संजय जैन
धमतरी | आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अधिकारी मस्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इन्होंने अब सरकार की छवि धूमिल करने के लिये कमर कस ली है, इसी वजह से अनेक ऐसे कार्यालय हैं जहां फरियादी चक्कर लगाकर अपनी समस्याओं को अवगत कराये बिना ही वापस हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राजस्व कार्यालय में नामांतरण बंटवारा जैसे राजस्व प्रकरण में भारी रिश्वतखोरी की जा रही है। राजस्व कार्यालय में इन दिनों दलालों का बोलबाला साफ तौर पर देखा जा सकता है। ऐसे लोग दिन भर कार्यालय के आसपास मंडराते नजर आते हैं। यहां तक कि कार्यालय समय समाप्ति के बाद देर रात तक अधिकारियों के साथ बैठे हुए नजर आते हैं। पहले तो पीडि़तों को कोई शिकवा-शिकायत नहीं थी किंतु अब प्रत्येक मामले को लेकर जो दर बढ़ाई गई है उससे लोगों को उतना रिश्वत देने में बहुत ही परेशानी उठानी पड़ रही है। जो यहां पैसा फेंकेगा, उसका काम होगा, इस तर्ज पर कार्य हो रहा है। लेनदेन कार्यालय में न होकर किसी तीसरे व्यक्ति को अधिकृत कर दिया गया है जो ऐसे सारे भुगतान को लेकर रात्रिकालीन उनके घरे में संग्रहित राशि को पहुंचाता है।
पिछले चार वर्षों से ऐसी प्रक्रिया नहीं चली थी। हालांकि नाममात्र के लिये कार्य निपटाने के लिये राशि ली जाती रही है परंतु इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसे कुछ अधिकारी जो राजस्व कार्यालय में पदस्थ हैं, उनके द्वारा अपने चेले-चपाटों के माध्यम से नामांतरण, बंटवारा, रिकॉर्ड सुधार आदि के नाम पर मुंहमांगी रकम मांगी जाती है। जो व्यक्ति उनकी मांगों को पूरा करेगा, उन्हीं का काम प्राथमिकता से किया जायेगा और जो लोग पैसा देने में आनाकानी करते हैं अथवा नहीं देते, उनकी फाईल लंबित कर दी जाती है। कुछ लोगों ने इस प्रतिनिधि से चर्चा के दौरान बताया कि इस कार्यालय में बेलगाम कार्य हो रहा है। नामांतरण जैसे प्रकरण में सभी दस्तावेज पूर्ण होने के बाद भी उन्हें जान बूझकर घुमाया जाता है और उसमें कुछ न कुछ त्रुटि निकालकर उसे लंबित रखा जाता है। इसी सिलसिले में आज से तीन वर्ष पूर्व रामकुमार नामक व्यक्ति द्वारा पूर्व में पदस्थ हल्का पटवारी 36 द्वारा 50 हजार रूपये की मांग की गई थी जिसकी शिकायत पीडि़त ने रायपुर संभाग के आयुक्त को की थी जिसे लेकर आयुक्त ने शिकायत कलेक्टर कार्यालय को जांच हेतु प्रेषित की थी। कलेक्टर कार्यालय से उचित कार्यवाही हेतु डिप्टी कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में जांच हेतु भेजा गया था परंतु पूर्व अधिकारियों के स्थानांतरण पश्चात यह जांच अभी तक नहीं हो पाई है।
मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि डिप्टी कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी को वर्ष 2020 में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था। लेकिन तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी द्वारा इस जांच को जान बूझकर नहीं किया गया जिससे यह प्रकरण अभी तक लंबित है। वर्तमान में अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा यह बताया गया कि यह मामला मेरे समय का नहीं है फिर भी मैं इस मामले में जो फाईल चली है, उसका अध्ययन कर सारी जानकारी संबंधित कार्यालय को प्रेषित करवाऊंगा। यह तो एक मामला हो गया। लेकिन ऐसे अनेक मामले शहर धमतरी में चर्चित हैं जिसका मुख्य कारण जिला स्तर के अधिकारी द्वारा कभी भी ऐसे शिकायतों को संज्ञान में नहीं लिया गया। जिन पर जिले में होने वाली शिकायतों की जांच का जिम्मा है, वे लोग खुद ही अपने कर्तव्य के प्रति उदासीन नजर आते हैं। पिछले महीने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मगरलोड क्षेत्र में पहुंचे थे, तो उन्हें भी तहसीलदार के खिलाफ वहां के लोगों ने शिकायत की जिस पर मुख्यमंत्री ने उक्त तहसीलदार को वहां से तुरंत हटा दिया। राजस्व प्रकरण के निपटारे को लेकर जिस प्रकार लेनदेन चल रहा है, उसे लेकर फरियादी बेहद परेशान हैं। इनका कहना है कि यहां पदस्थ अधिकारी पक्षकारों की कोई सुध नहीं ले रहे हैं और जो व्यक्ति यहां भेंट पूजा चढ़ायेगा, उसी का काम समय पर हो जायेगा। ऐसी शिकायतों को लेकर जिला स्तर के अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर कार्यवाही की जानी चाहिये।
राज्य शासन द्वारा राजस्व मामले जल्द से जल्द निपटाने का निर्देश जारी किया गया है। राजधानी स्थित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी ऐसा प्रयास किया जा रहा है। स्वयं मुख्य सचिव भी अधिनस्थों को राजस्व प्रकरण के तत्काल निराकरण एवं पक्षकारों के साथ उचित व्यवहार कर उनकी समस्याओं का निराकरण करने का निर्देश दिया है किंतु निचले स्तर के राजस्व कार्यालयों में जिस प्रकार भारी लेनदेन चल रहा है, उसे लेकर जिला स्तर के अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिये ताकि सरकार की छवि जो खराब हो रही है, उसे सुधारा जा सके। अनेक ऐसे लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे कार्यालयों में एजेंटनुमा व्यक्ति सक्रिय हैं जो काम कराने के लिये पक्षकारों से संपर्क करते रहते हैं और जो व्यक्ति पैसा देता है, उसका काम वे तत्काल करवा देते हैं और जो लेनदेन किया जाता है, उसका भुगतान रात्रि में संबंधित कार्यालय के अधिकारी के पास पहुंचा दिया जाता है। हद तो यह है कि अधिकारी, सीधे पीडि़तों से बात न कर दलालों से ही बात करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि नागरिकों में राजस्व कार्यालय के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। समय रहते ऐसे अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यह प्रक्रिया पिछले समय से तेजी से फल-फूल रही है जिस पर लगाम लगाना अति आवश्यक है ताकि लोगों के काम आसानी से हो सके। कुछ लोगों ने इस मामले को लेकर राजस्व मंत्री को भी शिकायत प्रेषित की है। अब देखना है कि उक्त शिकायत पर राजस्व मंत्री क्या कार्यवाही करने का निर्देश देते हैं?

