जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नागरिकों की जान के साथ कर रहे खिलवाड़

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 

धमतरी 25 जुलाई। शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिये नगर निगम को जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से नागरिकों की समस्याओं का निराकरण नहीं होने के कारण इनकी ऐसी मंशा बनी कि वे गत वर्ष हुए निगम चुनाव में शहरी सत्ता परिवर्तन कर अपनी मूलभूत सुविधाओं की निराकरण कर सकेंगे किंतु इनकी यह सोच धरी की धरी रह गई और जिन्होंने नई सत्ता लाने के लिये वोट दिया था, वे लोग प्रारंभकाल से सप्लाई में भ्रष्टाचार, टेंडर में घोटाला जैसी शिकायतों के शिकार होते रहे। अभी वर्तमान में वर्षा ऋतु के प्रारंभ होते ही नगर के नालियों का जीर्णोद्धार, सुधार कार्य, नया निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है जिसमें जगह-जगह से लोहे की छड़ बाहर निकली हुई है जिससे पिछले दिनों एक व्यक्ति उलझकर उसमें गिर गया। गनीमत यह रही कि वह हेलमेट पहना हुआ था, नहीं तो उस दिन कुछ भी बड़ा हादसा हो सकता था ङ्क्षकतु इन बातों को देखने न निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को समय है, न अधिकारियों को।

नगर निगम के हुए पिछले वर्ष चुनाव में भाजपा के शहरी सत्ता को हटाकर शहरवासियों ने कांग्रेस की शहरी सत्ता इस आशय को लेकर बनाई थी कि उन्हें उनकी मूलभूत सुविधाओं का निराकरण होगा। उन्हें समय पर उनकी समस्याओं का निराकरण देखने को मिलेगा। लेकिन उनकी यह सोच काफूर की तरह उस वक्त गायब हो गई जब प्रथम वर्ष में ही 50 टेंडरों में से 35 टेंडर को रिंग बनाकर डेढ प्रतिशत बिलोव दर पर भरवाया गया और 15 टेंडरों को रोक दिया गया जिससे क्षुब्ध ठेकेदारों ने इस मामले को मीडिया के सामने रखा तब निगम में बैठे जिम्मेदार लोगों ने इस मामले को मेयर इन काउंसिल में पास कराने की बात कही। यह मामला लटकता देखकर जिन लोगों ने टेंडर भरा था, वे लोगों की सांसें तेज हो गई। इस पूरे मामले में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के भाई का तथा एक पार्षद का प्रमुख रोल बताया गया है। उक्त टेंडर को डालने में वही पार्षद के निवास में यह बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद ब्लीचिंग पावडर, मास्क खरीदी, रिक्शा खरीदी में समय समय पर बातें छनकर बाहर आने लगी जिससे नागरिकों को जानकारी हुई कि यहां अधिकांश कार्य गोलमाल के दायरे में है जिसकी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। कलेक्टर को भी इसकी शिकायत विपक्षी लोगों ने दी थी लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जिसकी नागरिकों को उम्मीद थी।

कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने की शिकायत उनके  धरना प्रदर्शन से दी जा सकती है। एक ओर शहर के विकास की बात की जाती है दूसरी ओर कर्मचारियों को वेतन तक नसीब नहीं होती। तुर्रा यह कि नगर निगम क्षेत्रांतर्गत विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन के साथ साथ बरसात में नाली निर्माण का कार्य करवाया जा रहा है जबकि नियमानुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक सीमेंट का कार्य प्रतिबंधित रहता है। इस कार्य से मानो ऐसा प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ का यह एकलौता निगम है जहां नियम कायदों को बलाये ताक रखकर यह सब कार्य किया जा रहा है। और तो और बरसाती पानी के निकासी के क्षेत्रों में बिना अनुमति के बन रहे धड़ाधड़ भवन निर्माण से आम लोगों को बारिश के पानी से दो-चार होना पड़ रहा है। निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारी ऐसे अवैध निर्माण तोडऩे तैयार नहीं है। वे कुर्सी में बैठकर अपने कामों को अंजाम देते आ रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शनिवार, रविवार को अवकाश घोषित किया है किंतु उन्होंने 10.30 बजे से कार्यालय उपस्थिति का निर्देश दिया है। लेकिन इसका पालन निगम में नहीं हो रहा है। अपने इच्छानुसार यहां अधिकारी आते हैं, और अपनी मर्जी से चले जाते हैं। दूसरे सत्र में तो निगम कार्यालय, अधिकारीविहीन रहता है। नगर में जिन क्षेत्रों में नाली निर्माण का काम बरसात में करवाया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता को लेकर अनेक सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। पूर्व में निर्मित नाली में छड़ों के निकल जाने के कारण कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण विमल टॉकीज मोड़ के पास देखने को मिला जहां एक व्यक्ति निकली हुई रॉड में फंसकर गिर गया, हेलमेट की वजह से वह बच गया।

निर्माण कार्यों की बात करें तो राष्ट्रीय राजमार्ग में जो नाली निर्माण किया गया है, उसमें भी लेवल की नापजोख नहीं की गई है। इससे पूर्व भी ओजस्वी नर्सिंग होम से सोरिद होते हुए नाला का निर्माण कराया गया जहां से पानी निकासी नहीं हो पा रही है, पानी जाम रहता है। इसमें बड़े-बड़े जलजीव उत्पन्न हो रहे हैं। अनेक लोगों ने तो वहां से बड़े बड़ें सांप निकलते देखे हैं। नाली निर्माण तो कर दिया गया है लेकिन इसके निकासी का कोई स्त्रोत दिखाई नहीं दे रहा है। बस्तर से रायपुर रोड स्थित नाली निर्माण में निकासी का कोई मार्ग नहीं है। यह नाली प्रदायक नहर क्रमांक 01 तक बनाई गई है। लेकिन इसमें नाली को शामिल नहीं किया गया है जिसके कारण नवनिर्मित नाली का पानी वहीं जाम नजर आ रहा है। ऐसी त्रुटियों को लेकर नागरिकों ने कहा कि यह सीधा सीधा मानव अधिकार हनन का मामला बनता है। चूंकि इन नालियों में जलजीव उत्पन्न हो रहे हैं और वर्षों से इस नाली का पानी एक ही जगह ठहरा हुआ है जिसकी सफाई ऊपरी तौर पर निगम कर्मचारी करते रहे परंतु अंदर जो लीद जमी है उसकी सफाई नहीं होने से यह स्थिति बनी हुई है जिसे लेकर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खामोशी अख्तियार किये हुए हैं। नागरिकों ने यह भी मांग की है कि जहां नालियों में छड़ें निकली हैं, वहां इन छड़ों पर निर्माण कराया जाये और साथ ही साथ नाली निकासी की व्यवस्था की जाये।

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