वनभूमि पर अवैध रिसॉर्ट का निर्माण धड़ल्ले से जारी मामला-रविशंकर सागर परियोजना गंगरेल का

धमतरिहा के गोठ
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धमतरी 22 जुलाई। प्रदेश के सबसे बड़े पिकनिक स्पॉट गंगरेल में अघोषित रूप से अपराध को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां गार्डन आबंटन में जमकर मनमानी हुई है। अब अन्य मामलों में भी अधिकारियों की अनदेखी भारी पड़ रही है। गंगरेल बांध क्षेत्र प्रदेश भर के सैलानियों के लिये आकर्षण का केंद्र रहा है जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। डेम क्षेत्र में घूमने फिरने के अलावा यहां बोटिंग करने के लिये लोग पहुंचते हैं। पर्यटन विकास के नाम पर जल संसाधन विभाग मनमानी करते आ रहा है। यहां गार्डन की नीलामी तो नहीं की गई, मनमाने तरीके से इसे व्यक्ति विशेष को दे दिया गया। कुछ दिनों पहले यहां रिसॉर्ट को बियर बार के लिये गुपचुप तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दी गई और वर्तमान में भी एक ग्रामीण द्वारा पांच कमरों का सुसज्जित रेस्टोरेंट निर्माण धड़ल्ले से जारी है। कार्यवाही के संबंध में पूछने पर जल संसाधन विभाग चुप्पी साधे बैठा है। इसका तर्क है कि यह भूमि वन विभाग क्षेत्र की है जहां अवैधानिक रूप से रिसॉर्टनुमा होटल निर्माण किया जा रहा है। वन भूमि पर अवैध रिसॉर्ट निर्माण पर विभाग भी कुंभकरणी नींद में सोया हुआ है। कुछ लोगों ने प्रतिनिधि को यह भी बताया कि हम लोगों ने इसकी मौखिक शिकायत वन मंडलाधिकारी मयंक पांडे से करते हुए इस निर्माण पर रोक लगाये जाने की मांग की गई थी लेकिन उनके द्वारा भी इस पर संज्ञान नहीं लिया गया है जिससे प्रतीत होता है कि विभाग का संरक्षण इस नियम विरूद्ध रिसॉर्ट निर्माण करने वाले व्यक्ति को प्राप्त है।

मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि रविशंकर सागर परियोजना गंगरेल कंट्रोल रूम के समीप एक ग्रामीण व्यक्ति द्वारा जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी से मिलकर उपरोक्त रिसॉर्टनुमा होटल का निर्माण बिना अनुमति के करवाया जा रहा है। एक ओर बियर बार शुरू होने से यहां शराबियों का जमावड़ा लगेगा और अपराध तेजी से पैर पसारेगा। इसे लेकर ग्रामवासी आपत्ति पहले से ही जाहिर कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग इसे गंभीरता से नहीं लिया। लोग शांतिपूर्ण वातावरण चाहते हैं और इसके लिये कई बार जल संसाधन विभाग को शिकायत पत्र भी दे चुके हैं। आलम यह है कि क्षेत्र में पहुंचने वाले सैलानियों के साथ अक्सर दुव्यर्वहार की शिकायतें आ रही हैं। अति विश्वसनीय सूत्रों ने यह भी जानकारी दिया कि गंगरेल बांध में निर्माण कार्य चलाया जा रहा है जिसमें पिछले दिनों जेसीबी पलट गई और इसमें एक मजदूर को गंभीर चोटें आई हैं जिसे चुपचाप बिना पुलिस को सूचना दिये उसे बिहार भेज दिया गया। घायल व्यक्ति बिहार का मूल निवासी था। इसी तरह सैलानियों से मारपीट, दुव्यर्वहार के वीडियो वायरल हो रहे हैं, इसके बाद भी विभाग खामोशी अख्तियार किये हुए हैं।

पिछले कुछ महीनों में गंगरेल भ्रमण पर पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या में भी कमी हुई है जिसका मुख्य कारण शराबखोरी, मारपीट, दुव्यर्वहार को माना जा रहा है। अनाधिकृत रूप से इस क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। बांध देखने के इच्छुक लोगों द्वारा जब गेट खुलवाने की कोशिश की जाती है तो उससे मारपीट कर उसे भगा दिया जाता है। महिलाओं के सामने दुव्यर्वहार किया जाता है और अपने चहेतों को गेट खोलकर उन्हें बांध तक वाहन के साथ जाने की छूट दे दी जाती है। बांध क्षेत्र में पहुंचने वाले सैलानियों से गार्डन में अवैध वसूली की शिकायत भी कई बार प्राप्त हुई है। यहां यह बताना जरूरी है कि गंगरेल बांध का ठेका कोरोना काल के पूर्व से एक व्यक्ति विशेष को जल संसाधन विभाग द्वारा दिया गया है जो आज पर्यंत तक नये सिरे से इसकी नीलामी आज दिनांक तक नहीं की गई है। हद तो यह है कि 15 हजार रूपये महीना विभाग को देने वाले ठेकेदार ने वहां एक सिकमी किरायेदार को रखकर 30 हजार रूपये प्रतिमाह उससे लेकर शासन को नुकसान पहुंचाने का हथकंडा अपनाया है। गंगरेल क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य, अवैधानिक कार्य, मारपीट, सैलानियों से अभद्र व्यवहार एवं गार्डन ठेका को एक व्यक्ति विशेष को दे दिया गया है। इन सभी तथ्यों को लेकर गंगरेलवासी बेहद परेशान हैं और उन्होंने जिले के प्रमुख अधिकारियों से मांग की है कि वे ऐसी घटनाओं से क्षेत्रवासियों को सुरक्षित करायें अन्यथा किसी भी गंभीर दुर्घटना घट सकती है। इस पूरे मामले को लेकर डीएफओ मयंक पांडे से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिया गया जिसमें उन्होंने बताया कि मेरे पास अब तक इस मामले को लेकर शिकायत नहीं पहुंची है। आपके माध्यम से मुझे यह जानकारी मिली है। वनभूमि क्षेत्र होने पर जांच करवाकर त्वरित कार्यवाही की जायेगी।उन्होंने यह भी बताया की उक्त वनभूमि वर्तमान में  सिचाई विभाग के अधिपत्य में है उनके द्वारा यह बोला जाना की यह भूमि वनभूमि है ,गलत है हमको अभी तक उक्त भूमि वापस नहीं की गई है जबकि हम इस सम्बन्ध में विभाग से लगातार पत्राचार कर रहे हैं |अगर हमारे कब्जे वाली भूमि में हुआ तो विभाग तत्काल कार्यवाही करेगा |

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