विधानसभा में गूंजेगा 60 गांवों की बदहाली का मुद्दा

धमतरिहा के गोठ
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संजय छाजेड़ 
नगरी। जिला प्रशासन के उदासीन रवैये और वन विभाग की कथित तानाशाही से परेशान जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति ने अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से गुहार लगाई है। धमतरी कलेक्ट्रेट के घेराव के बाद भी समस्या का समाधान न होने पर समिति का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को रायपुर स्थित पूर्व सीएम के निवास पहुंचा और घंटों चर्चा की।  
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया कि सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले 60 से अधिक ग्राम आजादी के 78 साल बाद भी सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांवों में सोलर लाइट तक नहीं लग पा रही है। समिति के प्रमुख मनोज साक्षी ने आरोप लगाया कि उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के वन मंडलाधिकारी के तानाशाही रवैये के कारण केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं गांवों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकान, आंगनबाड़ी भवन निर्माण और छोटे पुल-पुलिया के काम पर वन विभाग द्वारा लगातार रोक लगाई जा रही है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के नाम पर ग्रामीणों को सालों से परेशान किया जा रहा है। सबसे गंभीर मामला नगरी ब्लॉक के जैतपुरी गांव का सामने आया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाल ही में वन मंडलाधिकारी के निर्देश पर वन अमले ने गांव में दबिश दी और ग्रामीणों को उनके घरों से निकाल-निकाल कर मारपीट की। महिलाओं और बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा गया। इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पीड़ित परिवारों ने पूर्व सीएम से न्याय की गुहार लगाई। प्रतिनिधिमंडल ने बोराई सिविल अस्पताल की दुर्दशा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। बताया गया कि यह अस्पताल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में क्षेत्र की जनता की मांग पर खोला गया था। लेकिन वर्तमान में कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की अनदेखी के कारण यह अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। यहां डॉक्टरों की कमी, जरूरी मशीनें बंद और दवाइयों का अभाव है। गंभीर मरीजों को 80 किमी दूर धमतरी रेफर करना पड़ता है, जिससे रास्ते में ही कई जानें जा चुकी हैं। नक्सल प्रभावित और दूरस्थ वनांचल बोराई क्षेत्र को जानबूझकर स्वास्थ्य सुविधाओं से अछूता रखा जा रहा है।
पूर्व CM का तत्काल एक्शन, कलेक्टर को किया फोन
जल जंगल जमीन संघर्ष समिति के सभी सदस्यों ने एक-एक कर अपनी पीड़ा बताई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सामने ही कलेक्टर धमतरी को फोन लगाकर तीनों मुद्दों पर नाराजगी जताई और तत्काल वस्तुस्थिति से अवगत कराने को कहा। भूपेश बघेल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि आदिवासी अंचल की उपेक्षा और ग्रामीणों पर जुल्म किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभयारण्य के 60 गांवों की समस्या, जैतपुरी में ग्रामीणों से मारपीट और बोराई अस्पताल की अनदेखी का मुद्दा मैं खुद आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाऊंगा और सरकार से जवाब मांगूंगा।"

पूर्व सीएम से जताई न्याय की उम्मीद

पूर्व सीएम से मुलाकात करने वालों में प्रमुख रूप से मनोज साक्षी पूर्व जिला पंचायत सदस्य, सिरधन सोम जनपद सदस्य, नरेश मांझी सरपंच, सुरेंद्र नेताम सरपंच, चंद्र कुमार अग्रवाणी, सुरेंद्र नेताम, राजेश शामरथ, गुमान शामरथ, गजेंद्र शामरथ, डोमार नेताम सहित नगरी-सिहावा क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीण शामिल थे। सभी ने पूर्व मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें भूपेश बघेल से ही न्याय की उम्मीद है।

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