संजय जैन
धमतरी 24 जून। छग शासन लोक निर्माण विभाग द्वारा समय समय पर करोड़ों रूपये की राशि धमतरी संभाग को सडक़ निर्माण कार्य के लिये स्वीकृत की गई थी जिसके तहत सडक़ों का निर्माण भी हुआ। लेकिन इन सडक़ों की तकनीकि गुणवत्ता इतनी घटिया रही कि समय से पहले ये सडक़ें गड्ढों में तब्दील हो गई। इस मामले को लेकर अधिकारी कहते हैं कि पांच साल की गारंटी पीरियड में है। लेकिन यह दावा अधिकारियों का हवाहवाई है जबकि ऐसी सडक़ों का निर्माण के पश्चात रखरखाव नहीं किया गया जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण धमतरी से सिहावा, सिंगपुर, करेली, दुगली, नगरी, बासिन, कुकरेल, बासीखाई जैसे विभिन्न क्षेत्रों की सडक़ों से दिया जा सकता है। हद तो यह है कि अधिकारी, ठेकेदार का पक्ष लेते हैं और इस संबंध में जब ठेकेदार का पक्ष लिये जाने का प्रयास किया जाता है कि उसके द्वारा यही रटा-रटाया जवाब कि मैं सबको कमीशन देता हूं, मेरा कोई बाल-बांका नहीं कर सकता। ठेकेदार के इस बड़बोले बोल से पता चलता है कि जितने भी काम अभी तक संपादित किये गये हैं उसकी न तो आज तक जांच हुई और न ही संबंधित अधिकारियों द्वारा उस कार्य की समीक्षा की गई।
लोक निर्माण विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई है जिसके चलते पांच साल के पूर्व बनाई गई सडक़ जो गारंटी पीरियड में थी, उसका भी संबंधित ठेकेदार द्वारा सुधार कार्य नहीं किया गया। अधिकांश काम शहर की सीमा से बाहर होने के कारण इस पर कोई ध्यान नहीं देता परंतु शासन की मंशानुरूप आवागमन को सुलभ बनाने के उद्देश्य से सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है। लेकिन अधिकारी और ठेकेदार की दीमकीय प्रवृत्ति से ऐसी सडक़ें जर्जर हालत में पहुंच गई हैं। और तो और पिछले वर्ष 2021-22 में समूचे प्रदेश की सडक़ें अत्यधिक वर्षा से जर्जर होकर उसमें बड़े-बड़े गड्ढे उभर आये थे। उसे लेकर भी छग शासन लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लाखों रूपये का फंड धमतरी संभाग को प्राप्त हुआ। इसमें भी इस ठेकेदार ने भारी भ्रष्टाचार किया है जिसकी शिकायत उपरोक्त गांव के कुछ लोगों ने वरिष्ठ अधिकारियों को की और बताया था कि पेचवर्क, सुधार कार्य के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है जबकि सडक़ें आज भी उसी स्थिति पर है, जैसा अत्यधिक वर्षा होने से निर्मित हुई थी। नगरी, सिहावा क्षेत्र के किमी 43/2 से लेकर 43/10 तक 2 लाख 50 हजार, 2 लाख 49 हजार रूपये की लागत से इस ग्राम क्षेत्र की सडक़ एवं पुल पुलिया का निर्माण कार्य होना बताया गया है और उसका बिल भी पास कर दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यहां कार्य हुआ ही नहीं है। शासन द्वारा प्रदत्त राशि का जिस प्रकार यहां दोहन किया गया है, उसकी जांच होने पर अधिकारी एवं ठैकेदार की मिलीभगत सामने आयेगी।
मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि इसी ठेकेदार ने पूर्व वर्ष में धमतरी से सिहावा मार्ग लगभग 66 किमी का निर्माण कराया था। यह सडक़ भी जब बनाई गई थी, उस समय पांच साल की गारंटी अवधि में थी किंतु निर्माण होने के बाद सडक़ जर्जर हुई और इसका सुधार कार्य ठेकेदार द्वारा नहीं कराया गया। इसी तरह इसी ठेकेदार ने गुरूर क्षेत्र में भी निर्माण कार्य कराया है जिसकी शिकायत भी तत्कालीन कलेक्टर को ग्रामवासियों द्वारा की गई थी। लेकिन इसी अवधि में कलेक्टर का स्थानांतरण हो गया और यह जांच दुर्भाग्य से नहीं हो पाई। और तो और यही ठेकेदार द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना, मुख्यमंत्री सडक़ योजना के अंतर्गत ग्राम भालूकोन्हा, गोबरा, सिवनीकला, संकरी मार्ग में भी भारी कोताही बरती गई है। फलस्वरूप ये सडक़ें गड्ढों में तब्दील हो गई है। जिस प्रकार इस ठेकेदार की विभागों में दादागिरी है, इसी के चलते अधिकारी खामोशी से उक्त ठेकेदार की सारी गलतियों को समाहित कर छुपाते आ रहे हैं। दुर्भाग्य है कि अब तक लोक निर्माण विभाग को करोड़ों रूपये की राशि आबंटित की गई। लेकिन आज तक राजधानी में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस पर शिकायत होने के बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। ग्राम कोलियारी से जोरातराई तक के सडक़ सुधार कार्य के नाम पर 38 लाख 50 हजार रूपये की राशि भी हजम कर दी गई। जबकि यह सुधार कार्य एवं सडक़ चौड़ीकरण की मांग को लेकर 32 ग्राम के लोग 100 दिनों तक बरसते पानी में धरना प्रदर्शन, चक्काजाम किये। इस सडक़ के जर्जर होने की वजह से इस सडक़ पर 6 लोगों की मौत भी हो चुकी है। उल्लेखनीय रहे कि जिन क्षेत्रों में पेचवर्क कार्य करना विभाग द्वारा बताया गया है उसकी जांच की मांग लगातार हो रही है।
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