संजय जैन
धमतरी 13 जुलाई। कांग्रेस समर्थित नगरीय सरकार जबसे निगम में बैठी है तबसे लेकर अब तक नये-नये भ्रष्टाचार उजागर हो रहे हैं। टेंडर में गड़बड़ी, मास्क खरीदी में गड़बड़ी, पावडर खरीदी में गड़बड़ी के बाद अब शहर के 40 वार्डों में कचरा संग्रहण करने के लिये लाखों रूपये की लागत से बैटरीयुक्त वाहनों की खरीदी की गई है जिसे लेकर नेता प्रतिपक्ष नरेंद्र रोहरा ने निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच किये जाने की मांग की है। निगम में कुल 24 वाहनें कचरा संग्रहण करती रहीं। लेकिन इसमें से 13 वाहनों को कंडम बताकर इसे वर्कशॉप में रख दिया गया है और इसी आधार पर इन्होंने इलेक्ट्रिक बैटरी चलित वाहन खरीदी की है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता की मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिये यह निगम पिता के रूप में माना जाता है जिसके द्वारा प्रत्येक नागरिक की समस्याओं को चाहे वह साफ सफाई, बिजली हो या अन्य सुविधाएं हो, इसके लिये निगम के प्रति लोग आश्रित रहते हैं किंतु जबसे सत्तापक्ष की सरकार निगम में बैठी है, तबसे लेकर अब तक नित नये भ्रष्टाचार होते आये हैं। सर्वप्रथम 50 टेंडरों से दिया जा सकता है जिसमें 35 टेंडरों में रिंग बनाकर ठेकेदारों द्वारा डेढ़ प्रतिशत बिलोव दर पर निविदाएं भरी गई थी। इसका विरोध होने पर इसे रद्द कर एमआईसी की बैठक में रखा गया। इसके बाद कोरोना काल में मास्क खरीदी के लिये जो निविदा निकाली गई, उसमें भी भारी भ्रष्टाचार किया गया। ब्लीचिंग पावडर की सप्लाई में धांधली की गई। जब यह प्रकरण जनमानस में फैला तो वहां बैठे जिम्मेदार लोग जांच करेंगे, कार्यवाही करेंगे..ऐसा कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया और यह मुद्दे को भूलभुलैया की तरह भटका दिया। इसे लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कलेक्टर धमतरी को भी लिखित में शिकायत दी थी जिस पर कार्यवाही आज तक नहीं हुई।
नगर निगम धमतरी में 40 वार्डों के कचरा संग्रहण को लेकर वाहनें चला करती हैं। जो वाहनें वार्डों से कचरा संग्रहण करती थीं, वह दो-तीन साल पुरानी हैं जिसे 2-4 लाख रूपये खर्च कर उसका सुधार कार्य करवाया जा सकता था। लेकिन निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसे कंडम बताकर उसे वर्कशॉप में खड़ा कर दिया गया। आज यह वाहनें कंडम के श्रेणी में ला दिया गया है जबकि कोई भी वाहन 15 साल तक अपनी सेवाएं निरंतर दिया करती हैं। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि बिना कुछ सोचे-समझे अच्छी भली दो तीन साल पुरानी ऐसी वाहनों को कंडम की श्रेणी में लाने का अधिकार निगम को किसने दिया? क्या इसके लिये परीक्षण कराया गया? इस बात का जवाब देने से अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं। श्री रोहरा ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार का खेल लगातार निगम में जारी है। नाली निर्माण में बेड लेवल का ख्याल न करते हुए निर्माण किया जा रहा है जिसके चलते पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। हद तो यह है कि निगम में बैठे अधिकारी कुर्सी तोड़ते हैं, स्थल पर निर्माण कार्यों की देखरेख करने नहीं जाते जिसका लाभ लेकर निगम के कुछ ठेकेदारों द्वारा अपनी मनमानी से निर्माण कार्यों में लगने वाली सामग्रियों को लगाया गया है। पिछले दिनों बरसात में इन नालियों से पानी निकासी नहीं होने की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग में तीन फुट पानी भर गया था।
इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की खरीदी में भी भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। नेता प्रतिपक्ष श्री रोहरा का यह भी कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की कोई गारंटी नहीं है। ये वाहनें बनिस्बत डीजल से चलने वाली वाहनों की तुलना में कमजोर साबित होंगी और लाखों रूपये की लागत से खरीदी ये वाहनें अपनी ज्यादा सर्विस नहीं दे पायेंगी और यह भी दो साल में कंडम स्थिति में पहुंच जायेंगी। इनका तर्क है कि जो बैटरी इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में लगे रहती हैं वह कभी भी खराब हो सकती है जिसकी कीमत खुले बाजारों में लगभग 35 हजार रूपये की होती है। इन्होंने आगे कहा कि बजाय नई वाहनों की खरीदी किये जाने के दो-तीन साल पुरानी वाहनों का यदि सुधार कार्य करवाया जाता तो निगम को लाखों रूपये की लागत से उक्त वाहनें खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस खरीदी में भी भारी भ्रष्टाचार की संभावनाओं को नहीं नकारा जा सकता। श्री रोहरा ने नगरीय निकाय संचालनालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों से इस खरीदी के साथ साथ निगम द्वारा अन्य सप्लाई, निर्माण कार्य, खरीदी इत्यादि की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। गौरतलब रहे कि शहर में बिना अनुमति के चारों तरफ भवनों का निर्माण हो रहा है, इसे लेकर भी निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारी मिलीभगत कर ऐसे निर्माण कार्य को प्रोत्साहित कर रहे हैं जिससे बेतरतीब बने एवं बनाये जा रहे भवनों के निर्माण से बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पा रही है जिस पर भी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को ध्यान देना चाहिये। इस संबंध में निगम आयुक्त से संपर्क कर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया परंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

