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| फाइल फोटो |
संजय जैन
धमतरी 8 जुलाई। शासन द्वारा आम लोगों को अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के उद्देश्य से करोड़ों, अरबों रूपये संबंधित विभागों को आबंटित किये जाते हैं परंतु ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसी योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जितना मटेरियल सडक़ों में लगना चाहिये, उसमें नाममात्र का मसाला बनाकर सडक़ों में लगाया जा रहा है। यही स्थिति डामर एवं डब्ल्यूबीएम सडक़ की है जिसके कारण आवामन को सुलभ बनाने के उद्देश्य से और जिला मुख्यालय से इन सडक़ों को जोडऩे का शासन का प्रयास विफल होता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना का तो भगवान ही मालिक है। वर्षों पूर्व से लेकर अब तक जितनी भी सडक़ें निर्माण हुई हैं, उसमें दरार आ गई है, बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं, लेकिन अधिकारियों को शिकायत मिलने के बाद भी जो पांच वर्ष की गारंटी समय में हैं, उस पर तथा वर्तमान सडक़ों के निर्माण में कोई कार्यवाही ठेकेदार पर नहीं की जा रही है जिससे शासन के पैसे का भारी दुरूपयोग हो रहा है।
जिला मुख्यालय से प्रत्येक ग्रामीण सडक़ को जोडऩे के उद्देश्य से शासन द्वारा पिछले लंबे समय से सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है। इस निर्माण कार्य की देखरेख की जवाबदारी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना विभाग के राजधानी में बैठे अधिकारियों की होती है किंतु ये अधिकारी कुर्सी तोड़ते ऐसी शिकायतों को और ऐसे कार्यों को कभी भी देखने के लिये स्थल पर नहीं पहुंचते जिसके कारण स्थानीय अधिकारी एवं ठेकेदार मिलकर शासन के उद्देश्यों को असफल करने के प्रयास में देखे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना विभाग के द्वारा अब तक जितनी भी सडक़ें निर्माण की गई हैं, चाहे वह सीमेंट सडक़ हो या डामर सडक़, उसमें निर्धारित मापदंड के अनुरूप मटेरियल के मिश्रण न होने से जगह जगह से ऐसी सडक़ें खराब हो चुकी हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है, फिर भी ये अधिकारी कान में रूई डालकर बैठे हुए हैं। नगरी, मगरलोड, कुरूद, धमतरी के क्षेत्र में जितनी भी सडक़ें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सडक़ योजना के तहत बनाई गई हैं, उसमें कहीं भी सडक़ का स्थायित्व नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान समय में जिले में बारिश का दौर चल रहा है। बारिश में भी सीमेंट और डामरीकरण सडक़ का निर्माण धड़ल्ले से जारी है जबकि वर्षा ऋतु में सीमेंटीकरण का कार्य नियमानुसार नहीं होना चाहिये। वैसे ही बारिश से जमीन पर आई नमी के कारण डामर के मिश्रण का पकड़ नहीं होता। इसके बाद भी ठेकेदार द्वारा अधिकारियों के नाक के नीचे ऐसा कृत्य किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना को लेकर क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने इसे अधिकारियों के लिये चारागाह निरूपित करते हुए कहा कि जब तक करोड़ों रूपये की लागत से ऐसी सडक़ों के निर्माण की जांच या स्थल निरीक्षण नहीं किया जाये, तब तक ऐसे कार्यों का भुगतान नहीं होना चाहिये। लेकिन ऐसे निर्माण कार्यों का बिना सत्यापन किये धड़ाधड़ भुगतान कर शासन की लाखों-करोड़ों रूपये की राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। यदि राजधानी में बैठे अधिकारी इस ओर ध्यान देकर निर्माणाधीन सडक़ों का निरीक्षण करे तो ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत का पर्दाफाश हो सकता है। पूर्व वर्षों में भी जो सडक़ें बनाई गई है, वह सडक़ें पांच वर्ष के गारंटी अवधि में थी। लेकिन ठेकेदार और अधिकारी ने मिलकर जर्जर सडक़ों का सुधार कार्य नहीं करवाया है जिसके कारण सडक़ें आवागमन के लायक भी नहीं रही हैं। इसी तरह जिले में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ योजना से बनी सडक़ों की कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है। बारिश होने की वजह से सडक़ों पर निर्मित गड्ढे और दरार में पानी जाने की वजह से ये सडक़ें आगामी महीनों में और भी जर्जर हो जायेंगी और शासन का जो उद्देश्य है वह विफल होने के कगार पर है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माणाधीन सडक़ें आज अधिकारी एवं ठेकेदार की मिलीभगत से अपने किस्मत पर आंसू बहा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि हम इसकी शिकायत को लेकर अनेकानेक बार संबंधित विभाग के प्रभारी महिला अधिकारी से मिलने का प्रयास किये परंतु वे नहीं मिलती, फोन नहीं उठातीं जिसके कारण ठेकेदार द्वारा व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार कर सडक़ का निर्माण किया जा रहा है। खबर है कि उक्त अधिकारी प्रभारी कार्यपालन अभियंता के रूप में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना कार्यालय में पदस्थ हैं जो एसडीओ के पद पर पदस्थ हैं, किंतु पूर्व अधिकारी के सेवानिवृत्ति पश्चात प्रभारी कार्यपालन अभियंता के रूप में पदभार संभाल रही हैं। जबसे ये उक्त प्रभार में आई हैं, तबसे ठेकेदार खुले रूप से भ्रष्टाचार करने से पीछे नहीं हट रहे हैं और वे लगातार निविदा शर्तों का उल्लंघन कर सडक़ का निर्माण कर रहे हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के जागरूक नागरिकों ने शासन के जिम्मेदार उच्चाधिकारियों से मांग की है कि वे धमतरी जिले में उक्त विभाग द्वारा बनाई गई सडक़ों का निरीक्षण करें और संबंधित अधिकारी, ठेकेदार पर कार्यवाही करें। इन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के अनेक कार्यपालन अभियंता के होते हुए एसडीओ को कार्यपालन अभियंता का प्रभार देना कहां तक उचित है। अब देखना है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना कार्यालय के जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी इस पर कब संज्ञान लेंगे। उल्लेखनीय रहे कि जिले में एक ऐसा ठेकेदार, जिसकी लंबी-चौड़ी पकड़ के आगे अधिकारी नतमस्तक होकर इसके हरेक कार्य को आंख बंद करके अपनी सहमति देते जा रहे हैं जबकि उक्त ठेकेदार के द्वारा अनेक सडक़ों का निर्माण पांच वर्ष की गारंटी के साथ किया गया है। लेकिन उक्त सडक़ों का न तो मरम्मत किया जा रहा है और न ही जिले के अधिकारियों की हिम्मत है कि उक्त ठेकेदार को बोलकर नियम-शर्तों के अनुसार मरम्मत कार्य करवाया जा सके।


