शासन से भी बड़े हुए जनपद सीईओ, शहरी क्षेत्र में ग्राम पंचायत को एजेंसी बना करवाया करोड़ों का कार्य

धमतरिहा के गोठ
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संजय जैन 

धमतरी 15 जून। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार समूचे प्रदेश में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निर्माण करवाया गया। अन्य जिलों में निर्माण एजेंसी विभिन्न विभागों को बनाया गया था जहां दक्षता प्राप्त इंजीनियरों द्वारा कार्य करवाया गया। लेकिन सिहावा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत आने वाले नगरी में नवनिर्माणाधीन भवन के निर्माण के लिये ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाकर जिले के एक पूर्व अधिकारी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पूर्व में 4 करोड़ की लागत से बनने वाला यह स्कूल 10 करोड़ लगभग की राशि से प्रारंभ से ही लोगों की जुबानों में चर्चित रहा है। जागरूक लोगों ने तो यहां तक कहा है कि पूर्व वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशानुसार यह करोड़ों का कार्य किसी विभाग प्रमुख से न करवाकर ग्राम पंचायतों से करवाना अनेक संदेहों को जन्म देता है। खबर तो यह भी है कि इस कार्य में लगे ग्राम पंचायतों को यह भी नहीं मालूम कि उन्हें निर्माण एजेंसी बनाया गया है। स्कूल भवन का जितना भी काम हुआ है वह जनपद सीईओ के माध्यम से करवाया गया है जिसकी जानकारी ग्राम पंचायतों को भी नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि उक्त करोड़ों रूपये के स्कूल निर्माण से पहले सिहावा क्षेत्रवासियों की भावनाओं से जुड़ी श्रृंगि ऋषि हाई स्कूल को तोडऩे से लेकर नवनिर्माण तक नगर पंचायत से कोई एनओसी नहीं ली गई है और स्कूल डिस्मेंटल के नाम पर 1 करोड़ रूपये की राशि खर्च होना भी अपने आप में आश्चर्य एवं जांच का विषय है।



सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त जानकारी के अनुसार पता चला है कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल भवन का निर्माण को लेकर जिले के पूर्व एक अधिकारी की खासी दिलचस्पी रही है क्योंकि इनके द्वारा शुरू से ही इस स्कूल भवन के निर्माण के लिये अपने एक रिश्तेदार को लाभ पहुंचाना मुख्य उद्देश्य था। इसीलिये इन्होंने उक्त भवन के निर्माण के लिये जिला शिक्षा अधिकारी को अधिकारी को निर्माण एजेंसी बनाया। इन्होंने जनपद पंचायत को, और जनपद पंचायत ने ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाकर यह भारी भरकम कार्य करवाया। जानकारी में बताया गया कि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत ने इस निर्माण कार्य को लेकर सामान्य सभा की बैठक में इसका अनुमोदन नहीं करवाया। जो जानकारी सूचना के अधिकार के तहत दी गई है उसमें बताया गया है कि शासकीय श्रृुगी ऋषि उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय नगरी में कराये गये विभिन्न निर्माण कार्यों से निर्माण कार्यों की एजेंसी ग्राम पंचायत को एजेंसी इसलिये बनाया क्योंकि जनपद के अधीन ग्राम पंचायतें होती हैं। पहले तो जानकारी देने में आनाकानी की गई जिसकी अब प्रथम अपील जिला पंचायत धमतरी में आवेदक द्वारा की गई थी। 16 मार्च 2023 को जो आदेश पारित किया गया है उसमें आवेदक को जानकारी प्रदान की गई और प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया, जो कि अपने आप में जांच का विषय है। इस पूरे मामले की अगर निष्पक्ष जांच होती है तो करोड़ों रूपये के अनियमितता का मामला उजागर होने की संभावना है।



जनपद पंचायत नगरी द्वारा ज्ञापन क्रमांक 1679/सूकाअ/जप/2023 दिनांक 20.4.2023 को बताया गया कि सचिव, सरपंच के द्वारा किसी फर्म संस्था या अन्य खर्चों के नाम पर पंचायती राज अधिनियम के लेखा नियम 1999 नियम 18 एवं 39 पृष्ठ क्रमांक 713 एवं 715 संलग्र करते हुए यह बताया गया है कि ग्राम पंचायत को हस्त नगदी किसी भी समय रूपये 10 हजार से अधिक की राशि बैंक खाते या डाकघर में प्रेषित किया जाना चाहिये जबकि नियम 39 में बताया गया कि 5 हजार से अधिक का संदाय से अधिक या ऐसी उच्चतम रकम के जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाये, सभी संदाय केवल चेक के माध्यम से ही किये जायेंगे। जो पाने वाले के खाते में देय चेक के माध्यम से ही किया जायेगा किंतु खबर है कि इस भुगतान मामले में सचिव, सरपंचों ने हजारों रूपये की नगद राशि आहरित की है जिसकी जानकारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी पूरी तरह है। लेकिन उनके द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। सीईओ द्वारा यह भी कहा गया है कि चूंकि जनपद पंचायत के अधीन ग्राम पंचायतें नगरी क्षेत्र में होती हैं। इसी वजह से उनको निर्माण एजेंसी बनाया गया है। लेकिन इन्होंने इस बात को छुपाया है कि जो ग्राम पंचायतें स्कूल भवन निर्माण में लगी है वह नगरी से लगभग 20 से 30 किमी की दूरी पर स्थित है। तुर्रा यह कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिवों को यह भी नहीं मालूम कि वे किस निर्माण कार्य के लिये निर्माण एजेंसी बनाये गये हैं। इसी वजह से ग्राम सभा में इसका अनुमोदन भी नहीं हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि करोड़ों रूपये के भुगतान में जितने भी बिल लगे हैं, उसमें से लाखों के बिल बिना जीएसटी के लगाये गये हैं वहीं एक फर्म जिसे लाखों का भुगतान किया गया है वह छत्तीसगढ़ के बेमेतरा के एक फर्म का लगाया गया है जिसका जीएसटी नंबर सस्पेंड बताया जाता है, बावजूद इसके उस फर्म को एक ही समय, एक ही तारीख, एक ही तरह के काम का चारों ग्राम पंचायतों से लाखों का भुगतान करना बताया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि एक काम का चारों ग्राम पंचायतों से लाखों रूपये का भुगतान आखिर किसके ईशारे पर संबंधित फर्म को किस तरह करवा दिया गया। इन ग्राम पंचायतों में लगे निर्माण कार्य के बिलों की जांच की जाये तो अनेक सनसनीखेज मामले उजागर हो जायेंगे। इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत सीईओ की भूमिका संदेह के दायरे में है। सूत्रों का कहना है कि पूरा कार्य उनके कहने पर और उनके संरक्षण में करवाया गया है।

बताया जाता है कि ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाने अथवा अतिरिक्त भारी-भरकम भुगतान करने के लिये किसी भी वरिष्ठ अधिकारी से इसका अनुमोदन नहीं लिया गया है। मनमाने स्तर पर इसका भुगतान किया गया है, जो कि जांच का विषय है। सरपंच, सचिव के नाम पर जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा भारी भ्रष्टाचार किये जाने को भी नहीं नकारा जा सकता जिन्होंने शासन के नियमों के विपरीत जाकर भुगतान की राशि संबंधितों को आबंटित की है। इसके पीछे जिले के पूर्व अधिकारी का इन्हें वरदहस्त प्राप्त था। इसी वजह से अन्य अधिकारियों जिनको पूर्व में निर्माण एजेंसी बनाया गया था, वे भी इस कार्य को चुपचाप देखते रहे। जागरूक लोगों का कहना है कि जिस प्रकार शासन के राशि का दुरूपयोग भवन निर्माण में किया गया है, उसकी यदि सूक्ष्म जांच होती है तो अनेक तथ्य उजागर होंगे और जिन्होंने बिना जीएसटी नंबर के बिलों को भुगतान हेतु वहां प्रस्तुत किया है, उन लोगों के विरूद्ध भी कार्यवाही की मांग की गई है। इस तरह 4 से 5 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले स्कूल भवन की लागत 10 करोड़ रूपये तक पहुंची है जो लोगों के गले के नीचे से नहीं उतर रही है। अनेक जागरूक लोगों ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत करने की बात कही है। 

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