धमतरी की अनदेखी विस, लोस चुनाव में भाजपा को पड़ सकता है भारी, सांसद कर रहे लगातार धमतरी- कुरूद की उपेक्षा

धमतरिहा के गोठ
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 संजय जैन 

धमतरी। आगामी महीनों में विधानसभा, लोकसभा चुनाव होने को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने अपने स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। लेकिन शुरू से ऐसा देखा जा रहा है कि मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में ही होते आया है। पिछले दिनों पुरानी कृषि उपज मंडी में भाजपा का एक सम्मेलन हुआ था जिसमें अनेक कांग्रेसजनों ने भाजपा प्रवेश किया था। इस प्रवेश से ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा को काफी लाभ होगा। लेकिन पिछले साढ़े चार साल में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद की धमतरी, कुरूद विधानसभा के प्रति उदासीनता, अनदेखी से अनेक ऐसे कार्यों को गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद दोनों विधानसभा के लोगों को थी। सांसद के आगमन पर भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी इसी बात को लेकर है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में धमतरी, कुरूद को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की पूर्ति से दूर रखा है। केंद्र सरकार द्वारा अपने क्षेत्र के विकास के लिये सांसद मद से दिये जाने वाले करोड़ों रूपये दिये जाने के बाद धमतरी, कुरूद की अनदेखी किये जाने की बात भाजपाई भी दबी जुबान से मान रहे हैं। कुछ भाजपाईयों ने तो नाम न छापने की शर्त पर यह भी कहा कि महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से अब तक के सबसे कमजोर सांसद साबित हो रहे हैं जिनके कार्यकाल में कोई भी ऐसी उपलब्धि नहीं है जिसे जनता-जनार्दन के पास जाकर बताया जा सके। वहीं धमतरी एवं कुरूद विधानसभा क्षेत्र में इनका दौरा काफी कम रहा है। यदि आ भी जाते हैं तो कुछ गिने-चुने लोगों से मुलाकात कर गंतव्य को लौट जाते हैं जबकि इसके पूर्व सांसद कभी भी आते थे तो वे क्षेत्र की जनता समेत पार्टी पदाधिकारियों के साथ चर्चा करते थे। लेकिन वर्तमान में इनके द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया। जबकि पूर्व सांसद द्वारा जनता के समस्याओं के निराकरण के लिये माह में एक बार धमतरी आकर उनके सुख-दुख पर त्वरित कार्यवाही की जाती रही है। लेकिन ऐसा भी कुछ वर्तमान सांसद द्वारा नहीं किया जा रहा है।

महासमुंद लोकसभा क्षेत्रांतर्गत आने वाले धमतरी विधानसभा क्षेत्र में सांसद मद से कोई विशेष कार्य नहीं हुआ है। एक समय था जब महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम को लेकर रायपुर से दिल्ली तक सारे राजनीतिक दलों की निगाहें रहा करती थीं। आज महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद, धमतरी, कुरूद से जिस प्रकार मुंह मोड़े हुए हैं उसे लेकर भाजपा संगठन में काफी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही साथ ऐसे जागरूक लोगों की नाराजगी है जो ऐसा मान रहे थे कि सांसद धमतरी को अपने कार्यकाल में अनेक सौगात दिलायेंगे, लेकिन उनकी यह सोच सफलीभूत नहीं हो सकी। इसके अलावा संगठन से जुड़े अनेक नेताओं को उन्होंने तवज्जो नहीं दिया। जाहिर है कि वरिष्ठ और कनिष्ठ स्तर के नेताओं की पूछ-परख नहीं होने से इनके भी मन में एक मलाल है। हालांकि भाजपा संगठन से जुड़े अनेक वरिष्ठ एवं कनिष्ठ नेता अपने स्तर पर पार्टी को धमतरी जिले में तीनों सीट दिलाने के लिये कटिबद्ध हैं। इसी वजह से उनके द्वारा प्रधानमंत्री के 9 वर्षीय कार्यकाल की उपलब्धियों को इनके द्वारा विशेष रूप से प्रचारित किया जा रहा है और इसी का परिणाम है कि अनेक कांग्रेस दिग्गज पार्टी छोडक़र भाजपा में प्रवेश कर रहे हैं। पूर्व वर्षों में लोकसभा क्षेत्र के एक ग्राम को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की योजना भी चलाई गई थी जिसके लिये पूर्व सांसद के द्वारा जब भी महासमुंद लोकसभा क्षेत्र का दौरा करते तो उनके द्वारा उस आदर्श ग्राम में जाकर उसकी प्रगति की समीक्षा करते रहे। केंद्र की राशि को लेकर जिले में पूर्व अधिकारी द्वारा डीएमएफ एवं सीएसआर फंड का करोड़ों रूपये नियम विरूद्ध खर्च किया गया है जिसकी जानकारी सांसद को दी गई थी किंतु उनके द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिससे शिकायतकर्ताओं के द्वारा यह प्रचारित किया गया कि सांसद किसी भी ऐसी शिकायत को चाहे वह कार्यकर्ताओं की हो, या समस्याग्रस्त व्यक्ति की, उसे लेकर धीर-गंभीर नहीं हैं।

केंद्र शासन के मुखिया नरेंद्र मोदी के द्वारा केंद्रीय जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति को लेकर जो कार्य कराये जा रहे हैं, उसे लेकर उनके द्वारा कोई भी प्रचार प्रसार अभियान नहीं किया जा रहा है। यहां तक पूर्व वर्षों में जो आदर्श ग्राम बनाया गया है वहां कभी भी जाकर वर्तमान सांसद द्वारा उसकी स्थिति का अवलोकन नहीं किया गया है, न ही इनके द्वारा उस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से पूछताछ की गई। और तो और जब-जब ये धमतरी में अपने दौरे में आते हैं तो यहां के समस्याओं को लेकर वे काफी निष्क्रिय देखे गये हैं। शहर की सडक़ें बदहाल हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी मंत्रमुग्ध होकर खस्ताहाल सडक़ों के प्रति उदासीन हैं। भाखनि में पदस्थ अधिकारियों के लिये अब तक किसी प्रकार की कालोनी नहीं बनने के कारण यहां पदस्थ अधिकांश अधिकारी रायपुर से आना-जाना करते हैं। इसी तरह रूर्बन मिशन, जल जीवन मिशन, जैसे अनेक केंद्रीय योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा कर उसमें व्याप्त लापरवाही के संबंध में अधिकारियों को भी निर्देशित नहीं किया गया है। दौरे में मात्र अपने कुछ लोगों के साथ शहर में आकर विश्राम भवन में कुछ देर ठहरकर वहां से विभिन्न विस क्षेत्रों के लिये निकल पड़ते हैं, जबकि जिस सडक़ से उनका काफिला अपने गंतव्य को पहुंचता है तो उस ऊबड़-खाबड़ राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने पर भी उनको इस बात का एहसास नहीं कि राष्ट्रीय राजमार्ग कितना बदहाल है। जहां सडक़ों के जर्जर होने से अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। रूर्बन मिशन के तहत धमतरी से सटे गांव में अनेक कार्य करवाये जा रहे हैं जिसमें भी जिला प्रशासन को अनेक शिकायत दी गई है। उसकी जानकारी संभवत: सांसद को भी है। लेकिन उसके संबंध में कोई जांच पड़ताल नहीं की। विश्राम भवन जहां से इसकी दूरी मात्र 4 किमी है, वहां जाकर रूर्बन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की कोई जानकारी संबंधित अधिकारियों से नहीं ली जो इनकी निष्क्रियता को उजागर करता है।

धमतरी विस क्षेत्रांतर्गत उनका जब-जब दौरा हुआ है, तब-तब ऐसे योजनाओं की शिकायतों पर जानकारी लेने की और उस पर होने वाली लापरवाही को सुधार करने की अपेक्षा जागरूक लोगों के द्वारा की गई थी किंतु देखा गया है कि उनके द्वारा मात्र दिखावे के रूप में धमतरी विस में आकर विश्राम भवन में रूककर अपने दौरे की इतिश्री कर ली जाती है। होना तो यह चाहिये था कि केंद्रीय योजनाओं के साथ साथ राज्य स्तरीय योजनाओं की भी इनके द्वारा समय समय पर समीक्षा होनी थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। समीक्षा किये जाने से आमजनों को यह मालूम चलता कि उपरोक्त योजनाएं प्रधानमंत्री सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं हैं जिससे आगामी विस चुनाव में इसका लाभ भाजपा को प्राप्त होता। लेकिन सांसद द्वारा ऐसा नहीं किया गया जिससे धमतरीवासियों को यह भी नहीं मालूम है कि उपरोक्त योजनाएं केंद्र शासन की योजनाएं हैं और इसके अतिरिक्त जो राष्ट्रीय राजमार्ग है वह भी केंद्र के अधीन है जिसकी सडक़ें आज बदहाल हैं जहां हजारों लोग प्रतिदिन आना-जाना करते हैं। साथ ही भारी वाहनें भी इस मार्ग से होकर गुजरती हैं। लेकिन इसके सुधार कार्य नहीं होने की वजह से आम नागरिकों को परेशानी झेलना पड़ता है। हालांकि पिछले समय से भाजपा के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। लेकिन सांसद जो सीधे प्रधानमंत्री से संबंध रखते हैं, उनकी योजनाओं को लेकर कभी भी बैठकें आयोजित नहीं की गई और न ही अपने दौरे के दौरान इन जैसी योजनाओं की इन्होंने अपने जनसंपर्क के दौरान प्रचारित किया, जिससे भी खासी नाराजगी देखी जा रही है।

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