवाही से ही शनै:शनै: कर कांग्रेस के लोगों ने भारी तादाद में पार्टी छोडक़र भाजपा ग्रहण किया है। इससे जिले की कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट पता चलती है। जिला संगठन में पदस्थ कुछ पदाधिकारी के नक्शे कदम पर चलते हुए महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी उसी पैटर्न पर चल रही है जिससे महिलाओं का मोह भंग हो चुका है।
कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कांग्रेसजनों की स्वार्थपूर्ति में संलिप्तता की बात किसी से नहीं छुपी है जिसकी जानकारी इन्हें अच्छी तरह है। इनके रेत परिवहन, स्वार्थपूर्ति, सप्लाई जारी रहे, इसी वजह से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने पर संगठन में बैठे ये चार चिन्हारी उस अधिकारी से पूछने की जुर्रत भी नहीं करते कि आखिर आपने हमारे कार्यकर्ता के कार्य को क्यों नहीं किया जिससे भी कार्यकर्ता खफा हैं। इसी तरह महिला संगठन में भी अध्यक्ष की एकला चलो नीति के चलते अनेक कांग्रेसी महिला नेत्रियों का मोह भंग हो चुका है। पहले नम्रता माला पवार, रेखा शांडिल्य के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने पर भारी संख्या में इनके सहयोगी भाजपा समर्थित हो गये हैं। यदि यही हाल कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों का रहा तो आगामी चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी के प्रति समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं ने राजधानी में बैठे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अनुरोध किया है कि यदि चुनाव में जीत हासिल करना है तो संगठन में त्वरित गति से बदलाव किया जाना चाहिये। अब देखना है कि संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं की बात को गंभीरता से लेता है अथवा नहीं।

