संजय जैन
धमतरी । प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान करोड़ों रूपये के निर्माण कार्यों को स्वीकृति देते हुए उसके लिये फण्ड की घोषणा की गई है जिससे समूचे क्षेत्र में हर्ष का वातावरण निर्मित हुआ है किंतु धमतरी जिले में पदस्थ कुछ अधिकारियों की लापरवाही के चलते अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने वाले लोगों को वेतन नहीं मिलने की शिकायत लगातार मिल रही है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ योजना कार्यालय में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों को पिछले दो माह मई, जून का वेतन अब तक प्राप्त नहीं हो सका है जिससे उनमें एवं उनके परिजनों में निराशा एवं चिंता व्याप्त है। वे लगातार अपने अधिकारी से गुहार लगाकर वेतन की मांग कर रहे हैं और अधिकारी हैं कि वे किसी की मांग अथवा शिकायतों के निराकरण के लिये न किसी का फोन उठाती, न ही कार्यालय में अपनी उपस्थिति देती हैं, जिसके कारण विभाग से जुड़े अनेक ऐसे मुद्दे उलझे हुए हैं। पीएमजेएसवाय में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता के रवैये से इनमें आक्रोश पनप रहा है।
शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा इसकी समीक्षा करने एवं क्षेत्र के विकास के लिये लाखों, करोड़ों रूपये की राशि स्वीकृत की जाकर क्षेत्र के निर्माण कार्यों की जानकारी ली गई। जिले के दौरे में इनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर वहां के निवासियों से चर्चा की और शिकायतों को गंभीरता के साथ निराकरण करने की हिदायत दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक अधिकारी, जनता की भावनाओं, समस्याओं को लेकर सामंजस्य स्थापित करते हुए द्रुतगति से उनकी समस्याओं का निदान करे। लेकिन प्रधानमंत्री सडक़ कार्यालय में पदस्थ प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता के अडिय़ल रवैये से जिन स्थानों पर सडक़ निर्माण कार्य हो रहा है, जिसमें भारी भ्रष्टाचार किये जाने की शिकायत को लेकर ग्रामीणजन अधिकारी को फोन लगाये तो उन्होंने उनका फोन नहीं उठाया। जब शिकायतकर्ता रूद्री स्थित कार्यालय पहुंचे तो वहां भी उनके दर्शन नहीं हुए। वहां उपस्थित कुछ कर्मचारियों ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और वे बिना शिकायत किये ही वापस आ गये। इसी तरह पिछले कुछ माह में निर्मित डोंगरडुला से बटनहर्रा तक की करोड़ों रूपये की लागत से सडक़ का निर्माण प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना के तहत ठेकेदार द्वारा बनाया गया था जो आज निर्माण के चंद महीने बाद ही उसकी गिट्टी सडक़ के ऊपर अलग-थलग पड़ी नजर आ रही है। इसकी भी शिकायत को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया।
ग्राम दरगहन के ग्रामीणों ने पिछले दिनों ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सडक़ निर्माण में की जा रही धांधली को लेकर प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की परंतु उनका मोबाईल रेंज से बाहर बताया। इसलिये उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाही अब तक नहीं हो सकी है। फलस्वरूप निर्माण कार्य में की जा रही धांधली के चलते सडक़ बीच-बीच से फट गई है और दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रही है। यही हाल प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के अंतर्गत जितने भी निर्माण कार्य जिले में हो रहे हैं उसमें ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों से सांठगांठ कर निर्धारित मापदंड के विपरीत जाकर कार्य किया जा रहा है। करोड़ों रूपये के लागत से निर्मित होने वाली सडक़ें अल्पावधि में ही जर्जर और जगह-जगह से फटती नजर आ रही हैं। तुर्रा यह कि एक ओर प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता द्वारा ग्रामीणों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है और ठेकेदारों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया जा रहा है। सूत्रों से पता चला है कि प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता द्वारा यह कहा जा रहा है कि मैं प्रभार में हूं, मुझे जो करना है वह मैं करूंगी... और इस तरह वे अपनी स्वार्थपूर्ति में लीन हैं। कार्यालय में नहीं बैठने के कारण यहां कार्यरत कर्मचारियों को मई, जून दो माह की वेतन भी नसीब नहीं हुई है जिससे इन कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। पता तो यह भी चला है कि पूर्व में यह प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग में पदस्थ थीं जहां इनकी ऐसी ही कार्यशैली से उन्हें निलंबित किया जा चुका है और वह प्रकरण के बाद इनको अनुविभागीय अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया था जहां से ये प्रतिनियुक्ति पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना कार्यालय रूद्री में पदस्थ हैं। अब देखना है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारियों को वेतन कब उपलब्ध कराते हैं? उपरोक्त मामले को लेकर प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता से दूरभाष पर प्रतिनिधि द्वारा एक बार पुन: संपर्क कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया परंतु हमेशा की तरह उन्होंने मोबाईल रिसीव नहीं किया गया जिसकी वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।


