गुणवत्ताहीन लाखों की लागत से हो रहा नाली निर्माण कार्य... निगम का जनप्रतिनिधि बना इस कार्य का अघोषित ठेकेदार

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 

धमतरी 16 जून। निगम द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 के बाजू पुराना स्टेट बैंक से लेकर बठेना अस्पताल के आगे स्थित नहर तक लाखों रूपये की लागत नाली का निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने बताया कि स्लेब एवं निर्माण में निर्धारित एम.एम.की छड़ें एस्टीमेट के आधार पर नहीं लगाई गई है जिसके कारण यह निर्माण कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। हद तो यह है कि निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारी उस नाली का निर्माण कर रहे हैं जिसके गंदे पानी के निकासी का कोई स्थल नहीं है। इससे पूर्व भी दाईं छोर पर नाला का निर्माण किया गया है जिसमें आज कई साल का गंदा पानी बिना निकासी के आज भी जाम पड़ा है जिससे निकलने वाले किटाणुओ को इधर-उधर देखा जा सकता है। खबर है कि यह निर्माण कार्य निगम के ही एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के द्वारा एक बेनामी ठेकेदार के माध्यम से करवाया जा रहा है। कुछ व्यापारियों ने प्रतिनिधि को बताया कि संबंधित ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता की अनदेखी किये जाने के चलते हम स्वयं अपने व्यय से सीमेंट, छड़ देकर अपने दुकानों के सामने का निर्माण कार्य करवाने मजबूर हैं।

पिछले माह से जारी इस कार्य को आनन-फानन में पूरा कर दिया गया है। कहीं चौड़ाई कम है, कहीं सीमेंट के मसाले में गड़बड़ी देखी जा रही है। और तो और इसमें लगने वाली छड़ों में भी हेरफेर कर इस कार्य को अंजाम दे दिया गया है। अब आने वाले दिनों में इसमें गंदे पानी का संग्रहण होता रहेगा और उससे दाईं ओर की तर्ज पर बड़े-बड़े मेंढक, सांप, जैसे खतरनाक जलीय जीव इधर-उधर घरों में घुसेंगे। व्यापारियों का कहना है कि इस निर्माण के पूर्व नहर में जाम गंदे पानी की निकासी का साधन होना चाहिये। लेकिन दुर्भाग्य है कि निगम इस समस्या से बेखबर होकर कार्य कर रहा है। निर्माण कार्यों में भी लापरवाही बरती जा रही है। जिनके जिम्मे निर्माण को पूरी गुणवत्ता के साथ कराने का दायित्व है, वो अधिकारी गर्मी में कूलर और पंखे के बीच कुर्सी में बैठे अपना वक्त बिता रहे हैं जबकि ऐसे निर्माण कार्यों को लेकर पूरी मुस्तैदी दिखाना चाहिये ताकि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ संपादित हो सके और जिस लिये यह नाला का निर्माण किया जा रहा है, उसके पानी के त्वरित निकासी का प्रबंध किया जाना चाहिये परंतु ऐसा नहीं किया गया है। निगम में उप अभियंता से लेकर कार्यपालन अभियंता एवं इनके ऊपर निगम आयुक्त के जिम्मे भी यह पूरी जवाबदारी रहती है। लेकिन देखा जा रहा है कि कुछ कार्यों को छोडक़र शेष कार्यों के लिये ये रूचि नहीं दिखाते। 



मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 के दोनों ओर नाला का निर्माण किया गया है। दाईं ओर वाले नाली का निर्माण कई वर्ष पूर्व किया गया है जिसमें गंदा पानी लबरेज हो चुका है। इसकी निकासी का साधन न होने की वजह से यह गंदा पानी जलीय जीव को पैदा करने का एक माध्यम बन चुका है। फुटपाथ में रहने वाले लोग ऐसे जलीय जीव को देखकर इधर-उधर हट जाते हैं। दाईं ओर के नाला निर्माण पर भी संबंधित विभाग कोई ध्यान नहीं दिया और आज यह नाला पूरी तरह कचरों के ढेर एवं गंदे पानी का जमावड़ा बन चुका है। निगम ने कभी भी इस नाले की सफाई नहीं कराई है जिसके कारण उपरोक्त स्थिति बनी हुई है। इसी तरह बाईं ओर का नाला चौड़ा तो कर दिया गया, उसमें स्लेब भी लगा दिया गया और ऐसा भी कहा जा रहा है कि अपनी खामियों को छुपाने के लिये इसका निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। नाली का निर्माण की एक फोटो एक व्यापारी ने उपलब्ध कराते हुए निगम के द्वारा कराये गये उक्त कार्य के खामियों को उजागर किया है। खबर तो यह भी है कि इस निर्माण कार्य को कराने के पीछे निगम में बैठे एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का हाथ है जो पूर्व में भी अपनी कार्यशैली की वजह से चर्चित रहे हैं। निर्माण कार्यों के पश्चात निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी भी उक्त कार्य का निरीक्षण नहीं किया और धड़ाधड़ बिल पास कर लिया गया है। ऐसे जनप्रतिनिधियों के निर्माण कार्यों का भुगतान तुरंत कर दिया जाता है। लेकिन कभी-कभी ऐसी भी शिकायतें मिलती है निगम कर्मियों को दो-तीन माह तक उनकी तनख्वाह भी नहीं दी जाती। इस तरह दोहरा मापदंड अपनाते हुए निगम के कुछ जनप्रतिनिधि अपने स्वार्थपूर्ति में सक्रिय हैं।



शहर की सरकार एवं नगर का पितामह कहलाने वाला निगम पिछले लंबे समय से या यूं कहना चाहिये कि जबसे नई सरकार इस संस्था में बैठी है, तबसे लेकर कुछ न कुछ भ्रष्टाचार उजागर होते रहा। सबसे पहले निर्वाचित जनप्रतिनिधि के भाई एवं एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने मिलकर 50 कार्यों का टेंडर निकाल था। इसमें से 35 निविदाओं में डेढ़ प्रतिशत बिलोव दर पर रिंग बनाकर निविदा भरी गई थी जो रद्द हो गई, जिसे एमआईसी ने भी रद्द कर दिया। उसके बाद पुन: इसी टेंडर को पास करने की कवायद चलने लगी। इसके बाद ब्लीचिंग पावडर, रिक्शा खरीदी, फिनाइल खरीदी का आरोप भी इस पर लगते रहा और नागरिकों ने जिन भावनाओं को लेकर नगर में नई शहरी सरकार बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया था, उनका यह सपना तो पूरा नहीं हो सका, अलबत्ता निर्वाचित कुछ जनप्रतिनिधि अपने स्वार्थपूर्ति के लिये दूसरे के नामों से टेंडर लेकर निर्माण कार्य करवाकर फटाफट अपना भुगतान ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों के लिये शासन के प्रतिनिधि के रूप में बैठे उप अभियंता, सहायक अभियंता, कार्यपालन अभियंता एवं आयुक्त जिनके जिम्मे शहर विकास के निर्माण कार्यों के देखरेख की जवाबदारी है, वे भी ऐसी त्रुटियों से जान-बूझकर अपने को दूर रखना चाह रहे हैं ताकि उन पर कोई आंच न आये। उनके इस प्रकार की लापरवाही से जनहित के दृष्टि से होने वाले निर्माण कार्यों में भारी धांधली की गई है। आज भी शहर में ऐसे कई नाले हैं जो निकासी के अभाव में गंदे पानी को अपने सीने में उठाये बैठे हैं। इस मामले को लेकर निगम के कार्यपालन अभियंता श्री खल्खो से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मीटिंग का हवाला देते हुए बाद में चर्चा करने की बात कहते हुए मोबाईल विच्छेद कर दिया।

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