संजय जैन
धमतरी 20 जुलाई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) अंतर्गत जिला पंचायत धमतरी में वर्ष 2018 में टेबलेट(आईपैड) क्रय करने हेतु कार्यालय पत्र आदेश क्रमांक 5254डी/जिपं/एनआरएलएम 2018-19 दिनांक 30.6.2018 के माध्यम से जारी किया गया था। टेबलेट क्रय उपरांत सलासर टेक्नो ट्रेडर्स से प्राप्त बिल नंबर 112 दिनांक 11.7.2018 से राशि जारी करने हेतु प्रस्तुत किया गया है जिसके आधार पर वर्ष 2018 में ही उसे भुगतान कर दिया गया है किंतु उक्त आईपेड को जिला पंचायत कार्यालय से तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत धमतरी द्वारा उसे स्थानांतरण के पश्चात कार्यालय से उठाकर बिना अनुमति के ले जाया गया है जिसके कारण मिशन से संबंधित कार्य करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूचना के अधिकार अंतर्गत प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत कार्यालय द्वारा वर्ष 2018 में शासकीय कार्य करने हेतु आवश्यकता होने के कारण एक टेबलेट खरीदी किया गया था जिसका भुगतान 30.6.2018 को बिल क्रमांक 112 से आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित फर्म को भुगतान किया गया है। संबंधित टेबलेट का बिल व्हाउचर, नोटशीट एवं वर्तमान में उक्त टेबलेट का उपयोग किसके द्वारा किया जा रहा है, इसकी जानकारी मांगी गई थी जिसमें यह पता चला कि 74100 रूपये की लागत से खरीदी गई सलासर टेक्नो ट्रेडर्स रायपुर यह टेबलेट कार्यालय तो पहुंची लेकिन तत्कालीन सीईओ द्वारा इसे स्थानांतरण के बाद अपने साथ ले गये हैं जिसके कारण आजीविका मिशन का कार्य प्रभावित हो रहा है। किसी भी शासकीय संपत्ति को कोई भी अधिकारी स्थानांतरण पश्चात नहीं ले जा सकता। लेकिन यह एक ऐसा मामला है जो जिले में चर्चित है। वर्तमान समय में उक्त अधिकारी आईएएस हैं जिन्हें अनेकों बार फोन लगाकर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाईल हमेशा व्यस्त बताया जिसकी वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। शासकीय संपत्ति को सुरक्षा करने वाले अधिकारी ही जब ऐसा कृत्य करें तो इससे सवाल उठना स्वाभाविक है।
शासकीय वस्तुओं को ले जाने वाला यह एक अनोखा मामला सामने आया है जहां अधिकारी के इस कृत्य पर राष्ट्रीय आजीविका मिशन से संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस प्रकार की घटना को लेकर लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि विभाग द्वारा उक्त टेबलेट की वापसी के लिये किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार नहीं किया गया है। चूंकि वे आईएएस अधिकारी हैं, इसलिये निचले क्रम के अधिकारी, कर्मचारी उनको पत्र लिखने का दुस्साहस भी नहीं कर पा रहे हैं। वैसे जिले में पूर्व अधिकारियों द्वारा अपनी पदस्थापना के बाद से ऐसे कार्य नहीं किये गये हैं परंतु जिस प्रकार हजारों रूपये के इस टेबलेट को उक्त अधिकारी अपने साथ स्थानांतरण के पश्चात ले गये हैं वह एक अपराध की श्रेणी में आता है और उनसे उक्त टेबलेट की राशि वसूली किये जाने का मामला बनता है परंतु न तो यहां के अधिकारियों ने इस मामले को लेकर पत्र व्यवहार किया और न तो उक्त अधिकारी ने वर्ष 2018 से लेकर अब तक उक्त टेबलेट को वापस किया है। इससे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस घटना से एक बात और लोगों के दिमाग में कौंध रही है कि न जाने ऐसी शासकीय संपत्तियों को कितने अधिकारी अपने साथ लेकर गये हैं, यह जनचर्चा का विषय बन गया है।

