धमतरी । भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ नगर पालिक निगम के पार्षदों द्वारा निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अनेकों बार शिकायतें दर्ज कराई गई, आंदोलन किये गये परंतु पूर्ववर्ती सरकार के सत्ता में रहने की वजह से इन पर कोई आंच नहीं आई। निविदाओं में मनमर्जी कर उसे खोले जाने, सप्लाई कार्य में धांधली किये जाने, यहां तक आपदा को अवसर के रूप में इस्तेमाल करते हुए कोरोना काल के दौरान मास्क और सेनेटाईजर में धांधली की गई। इसे लेकर पार्षदों ने आक्रामक रूप अख्तियार किया था। लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और भाजपा ने अपनी शानदार वापसी की है, तब भाजपा के पार्षदों ने राहत की सांस ली और अब इनके द्वारा महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने को लेकर पूर्व केबिनेट मंत्री, जिले के दबंग नेता अजय चंद्राकर सहित वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने की व्यापक तैयारियां की जा रही है।
प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री रहे कांग्रेस के नेताओं ने हालांकि हार का ठीकरा अपने वरिष्ठों पर फोड़ा है। बृहस्पत सिंह ने तो ऐसे-ऐसे आरोप लगाये हैं जिससे कांग्रेस में खलबली मच गई है। इन्हीं के साथ साथ अनेक ऐसे पूर्व विधायकों ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं के रवैये पर मनमर्जी चलाये जाने का आरोप लगाते हुए यहां तक कहा है कि राष्ट्रीय स्तर के एक नेता ने टिकिट आबंटन के सिलसिले में भारी राशि की मांग की है। और तो और अब कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इस्तीफा देने का भी सिलसिला जारी रखा है जिसमें दिलीप षड़ंगी प्रमुख हैं। इसके पूर्व भी कांग्रेसी सत्ता के रहते हुए राष्ट्रीय स्तर के जांच एजेंसियों ने विभिन्न ठिकानों पर छापा मारा और नये-नये रहस्योद्घाटन किये। धमतरी में भी ऐसे अनेक भ्रष्टाचार मीडिया की सुर्खियां बने। नगर निगम क्षेत्र में भी व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किये जाने को लेकर विपक्ष के भाजपा पार्षदों द्वारा इसकी शिकायत की गई। पूर्व कलेक्टर को भी इसकी शिकायत दी गई थी। लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते पूर्व कलेक्टर ने भी भाजपा पार्षदों के द्वारा की गई शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। ऐसी शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले पूर्व कलेक्टर को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें जब यहां से स्थानांतरण किया गया तो उन्हें कृषि विभाग का महा प्रबंधक बनाया और चंद दिनों बाद उन्हें एक जिले का कलेक्टर बना दिया गया। इस तरह भाजपा के पार्षदों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया गया।
भाजपा पार्षदों ने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार, नादिरशाही को लेकर काफी हो-हल्ला किया था। धरने में भी बैठे थे। यहां तक निगम के कर्मचारियों को वेतन तक के पैसे समय पर नहीं दिये गये। ऐसी अनेक शिकायतें इनके द्वारा की गई थी। लेकिन सत्ता के नशे में चूर संबंधित पदाधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई, न ही उनके कार्यशैली में कोई बदलाव आया जिससे खिन्न होकर भाजपा के पार्षदों द्वारा पूर्व कलेक्टर को शिकायत की गई थी। अब चंूकि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और भाजपा की सरकार आगामी दिनों में बनने जा रही है। इसे लेकर भाजपा के पार्षदों द्वारा महापौर के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। इसी सिलसिले में भाजपा पार्षदों ने पिछले दिनों प्रदेश के कद्दावर नेता, पूर्व केबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय चंद्राकर से मुलाकात कर अविश्वास प्रस्ताव की जानकारी दी। इससे पहले भी दिल्ली दौरे से लौटे प्रदेश महामंत्री जगदीश रामू रोहरा से भी भाजपा पार्षदों ने मुलाकात की थी। हालांकि श्री रोहरा ने कहा कि ये एक औपचारिक मुलाकात थी। लेकिन शहर में चर्चा के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव को लेकर ही भाजपा पार्षदों द्वारा उनसे भेंट करना बताया गया। पार्षदों के द्वारा जिस प्रकार अविश्वास प्रस्ताव लाने हेतु तैयारियां की जा रही हैं और भाजपा के नेताओं से संपर्क किया जा रहा है, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि अतिशीघ्र महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आवश्यंभावी है। यहां यह बताना जरूरी है कि निगम में निविदाओं में बिलो दर पर स्वीकृति कर शासन को भारी नुकसान पहुंचाये जाने की बात भाजपा पार्षदों द्वारा कही गई वहीं सप्लाई में भी धांधली कर आम नागरिकों का पैसा व्यय किया गया जिसकी शिकायत कलेक्टर कार्यालय में भाजपा के पार्षदों ने की है। अब देखना है कि भाजपा पार्षद अविश्वास प्रस्ताव कब लाते हैं।
पूर्व मंत्री भाजपा के तेज तर्रार नेता अजय चंद्राकर से निगम पार्षदों की मुलाकात के बाद सूत्रों का कहना है कि निगम महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये हरी झंडी दे दी गई है। असंतुष्ट कांग्रेस पार्षदों से भी भाजपा नेता लगातार संपर्क बनाये हुए हैं। इनका मानना है कि निगम महापौर की हठधर्मिता एवं एकला चलो नीति से त्रस्त कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षद कभी भी पाला बदलने के लिये तैयार बैठे हैं। बहुत जल्द रणनीति बनाकर महापौर को कुर्सी से हटाने का काम पूरा कर लिया जायेगा जिसके लिये बैठकों का दौर भी प्रारंभ हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय रहे कि निगम के सामान्य सभा की बैठक में भी कांग्रेस के कुछ पार्षद अनुपस्थित रहे थे। इस संबंध में निगम में नेता प्रतिपक्ष नरेंद्र रोहरा से दूरभाष पर चर्चा किये जाने पर उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर महापौर को इस्तीफा दे देना चाहिये, क्योंकि शहर के 40 वार्डों में से 37 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा है। यदि इस्तीफा नहीं देते हैं तो अविश्वास प्रस्ताव लाया जायेगा।

