संजय जैन
धमतरी । डीएमएफ फंड का किस प्रकार दुरूपयोग धमतरी जिले में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा किया गया है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल नगरी से दिया जा सकता है जहां नियम विरूद्ध एक तो ग्राम पंचायतों से करोड़ों का कार्य करवाया गया वहीं दूसरी ओर 57 निर्माण कार्यों से उक्त कार्य को पूर्ण करवाया गया है जिसके लिये पृथक-पृथक फंड विभिन्न ग्राम पंचायतों को आबंटित किया गया है जिसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुई हेै। हद तो यह है कि जब तक तत्कालीन कलेक्टर धमतरी में पदस्थ रहे, सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में हीला-हवाला किया जाता रहा। उनके स्थानांतरण के बाद यह जानकारी दी गई जिसमें उपरोक्त डीएमएफ फंड के आय-व्यय का विवरण भी शामिल है। उक्त स्कूल भवन का निर्माण अति प्राचीन श्रृंगि ऋषि स्कूल को तोडक़र बनाया गया है जबकि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के निर्माण के लिये इसके आसपास भी रिक्त भूमि उपलब्ध थी। करोड़ों के लागत से बने इस स्कूल निर्माण करने में जमकर नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई है वहीँ पूर्व कलेक्टर ने भी नया इतिहास रचते हुए अजब कारनामा कर दिखाया गया है एक स्कूल को बनाने 4 ग्राम पंचायतों को नियम विरुद्ध निर्माण एन्जेसी बनाते हुए 57 अलग- अलग भागों में बांटकर उक्त स्कूल का निर्माण करवाया गया है , जो जन चर्चा का विषय बना हुआ है |
सूचना के अधिकार के तहत जानकारी में यह बताया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर ने डीएमएफ फंड के माध्यम से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निर्माण कार्य किसी राज्य स्तरीय एजेंसी से न करवाकर ग्राम पंचायतों से करवाया जिसकी लागत पूर्व में 4 करोड़ बताई गई, फिर यह खर्चा 6 करोड़ हुआ, उसके बाद अब यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि उक्त स्कूल की लागत लगभग 10 करोड़ रूपये की हुई है। इन कार्यों को ग्राम पंचायत घठुला, रतावा, हरदीभाठा, पोड़ागांव से करवाया गया है जिसमें कार्य का नाम एक्टीविटी कक्ष का निर्माण, पेवरब्लॉक का निर्माण भाग-1, पेवर ब्लॉक निर्माण भाग-2, अहाता निर्माण कार्य, ग्रील कार्य, सायकल स्टेंड निर्माण, परिसर में विद्युतिकरण कार्य, अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य क्रमांक 34 एवं 35(द्वितीय तल), विद्यु्रतिकरण कार्य द्वितीय तल नगरी, गार्ड रूम एवं लेब एल्युमीनियम सेक्शन निर्माण कार्य नगरी, मेथमेटिक्स लेब निर्माण 05, बायस टायलेट निर्माण क्रमांक 06, सभी कार्य घठुला ग्राम पंचायत के तहत किया गया है जिसमें लगभग 40 लाख रूपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह अतिरिक्त कक्ष निर्माण क्रमांक 24 एवं 25 प्रथम तल, 26, 27 प्रथम तल, 28, 29 प्रथम तल, नाली निर्माण कार्य, विद्युतिकरण, पैनल एवं केबल कार्य, विद्यालय परिसर में समतलीकरण कार्य, मुरूम फिलिंग इत्यादि, पोर्च निर्माण कार्य, अतिरिक्त कक्ष 6 निर्माण कार्य, अतिरिक्त कक्ष 5 निर्माण कार्य, 32 एवं 33 द्वितीय तल अतिरिक्त कक्ष निर्माण, केमेस्ट्री लेब निर्माण क्रमांक 3, फिजिक्स लेब निर्माण क्रमांक 4 ये सभी कार्य ग्राम पंचायत रतावा के द्वारा करवाया गया है जिसकी लागत लाखों रूपये बताई गई है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत नगरी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दी गई जानकारी में यह भी बताया गया है कि डीएमएफ फंड से स्टाफ कक्ष, प्राचार्य कक्ष, स्टेज निर्माण, लायबे्ररी, विद्यालय परिसर में समतलीकरण, स्टेनलेस स्टील क्यारी एवं विविध निर्माण, स्टेयर केस मे टावर निर्माण, किचन एवं डायनिंग जीर्णोद्धार एवं विविध कार्य, कम्प्यूटर लेब, बॉयोलॉजी लेब निर्माण, तथा अतिरिक्त कक्ष निर्माण 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 37 भी शामिल है। उपरोक्त कार्य ग्राम पंचायत हरदीभाठा के द्वारा करवाया गया है जिसमें भी लाखोुं रूपये खर्च किया गया है। जबकि ग्राम पंचायत पोडागांव द्वारा भी उपरोक्त सभी कार्य लाखों रूपये की लागत से करवाया गया है जिससे पता चलता है कि इन 57 कार्यों में डीएमएफ फंड का किस प्रकार दुरूपयोग किया गया है जबकि निर्माण एजेंसी इसे अकेले चरणबद्ध तरीके से कार्य को पूरा कर सकती थी। जागरूक लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ का यह प्रथम कार्य है जो करोड़ों रूपये की लागत से ग्राम पंचायतों द्वारा संयुक्त रूप से करवाया गया है जिसके पीछे तत्कालीन कलेक्टर के एक रिश्तेदार की महती भूमिका बताई जाती है। आवेदक द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी भी समय पर तत्कालीन अधिकारी के निर्देश पर उपलब्ध नहीं कराई गई जिसे लेकर काफी मशक्कत की गई और अंतत: उक्त अधिकारी के तबादला पश्चात यह जानकारी दी गई जिससे स्पष्ट है कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल निर्माण में तत्कालीन कलेक्टर ने किस प्रकार डीएमएफ फंड का दुरूपयोग किया है जिसे लेकर क्षेत्रवासियों ने इसकी जांच की मांग की थी। लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
उल्लेखनीय रहे कि शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को 5000 रूपये तक नगद राशि आहरण किये जाने का आदेश है लेकिन सम्बंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिवों द्वारा लाखों रुपये की राशि नकद आहरण किया गया है बताया तो यह भी जाता है की सम्बंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिवों को यह भी नहीं मालूम की उनके द्वारा कौन कौन से निर्माण कार्य करवाए गए हैं सिर्फ कागजों में ही उन्हें एंजेसी बनाकर पूर्व कलेक्टर के एक मुह लगे ठेकेदार के द्वारा ठेके से करोड़ों की लागत से उक्त स्कूल का निर्माण कार्य करते हुए जमकर भ्रष्टाचार होने की खबर है| चूँकि इस परिप्रेक्ष्य में आरइएस विभाग के उप अभियंता शैलेश साहू द्वारा अपने उच्च अधिकारी को कार्यरत ठेकेदार के द्वारा लिखित में शिकायत दी गई थी कि " मैं कलेक्टर का आदमी हूँ , मैं जैसा कहता हूँ वैसा करो नहीं तो तुम्हारा तबादला करवा दूंगा " | यह शिकायत पत्र मीडिया की सुर्ख़ियों में भी चर्चित रहा है |


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