संजय जैन
धमतरी |सर्वोच्च न्यायालय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की व्यवस्था को दरकिनार करते हुए चैन माउंटेन, जेसीबी से रेत का अवैध उत्खनन लगातार धड़ल्ले से जारी है। लगातार मीडिया की सुर्खियों में यह समाचार प्रकाशित होते आया है जिसमें बताया जाता है कि सडक़ों की दुर्दशा के जिम्मेदार ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली ओव्हरलोड हाईवा के चलने से नित्य प्रतिदिन दुर्घटनाएं होते रहती हैं किंतु बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि इस पर संज्ञान नहीं लिये जाने के कारण पिछले दिनों एक शिक्षक को हाईवा ने अपनी चपेट में ले लिया जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। यह पहली घटना नहीं है, इससे पूर्व भी कोलियारी, खरेंगा, दोनर, जोरातराई जर्जर मार्ग में अनेक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हद तो यह है कि शासन, प्रशासन की नाक के नीचे चलने वाले इस अवैध रेत परिवहन के लिये किसी ने ठोस कार्यवाही नहीं की जिसके फलस्वरूप आज हाईवा के रूप में मौत दौड़ती नजर आती है जिसे देखते हुए लोगों का कहना है कि आखिर रेत से भरी हाईवा से मौतों का सिलसिला कब रूकेगा?
महानदी की रेत महीन है
जिसकी मांग विभिन्न जिलों के साथ साथ महाराष्ट्र जैसे प्रांत में भी बहुत है। इस रेत
को भरने जब महाराष्ट्र पासिंग हाईवा सडक़ों पर दौड़ती है और इसी के साथ साथ विभिन्न
जिलों से आई वाहनें महानदी की तटों पर बसे गांवों की ओर कूच करती हैं तो उसे देखकर
उस क्षेत्र के निवासी भयभीत होकर रास्ता छोड़ देते हैं। लेकिन इसके बाद भी अनजान लोग
जो दुर्घटनाओं से बेखबर रहते हैं, वे अपने गंतव्य को जाते रहते हैं जिन्हें तेजी से
चलने वाली ऐसी वाहनें अपनी चपेट में ले लेती हैं। कोलियारी, खरेंगा, दोनर क्षेत्र की
जर्जर सडक़ें जिले में प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में शाम होने से पहले लोग अपने अपने
गांवों को घरों में लौट जाते हैं। उसके बाद हाईवा का तांडव इस क्षेत्र में शुरू हो
जाता है। ऊबड़-खाबड़ सडक़ों में बारिश के पानी और गड्ढों से ऐसी वाहनें संबंधित खदानों
में पहुंच जाती है। फिर वहां पहुंचकर सिलसिला चलता है जेसीबी से रेत उत्खनन का। इसके
लिये जिम्मेदार पूरी हद तक खनिज विभाग है जिसकी लापरवाही के चलते रेत का अवैध परिवहन
एवं जेसीबी का चलन निरंतर हो रहा है। उच्चतम न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा
दिये गये दिशा निर्देशों के तहत जेसीबी और चैन माउंटेन का खदानों में चलना नियम विरूद्ध
है। ऐसा माना जाता है कि इससे प्रदूषण फैलता है और यही कारण है कि उपरोक्त आदेश जनहित
की दृष्टि से जारी किये गये हैं।
राज्य शासन को नियम से चलने वाली खदानों से करोड़ों रूपये की राजस्व प्राप्त होती है। लेकिन लंबे समय से देखा जा रहा है कि सत्तापक्ष, विपक्ष के लोग इस कार्य में अंदर तक डूबे हुए हैं और वह नियम से चलने वाली रेत खदानों के अलावा जहां चाहे वहां खदान प्रारंभ कर महानदी से रेत चोरी करते एवं करवाते आ रहे हैं। हालांकि राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत खदान को बंद करने का निर्देश दिया गया है किंतु जिला प्रशासन के इस आदेश का पालन खनिज विभाग नहीं करवा रहा है। अलबत्ता दिखावे के लिये डंप किये हुए रेत का परिवहन करने की बात कहकर रात्रिकालीन जेसीबी महानदी में उतरकर पहुंचने वाली सैकड़ों हाईवा वाहनों पर रेत भरती नजर आती हैं। ग्रामीणजनों द्वारा लगातार इसकी शिकायत खनिज विभाग को दिये जाने के बाद भी वह मूकदर्शक की भांति तमाशा देखते आ रहा है जिससे पता चलता है कि रेत माफियाओं और खनिज विभाग से इनकी मिलीभगत है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यहां बैठे एक क्लर्क द्वारा यह भी कहते सुना गया है कि हमारा सभी अधिकारियों से सेटिँग है, इसलिये जितना मीडिया में समाचार प्रकाशित हो, हमारा कोई बाल बांका नहीं कर सकता। पूर्व में भी यहां पदस्थ एक क्लर्क द्वारा ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई थी जिसकी शिकायत मिलने पर तत्कालीन कलेक्टर रजत बंसल द्वारा उक्त क्लर्क को हटाकर वर्तमान क्लर्क की नियुक्ति की गई थी। लेकिन इनका भी व्यवहार पूर्व क्लर्क से बदतर नजर आ रहा है।
रेत उत्खनन कार्य में लगे माफियाओं द्वारा दिन और रात धड़ल्ले से रेत का कारोबार किया जाता रहा है जिसे लेकर आज के सत्तापक्ष से जुड़े लोग धरना प्रदर्शन करते हुए नहर नाका चौक बैठा करते थे। उस वक्त पूर्ववर्ती शासन के लोगों द्वारा धड़ल्ले से अवैध परिवहन किया जाता था। लेकिन आज सरकार बदल गई, कल तक जो धरना प्रदर्शन करने वाले आज के सत्तापक्ष के लोग हैं, वे इस कार्य में संलिप्त हैं। यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि सत्तापक्ष, विपक्ष के लोगों द्वारा अवैध रेत परिवहन का कार्य धड़ल्ले से करवाया जा रहा है। इसी वजह से संबंधित विभाग कार्यवाही करने से पीछे हटता है। एक ओर शासन द्वारा करोड़ों रूपये की लागत से बनाई गई सडक़ें जर्जर हो चुकी हैं वहीं दूसरी ओर नियम विरूद्ध वर्तमान में चल रही हाईवा के कारण निरीह लोगों की जान जा रही है। ग्राम दोनर में पिछले दिनों एक शिक्षक अपनी मोटरसायकल से अपने साईड में चल रहा था जिसे रेत से भरी हाईवा ने अपनी चपेट में ले लिया और उसकी घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई जिससे ग्रामीणजन आक्रोशित होकर वहां चक्काजाम कर दिये। हालांकि पुलिस ने वहां पहुंचकर स्थिति संभाली परंतु लगातार हो रही मौत के जिम्मेदार लोगों पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होती जबकि जिस हाईवा से मौत हुई थी, उसके मालिक पर भी अपराध दर्ज होना चाहिये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब देखना है कि कलेक्टर ऋतुराज रघुवंशी ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिये क्या कदम उठाते हैं?





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