भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण खाद की भारी संकट – तारिणी चंद्राकर

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 
प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही प्रदेश भर में रासायनिक खाद (यूरिया और डीएपी) की भारी किल्लत को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कहा कि साय सरकार की 'गलत खाद नीति' और कुप्रबंधन ने 'धन्हा धमतरी कहे जाने वाले जिले के किसानों को संकट में डाल दिया है। जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई खाद वितरण नीति पूरी तरह से किसान विरोधी है। नई व्यवस्था में खाद का कोटा कम कर दिया गया है और टोकन की अनिवार्यता लागू कर दी गई है, जिससे प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों में किसानों को घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेताओं ने भी स्पष्ट किया है कि जो खाद किसानों को अप्रैल-मई की शुरुआत में मिल जाया करती थीवह मई का आधा महीना बीतने के बाद भी समितियों से नदारद है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए कहा कि सरकारी सोसायटियों में सन्नाटा पसरा हुआ है. खाद की उपलब्धता जरूरत के हिसाब से लगभग शून्य है, जबकि निजी दुकानों में वही खाद ऊंचे और मनमाने दामों पर बेची जा रही है। बिचौलियों और कालाबाजारियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण वे खुलेआम किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान न केवल खाद संकट बल्कि राज्य में गहराए ईंधन (डीजल-पेट्रोल) के संकट से भी दो-चार हो रहे हैं। ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों के लिए डीजल न मिलने से खेतों की तैयारी ठप पड़ गई है। सरकार द्वारा ईंधन की सीमा (लिमिट) तय करने से ग्रामीण क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल है। हमारी मांग हैं की किसानों को परेशानी में डालने वाली नई खाद नीति और टोकन व्यवस्था को तत्काल निरस्त कर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए, खरीफ सीजन की मांग के अनुरूप सभी प्राथमिक सहकारी समितियों में डीएपी और यूरिया का पर्याप्त भंडारण युद्ध स्तर पर सुनिश्चित किया जाए, निजी विक्रेताओं द्वारा की जा रही खाद की कालाबाजारी और ओवर-रेटिंग पर तुरंत कानूनी कार्रवाई हो, कृषि कार्य के लिए किसानों को बिना किसी सीमा (लिमिट) के प्राथमिकता के आधार पर डीजल उपलब्ध कराया जाए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सोसायटियों में पर्याप्त खाद की आपूर्ति शुरू नहीं की गई और खाद नीति में सुधार नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर पूरे ब्लॉक और जिला स्तर पर चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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