भाजपा की महिला नेत्री दे रही अधिकारियों को धमकी...

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड

धमतरी।  छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की समीक्षा बैठक दिल्ली में रखी गई है जिसमें हार को लेकर चर्चाएं होंगी। अब जो भी रिजल्ट इस बैठक में निकलेगा, वह एक दिल को तसल्ली देने वाला है जबकि हकीकत यह है कि कांग्रेसी शासनकाल में मंत्री अमरजीत भगत ने व्हाट्सअप ग्रुपों में यह कहकर कि सभी अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग अलाप रहे थे, इसी वजह से कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है, बहुत मायने रखता है। इधर भाजपा की अप्रत्याशित जीत को लेकर प्रदेश में जबरदस्त खुशी का माहौल देखा जा रहा है। लेकिन अति उत्साह में भाजपा कार्यकर्ताओं को अपनी मर्यादा में रहकर कार्य करने की हिदायत दी जानी चाहिये क्योंकि जिले में अभी भी एक महिला जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा कार्य किया जा रहा है जिसके चलते अधिकारियों, नागरिकों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।

          पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा ऐसा कोई भी वर्ग नहीं है, जिसके उत्थानार्थ हेतु उन्होंने कदम नहीं उठाया हो। लेकिन तीसरे कार्यकाल के अंतिम समय में नागरिकों को मिलने वाला मोबाईल सेट को जिस प्रकार कार्यकर्ताओं ने दबाया और उसका वितरण किया जाना बताया, उसी का परिणाम था कि डॉ रमन सिंह जैसे सशक्त पूर्व मुख्यमंत्री को हार का मुंह देखना पड़ा। कुछ इसी प्रकार कांग्रेस शासनकाल में भी हुआ जिसके चलते बकौल अमरजीत भगत के सभी लोग अपने कार्यों में व्यस्त थे, किसी ने भी इस पर गौर नहीं किया। और तो और स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों की लंबित मांगों पर ध्यान नहीं दिया। जितने भी अनियमित कर्मचारी थे, उनको नियमित नहीं किया। स्वास्थ्य विभाग के लंबित मांगों को पूरा नहीं किया। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नेताओं के साथ साथ मंत्री भी संबंधित जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं की सुध नहीं लिये। समस्याओं को भी उन्होंने जैसा उनके कार्यकर्ता कहते आये, बस उसी पर ध्यान दिया। इसी का परिणाम है कि कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में भारी हार का सामना करना पड़ा। अब चूंकि प्रदेश में नई सरकार बनने वाली है, कौन इसका सिरमौर होगा, यह तो समय बतायेगा, परंतु जितने भी कार्यकर्ता हैं, उन्हें अनुशासन में रहकर कार्य करने की हिदायत दी जानी चाहिये।

          जिले में एक पूर्व निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि ने अपने कार्यकाल में एकला चलो की नीति अख्तियार की थी। यही नहीं इन्होंने अधिकारी, कर्मचारियों को भी मान सम्मान देकर बातचीत नहीं की जिसे लेकर भी धमतरी विस क्षेत्र में इनके प्रति खासी नाराजगी देखी जा रही थी। अभी भी उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है जिससे भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। पिछले दिनों उन्होंने जिस प्रकार अपनी कार्यशैली से लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है, उसे लेकर अभी से उनके प्रति नाराजगी देखी जा रही है जिसका सीधा-सीधा असर भाजपा की कार्यशैली पर उठने की संभावना व्यक्त की जा रही है। प्रदेश में भाजपा की सरकार में कौन किसका खेवैया होगा, कौन-कौन मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, यह तो भविष्य के गर्त में छुपा हुआ है परंतु जिस प्रकार प्रदेश की जनता ने भाजपा पर भरोसा करते हुए भारी बहुमत से उनके प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सहयोग किया है, उनकी आशाएं हैं कि भाजपा की सरकार बनने के बाद कार्यकर्ताओं में जो अति उत्साह के चलते जो अमर्यादित व्यवहार किया जा रहा है, उस पर विराम लगना अति आवश्यक समझा जा रहा है। पांच साल में कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए कुछ इसी प्रकार  वातावरण निर्मित किया था जिसके चलते उसे हार का मुंह देखना पड़ा है। अब देखना है कि भाजपा की सरकार नई संभावनाओं को लेकर प्रदेश में व्याप्त लापरवाही, भ्रष्टाचार जैसे अन्य मुद्दों पर क्या निर्णय लेती है और इसका किस तरह निराकरण करती है।

          गौरतलब रहे कि भाजपा की एक पूर्व महिला जनप्रतिनिधि जो कि अपने कार्यकाल के दौरान रेत माफियाओं, भूमाफियाओं से जुडक़र कार्य करने को लेकर काफी चर्चा में रही है, इन पर समय समय पर कई गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन हार के बाद भी इनका अडिय़ल रवैया कम नहीं हुआ है। बल्कि ये अभी से अधिकारी, कर्मचारियों को धमकी देकर अपने पक्ष में काम करने का दबाव भी बना रही हैं। कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उक्त पूर्व महिला जनप्रतिनिधि अधिकारी, कर्मचारियों को यह बोलने से भी गुरेज नहीं कर रही है कि पार्टी के बड़े नेताओं से मेरे मधुर संबंध हैं, और मुझे इस बात से आश्वस्त भी कर दिया है कि धमतरी जिले में सिर्फ मेरा ही चलेगा और मेरी मर्जी के अनुसार ही आपको काम करना होगा। इसी को लेकर चौक चौराहों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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