फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी, कब होगी कार्यवाही

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 

धमतरी । छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर नौकरी करने वालों को बर्खास्त करने की मांग को लेकर राजधानी में पिछले दिनों हुए नग्र प्रदर्शन को लेकर सरकार एक्शन के मूड में है और इसे लेकर वह काफी गंभीरता के साथ ऐसे लोगों को चिन्हांकित कर तत्काल निलंबित करने का आदेश भी दी है। छत्तीसगढ़ में ऐसे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले तथाकथित लोगों की शिनाख्ति हो रही है। मुख्य सचिव ने भी इसे गंभीरता से लिया है और उन्होंने तत्काल इस मामले को लेकर बैठक भी लेकर दिशा निर्देश जारी किया है जिससे फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी प्राप्त करने वाले लोगों में हडक़ंप मचा हुआ है। धमतरी जिले में भी एक अधिकारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी में उच्च पद पर बैठा हुआ है। सरगुजा जिले के रहने वाले इस अधिकारी के खिलाफ भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला प्रकाश में आया है। ऐसे लोगों पर अब कार्यवाही की मांग तेज हो गई है।

शासकीय विभागों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नौकरी पाने वाले ऐसे लोगों द्वारा पात्रता की श्रेणी में आने वाले सभी वर्ग के लोगों को उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। उन्हें नौकरी नहीं मिलने की वजह से बेरोजगारी किसी अभिशाप से कम नहीं नजर आ रही है। अपनी असली डिग्री लेकर जहां भी नौकरी निकलती है, ऐसे बेरोजगारों द्वारा एक आस लेकर अपना भाग्य आजमाया जाता रहा है। चारों तरफ से हताश होकर इन्होंने राजधानी की खुली सडक़ों पर नग्र प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नये आंदोलन का शंखनाद किया है। अभी तक वैसे अद्र्धनग्र प्रदर्शन की जानकारी मिलती रही है। लेकिन यह प्रदर्शन लोगों को झकझोर दिया जिसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने इस मामले को लेकर ऐसे लोगों को चिन्हांकित कर तत्काल प्रभाव से निलंबित किये जाने का निर्देश दिया है। धमतरी जिले में पदस्थ एक अधिकारी भी उसी श्रेणी में आ रहा है। लेकिन इसके द्वारा दावा किया जा रहा है कि मैं उक्त आरोप से निपटने के लिये कोर्ट का सहारा ले चुका हूं, मेरा कोई बाल बांका नहीं कर सकता। जबकि यदि विभाग के उच्चाधिकारी इस पर गौर करें तो यह मामला तूल पकड़ सकता है परंतु वरिष्ठ अधिकारियों की खामोशी भी ऐसे लोगों को बढ़ावा दे रही है।

सरगुजा, अंबिकापुर क्षेत्र के रहने वाले इस अधिकारी के विरूद्ध धमतरी के पूर्व कार्यकाल में भारी शिकायतें ग्रामीणजनों द्वारा की गई थी। लंबे समय तक यहां पदस्थ रहे उक्त अधिकारी के द्वारा प्रमोशन पश्चात धमतरी जिले में ही फिर से वापसी कर ली गई है जिनके द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाये जाने, शिकायतकर्ताओं की शिकायत को नजरअंदाज कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे कृत्य किये जा रहे हैं जिसके कारण शासन की छवि भी धूमिल हो रही है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में यह भी पता चला है कि उक्त अधिकारी केंवट जाति का है जिसने आदिवासी के नाम पर नौकरी पा ली है। यही नहीं इनके दो भाई भी इसी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विभिन्न शासकीय कार्यालयों में उच्च पदों पर बैठे हुए हैं। एक ही परिवार के तीन व्यक्तियों द्वारा केंवट जाति होने के बाद भी आदिवासी प्रमाण पत्र जमा कर नौकरी हथियाने का यह अनोखा मामला जिले में चर्चित है। उल्लेखनीय रहे कि शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति के आधार पर नौकरी करने वालों की जांच के लिये अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग का गठन भी काफी लंबे समय से किया गया है। लेकिन आयोग में बैठे लोगों की उदासीनता के चलते फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले लोग अपनी कुर्सी में आज भी जमे हुए हैं। 

धमतरी जिले में सरगुजा, अंबिकापुर क्षेत्र के तीन भाईयों द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने एवं एक भाई की धमतरी में पुन: पदस्थापना का मामला प्रकाश में आया है। इसके अलावा पॉलिटेक्रिक कॉलेज में पदस्थ एक कर्मी के संदर्भ में इसी तरह का मामला सामने आने पर इसकी शिकायत आयोग में एक जागरूक व्यक्ति द्वारा पूर्व में किया गया है। लेकिन अब तक इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ये दो मामलों के अलावा भी अन्य विभागों में भी ऐसे लोगों की नियुक्ति को नहीं नकारा जा सकता। अब देखना है कि इस मामले को लेकर राजधानी में बैठे वरिष्ठ अधिकारी संज्ञान लेकर इस पर क्या कार्यवाही करते हैं। छग अनु.जजा शास.वि संघ के प्रदेश अध्यक्ष आर एन धु्रव ने प्रतिनिधि से चर्चा में बताया कि छग में जितने भी लोग फर्जी जाति के आधार पर नौकरी कर रहे हैं ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल बर्खास्त कर एफआईआर करवाना चाहिये ताकि पात्रता की श्रेणी में रहने वाले शिक्षित बेरोजगार युवकों को शासकीय नौकरी मिल सके।

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