संजय जैन
धमतरी 13 जुलाई। पर्यावरण संतुलन को लेकर राजधानी में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा धमतरी जिले में विभिन्न योजनाएं चलाकर इसे संतुलित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यहां पदस्थ अधिकारियों की मिलीभगत से जंगल में जंगल राज चल रहा है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण नगरी ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरभर्री से दिया जा सकता है जहां लाखों रूपये की लागत से बन रहे डब्ल्यूबीएम सडक़ जो कि कैम्पा मद से निर्माण कराई जा रही है, इसमें अधिकारी एवं ठेकेदार की मिलीभगत से न सिर्फ वनक्षेत्र की बेशकीमती मुरूम, गिट्टी, रेत इत्यादि का अवैध दोहन कर उसी डब्ल्यूबीएम सडक़ में लगाकर शासन को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार के कृत्य से न सिर्फ वनक्षेत्रों में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, वरन यहां उपजे वृक्षों को उखाड़ दिये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। इससे पता चलता है कि वन विभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी एवं वन परिक्षेत्राधिकारी जिनके जिम्मे वनों की सुरक्षा का जिम्मा है, उनके रहते हुए ऐसा कृत्य किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी के संरक्षण में वनभूमि पर अवैध उत्खनन लगातार जारी है। रक्षक ही जब भक्षक बन जायेंगे तो वनक्षेत्रों का भगवान ही मालिक है।
वन विभाग से सूचना के अधिकार के अंतर्गत पूर्व में एक जागरूक नागरिक द्वारा संबंधित वन परिक्षेत्रांतर्गत मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन को लेकर जानकारी मांगी गई थी जिसमें जानकारी देते हुए वन अमला ने बताया कि बिरगुड्ी, केरेगांव, सिंगपुर, धमतरी रेंज में कहीं भी उपरोक्त गौण खनिज का उत्खनन नहीं हो रहा है। लेकिन सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पता चला है कि ग्राम पंचायत खैरभर्री के अंतर्गत कैम्पा योजना से डब्ल्यूबीएम सडक़ में लगने वाले मुरूम, गिट्टी, रेत इत्यादि को संबंधित निर्माणकर्ता द्वारा वनों से ही दोहन कर उसे लगाया जा रहा है जबकि नियम यह है कि डब्ल्यूबीएम सडक़ के निर्माण में संबंधित निर्माणकर्ता को बाहर से मुरूम, रेत, गिट्टी का परिवहन कर उक्त सडक़ का निर्माण किया जाना था किंतु ऐसा न कर वन अधिकारियों एवं ठेकेदार की मिलीभगत से यह सभी कुछ हो रहा है। यह एकलौता मामला वन विभाग का नहीं है। इससे पूर्व भी निलंबित वन परिक्षेत्राधिकारी द्वारा मथुराडीह के पास चांदा मुनारा को तोड़ते हुए एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पोल्ट्री फार्म हेतु यह सब कार्य किया गया है। इसी तरह सामान्य वन मंडल अंतर्गत जितने भी वन परिक्षेत्र हैं उनमें भी व्यापक पैमाने पर गौण खनिज उत्खनन का कार्य बदस्तूर जारी है। पूछने पर पता चलता है कि यह सब मटेरियल भारत माला प्रोजेक्ट जिसके तहत विशाखापटनम सडक़ का निर्माण किया जा रहा है वहां से प्राप्त की जा रही है।
सामान्य वन मंडल अंतर्गत अनेक स्थानों पर जंगली जानवरों की उपस्थिति दर्शाकर जिस प्रकार वन अधिकारियों द्वारा गौण खनिज उत्खनन कार्य के साथ साथ हरे-भरे वृक्षों को धराशायी किया जा रहा है, उससे पर्यावरण का संतुलन असंभव सा प्रतीत हो रहा है। वन मंडल क्षेत्र में राजधानी में बैठे वन अधिकारियों को फुर्सत नहीं है कि वे ऐसे भ्रष्टाचार एवं नियम विरूद्ध कार्य का संज्ञान लें। इसी वजह से ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं और वे वनों का विनाश कर अपनी तिजोरी लगातार भर रहे हैं। यहां पदस्थ एक अधिकारी के विरूद्ध तो फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने का भी आरोप है। राजनीतिक एप्रोच के चलते इसे अब तक निलंबित नहीं किया जा सका है। तुर्रा यह कि इस अधिकारी से जब कोई जानकारी मांगने हेतु उनके मोबाईल में फोन किया जाता है तो वे फोन तक नहीं उठाते। पूर्व में ये अधिकारी केरेगांव वन परिक्षेत्रांतर्गत वन परिक्षेत्राधिकारी के पद पर लंबे समय तक पदस्थ था। इसकी पहुंच देखिये कि उसे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के घेरे में न लाते हुए उसे पुरस्कृत स्वरूप उच्च पद पर धमतरी वन मंडल में ही पदस्थ कर दिया गया है जिसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। वनों की सुरक्षा के लिये बनरौद बैरियर जैसे बैरियर बनाये गये हैं। लेकिन यहां पदस्थ कर्मचारी भी अवैधानिक रूप से रेत, मुरूम, गिट्टी का वनक्षेत्रों से अवैध दोहन कर ट्रकों में ले जाने वालों पर बिना रोकटोक के रवाना कर देते हैं जिससे इनको भारी भेंट-पूजा मिल जाती है।
कैम्पा मद से ग्राम खैरभर्री में निर्माणाधीन सडक़ को लेकर जब सामान्य वन मंडल के डीएफओ मयंक पांडे से दूरभाष पर इस प्रतिनिधि ने उक्त संदर्भ में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ता का भुगतान रोक दिया है। वनक्षेत्रों में गौण खनिज उत्खनन एवं वृक्षों की कटाई की खबर मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल स्थल का मुआयना कर संबंधितों पर कार्यवाही किया जाना चाहिये था। लेकिन इनकी लापरवाही के चलते उपरोक्त कार्य करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। ग्राम खैरभर्री तहसील नगरी में डब्ल्यूबीएम सडक़ निर्माण की जानकारी जिला पंचायत सदस्य एवं वन सभापति श्रीमति कविता योगेश बाबर को होने पर उन्होंने इस पर वन समिति की बैठक में इस मामले को उठाया। लेकिन वन अधिकारियों द्वारा इस बात पर परदा डालने का प्रयास किया जा रहा है जिससे शासन को नुकसान तो पहुंच ही रहा है साथ ही साथ वनक्षेत्रों में नियम विरूद्ध कार्य की संख्याओं में लगातार वृद्धि हो रही है। अब देखना है कि वनमंत्री मो.अकबर और राजधानी में बैठे अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं?
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