कांग्रेस के चार चिन्हारी बने पार्टी के लिये घातक,जिले में कांग्रेस का गिर रहा लगातार विकेट

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 


धमतरी 14 जून। आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होना है। इसे लेकर सत्तापक्ष, विपक्ष सहित विभिन्न पार्टियों के नेताओं द्वारा अपनी अपनी जमीन तलाश की जा रही है। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। सम्मेलन, बैठकों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन इस ऊहापोह में सत्तापक्ष के संगठन को उस वक्त झटका लगा जब जिला एवं ब्लॉक स्तर के दो बड़े पदाधिकारियों ने अपने साथियों सहित पिछले दिनों पुरानी कृषि उपज मंडी में आये भाजपा नेता के समक्ष कांग्रेस छोडक़र भाजपा में प्रवेश किया। इससे पूर्व भी कांग्रेस की दिग्गज नेत्रियों, पूर्व पार्षदों ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा प्रवेश किया। भाजपा प्रवेश के पूर्व इन महिला नेत्रियों ने संगठन के चार चिन्हारियों पर गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उक्त निर्णय लिया जाना बताया जिससे कांग्रेस के अंदर बेचैनी का माहौल देखा जा रहा है। 

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का भाजपा प्रवेश नि:संदेह एक बहुत बड़ा निर्णय है। किसी ने भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि कांग्रेस के ये सक्रिय लोग भाजपा में प्रवेश कर सकते हैं। अब चूंकि उनका भाजपा प्रवेश हो चुका है और सत्ता, संगठन के लोग इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जबसे संगठन में फेरबदल हुआ है, तबसे लेकर अब तक जिनके ऊपर कांग्रेस को तीन सीट दिलाये जाने की जिम्मेदारी है और बकौल उन नेताओं के जिन्होंने एक सभा में चैलेंज के साथ कहा है कि हम आगामी विधानसभा चुनाव में तीनों विधानसभा सीटें जीतेंगे, ये बड़े बोल इनके लिये आज गले की हड्डी बन रहे हैं जिसके लिये ये कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। इनके द्वारा कांग्रेस के जितने भी सक्रिय जमीनी कार्यकर्ता हैं, उनकी पूछपरख बिल्कुल नहीं की जा रही है। कोई रेत, कोई स्टेशनरी, पेंट इत्यादि की सप्लाई में लीन है, कुछ ठेकेदारी कर रहे हैं। लेकिन बैठकों में जब सत्तापक्ष जो पांच वर्ष पूर्व विपक्ष में था, उस समय की बैठक और आज की बैठक में कोई अंतर नहीं देखा गया है। यहां तक संगठन में जिन लोगों को पद से नवाजा गया है या पार्षद हैं, वे लोग भी बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं। एक सहारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की पुण्यतिथी, जयंती का था, जिसके तहत कांग्रेस कार्यकर्ता सब एकजुट होकर कांग्रेस भवन पहुंचते थे। लेकिन आज भी सत्तापक्ष में होने के बाद भी इनकी उपस्थिति उतनी ही देखी जाती है।

प्रदेश में नई सरकार के बनने के बाद संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी कभी जिला स्तर के ऐसे निरंकुश पदाधिकारियों के कार्यशैली को लेकर उसमें सुधार लाने का निर्देश नहीं दिया। और तो और जब भी जिले के प्रभारी मंत्री धमतरी आते हैं तो इन्हीं चार चिन्हारियों के यहां रूकते हैं। वे राजीव भवन पहुंचकर कभी भी कार्यकर्ताओं की सुध नहीं लिये, न ही उनमें कोई जोश भरा। संगठन की होने वाली बैठक कब होती है, किस कारण होती है, इसकी भी जानकारी कार्यकर्ताओं को नहीं मिल पाती। इनका कहना है कि व्हाट्सअप के माध्यम से सभी को जानकारी उपलब्ध हो जाती है। इसे लेकर कार्यकर्ताओं ने बड़े अफसोस के साथ उनके इस तर्क का खंडन करते हुए कहा कि सभी के पास मोबाईल की व्यवस्था नहीं है, तो कहां से बैठक का पता चलेगा? स्वयं उच्च पद पर बैठे संगठन के लोग यह नहीं चाहते कि जमीनी कार्यकर्ता उनके साथ रहें। इसी वजह से आज कांग्रेस की दुर्दशा जो हो रही है, उसके लिये संगठन के कुछ लोग ही जिम्मेदार हैं। इनकी अगर कार्यशैली नहीं बदली तो नि:संदेह एक नेता का यह दावा कि वह तीनों सीटों पर कांग्रेस का परचम लहरायेंगे, झूठा साबित हो सकता है और भाजपा जो आज बैठकों के ऊपर बैठक ले रही है, और प्रधानमंत्री का कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचा रही है। इसी वजह से कांग्रेस के उपरोक्त नेताओं ने अपने साथियों के साथ भाजपा प्रवेश किया है जो कांग्रेस के लिये आगामी नवंबर-दिसंबर में होने वाले चुनावों के लिये काफी संकट पेैदा कर सकता है।



धमतरी जिले में साढ़े चार साल का कार्यकाल प्रदेश के मुख्यमंत्री का बहुत अच्छा गुजरा। उन्होंने जहां भी भेंट मुलाकात कार्यक्रम रखा वहां करोड़ों रूपये के विकास कार्यों की घोषणा की। लेकिन मंच में आगे-पीछे रहने वाले स्थानीय संगठन के लोग और अखबारों में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने को सक्रिय बताने वाले ऐसे नेताओं की कार्यशैली यदि शीघ्र ही प्रदेश के पदाधिकारी नहीं बदलने निर्देशित करेंगे तो आने वाले समय में कांग्रेस को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यहां यह बताना जरूरी है कि पूर्व में जब ब्लॉक अध्यक्ष रही पूर्व पार्षद नम्रता माला पवार एवं रेखा शांडिल्य ने भाजपा प्रवेश किया था तो उस समय उपरोक्त कारणों को मीडिया के समक्ष कहते हुए अफसोस जाहिर किया कि इन्होंने संगठन के उक्त लोगों के व्यवहार की शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी की थी। लेकिन उन्होंने भी इस पर ध्यान नहीं दिया जिससे हम हतोत्साहित होकर भाजपा प्रवेश किये हैं। अब देखना है कि प्रदेश के संगठन में बैठे लोग कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच में उपजी असंतोष की भावना को किस तरह कंट्रोल करते हैं




 

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