प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री योजना सडक़ों की हालत जर्जर

धमतरिहा के गोठ
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फाइल फोटो 


संजय जैन 

धमतरी 3 जुलाई। जिले के कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जरूरतमंदों के फोन नहीं उठाये जाने को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है जबकि इस मामले में शासन का आदेश है कि किसी भी समस्या को लेकर ग्रामीण, शहरी लोगों के द्वारा मोबाईल या फोन किया जाता है तो उसे उठाकर संबंधित व्यक्ति को संतुष्टिप्रद जवाब दें और उसकी समस्या का निराकरण करे। लेकिन इसका पालन प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के अधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा है और इसी वजह से दूरदराज के ईलाकों में धमतरी जिले में निर्मित प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना की दुर्दशा लगातार देखने को मिल रही है। ऐसी सडक़ें जो पांच वर्षीय गारंटी समय में हैं, वो जर्जर होकर अभी से जवाब दे दिये हैं। पहली बारिश में यह हाल है तो आगामी दिनों में होने वाली बारिश में ऐसी सडक़ों का क्या हाल होगा। दरगहन, बटनहर्रा आदि क्षेत्र के लोगों द्वारा जब प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता को ठेकेदार द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही के संबंध में शिकायत करने फोन लगाया जाता है तो वे फोन तक नहीं उठाती। उनकी इस कार्यशैली से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी नाराजगी है।

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना का कार्य के लिये एक पृथक से कार्यालय रूद्री में स्थित है जिसके माध्यम से धमतरी जिले के सुदूर ईलाकों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ निर्माण कार्य करवाया गया है। वर्तमान में भी कुछ गांवों में भी इसका कार्य किया जा रहा है। लेकिन अधिकारियों के द्वारा उक्त कार्य की देखरेख नहीं करने की वजह से ठेकेदार द्वारा इसमें भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इससे पहले भी डोंगरडुला से बटनहर्रा तक करोड़ों रूपये की लागत से इस सडक़ का निर्माण ठेकेदार द्वारा करवाया गया। लेकिन समय से पहले ही यह सडक़ विवादों के दायरे में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सडक़ के निर्माण में ठेकेदार द्वारा जिस तरह मटेरियल लगाया गया है वह घटिया स्तर का था और सडक़ निर्माण होने के बाद से ही बजरी, गिट्टी उखडक़र सडक़ में बिछ गई थी। इसकी शिकायत की गई, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसी तरह चारों ब्लॉकों के कुछ गांवों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना का कार्य करवाया जा रहा है। उसमें भी गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। कुछ ग्रामवासियों का कहना है कि सडक़ निर्माण के समय विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्थल पर नहीं रहता और इसी का लाभ लेकर संबंधित ठैकेदार द्वारा निर्धारित मापदंड के विरूद्ध जाकर मटेरियल बनाकर सडक़ में बिछाया जा रहा है जिससे सडक़ बनने के तुरंत बाद ही उखडऩे लगी है। ग्राम पंचायत दरगहन के लोग निर्माण कार्य से ज्यादा नाराज हैं। इनकी मांग है कि एक बार आकर सडक़ की दुर्दशा का मुआयना किया जाये, क्योंकि यहां जगह-जगह अभी से सडक़ उखडऩे लगी है।

कार्यपालन अभियंता प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना के कार्यालय में अधिकांश समय अधिकारी, कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं। पूछने पर रटा-रटाया जवाब दिया जाता है कि साहब साईट निरीक्षण में गये हैं जबकि ग्रामवासियों का कथन है कि निर्माण कार्य के समय कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं होता। यही वजह है कि सडक़ जर्जर हालत में पहुंच गई है। हद तो यह है कि जब इस संबंध में प्रतिनिधि मिली शिकायत के बारे में जानकारी लेने हेतु प्रभारी महिला कार्यपालन अभियंता को फोन लगाया जाता है तो वे भी फोन को नहीं उठाती और उनसे मिलने कार्यालय जाकर संंबंधित शिकायत के बारे में उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया जाता है तो वहां वे उपलब्ध नहीं रहती। इस वजह से ग्रामीणों की शिकायत के संबंध में उनका क्या कहना है, यह स्पष्ट नहीं हो पाता किंतु ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक निर्माणाधीन सडक़ों की हालत दयनीय है और जिन सडक़ों का नवनिर्माण किया जा रहा है वहां भी सडक़ में बिछाये जाने वाले मटैरियल में भारी गोलमाल ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है जिसके कारण लाखों, करोड़ों रूपये की लागत से बनने वाली यह सडक़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। रूद्री स्थित कार्यालय में लगातार निरीक्षण करने पर पाया गया कि वहां अधिकारी तो रहते ही नहीं। इसे लेकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसका संज्ञान भी नहीं लिया जाता। आगंतुकों को कार्यालय में पहुंचने पर स्थल निरीक्षण में जाने की बात कही जाती है, जब स्थल में जरूरतमंद समस्याग्रस्त व्यक्ति पहुंचता है तो उसे साहब वहां भी नजर नहीं आते।

बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना में अधिकारियों, ठेकेदारों की मिलीभगत से जिस प्रकार शासन की राशि का दुरूपयोग करने हेतु सडक़ में लगने वाले मटेरियल में हेरफेर किया जा रहा है उससे सडक़ के स्थायित्व को भारी खतरा है। जितनी सडक़ें पूर्व में इस विभाग द्वारा बनाई गई है, उसकी हालत भी जगह-जगह से देखते बनती है क्योंकि पिछले कार्य में इसी ठेकेदार द्वारा इसी तरह लापरवाही बरती गई है। इसे देखकर भी संबंधित विभाग के आला अधिकारी गारंटी समय में इस सडक़ के सुधार हेतु ठेकेदार को कोई आदेश निर्देश नहीं देते। इससे भी स्पष्ट है कि जितने भी काम प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना में करवाये जा रहे हैं उसकी सुध पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों ने नहीं ली है। लाखों, करोड़ों की लागत से निर्मित इन सडक़ों का निर्माण शासन की मंशानुरूप आवागमन को सुलभ बनाने एवं ग्रामीण सडक़ों को मुख्य कार्यालय से जोडऩे का है, लेकिन यह सडक़ें अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से अल्पावधि में ही जगह-जगह से खराब हो रही हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मामले को लेकर लगातार संपर्क किये जाने के बाद भी साहब स्थल एवं साईट में भी नहीं देखे गये। शिकायत करने वाले मन मसोस कर अपने गांवों को रवाना हो गये। इन्होंने जाते-जाते शासन एवं प्रधानमंत्री सडक़ योजना के जिम्मेदार अधिकारियों से तमाम सडक़ों की जांच एवं कार्यवाही की मांग की है।

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