धमतरी 25 जून। शासन द्वारा बेरोजगार युवक, युवतियों को नौकरी दिलाये जाने को लेकर भारी भरकम विज्ञापन जारी कर ऐसे पात्र लोगों को नौकरी लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कड़ी में ऐसे युवक-युवतियां जो ऐसी नौकरी की तलाश में हैं, विभाग द्वारा निकाले गये विज्ञापन के तहत ऑनलाईन, ऑफलाईन आवेदन भरकर अपना भाग्य आजमाया जाता है। लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि हम पात्र होते हुए भी षडय़ंत्र के तहत अपात्र घोषित कर दिये गये, तो इससे उनका सपना चकनाचूर हो जाता है। इस भर्ती प्रक्रिया में न सिर्फ रिश्वत का लेनदेन किया जाता है अपितु एप्रोच के चलते भी कुछ अपात्र लोग पात्र की श्रेणी में आ जाते हैं जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण जिला पंचायत धमतरी से दिया जा सकता है जहां वर्ष 2018 में संविदा में बिहान के तहत क्षेत्रीय समन्वयक पद के लिये भर्ती हेतु विज्ञापन संबंधित विभाग द्वारा निकाला गया था और इस हेतु भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन के लिये जिला पंचायत द्वारा तीन सदस्यीय टीम बनाई गई थी जिनमें से एक संविदा नौकरी पाने के उद्देश्य से फार्म भरी महिला के पति भी शामिल थे। उनके द्वारा अपनी पत्नि को इस पद में भर्ती करने लाभ दिलाते हुए दस्तावेज सत्यापन कर दिया गया जबकि नियमत: उनको दस्तावेज परीक्षण टीम में शामिल नहीं किया जाना था। लेकिन अपने आप को मंत्री का नजदीकी बताकर स्वयं को दस्तावेज परीक्षण टीम में शामिल करवा लिया गया। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज से जब यह बात साफ हो रही है कि उक्त नियुक्ति में लगाये गये दस्तावेज जो शासन द्वारा मान्य नहीं है, बावजूद इसके उक्त महिला के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर क्लीन चिट दे दिया जाना समझ से परे हैं। इस बात का खुलासा होते ही अब संविदा पद पर बैठे अधिकारी पति का यह खुला चैलेंज है कि हां, मेरी पत्नि की नियुक्ति मैने अपने दम पर कराया है और किसी में दम है तो मेरी पत्नि को नौकरी से हटाकर दिखाये। बताया तो यह भी जाता है कि इनकी पत्नि का ऑफिस जाने का समय भी निर्धारित नहीं है। पूर्व के अधिकारी ने इसकी लिखित शिकायत जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को की थी। लेकिन इन शिकायतों को नजरअंदाज करने के चलते इनके हौसले पूरी तरह बुलंद हैं।
छग राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत जिला मिशन एवं मिशन कार्यालयों में संविदा के विभिन्न रिक्त पदों की पूर्ति हेतु आवेदन संबंधित जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम से जिला पंचायत कार्यालय में आमंत्रित किये गये थे। 26 जून 2018 को उपरोक्त पदों के लिये एक विज्ञापन निकाला गया था जिसका क्रमांक 1094/वी-6/एनआरएलएम/एचआर एंड ए/2018 नया रायपुर दिनांक 26.6.2018 है। इस विज्ञापन में रायपुर, धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, रायगढ़, मुंगेली, कोरिया, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा, राजनांदगांव, दंतेवाड़ा, कोरबा, बलरामपुर, जशपुर आदि शामिल थे। इनमें से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत क्षेत्रीय समन्वयक के लिये तीन पद निकाले गये थे जिनमें से एक महिला के लिये आरक्षित रखा गया था। इन तीन पदों के लिये जिला सहित अन्य जिलों के सैकड़ों बेरोजगार युवक-युवतियों ने नौकरी की आस लेकर आवेदन किया था जिनके द्वारा शासन द्वारा निर्धारित दस्तावेज भी शामिल किये गये थे किंतु इन दस्तावेजों को नजरअंदाज कर उस महिला का चयन कर लिया गया जिसके पति पहले से ही जिला पंचायत में संविदा के पद पर कार्यरत हैं। इनकी पत्नि ने भी इस पद के लिये फार्म भरा था जिसमें उनके द्वारा संबंधित दस्तावेज पेश किये गये। इस परीक्षा में भाग लिये अनेक अभ्यर्थियों ने इस प्रतिनिधि को बताया कि हमारे द्वारा जो दस्तावेज पेश किये गये हैं, वैसे दस्तावेज संबंधित महिला के नहीं थे। इसके बाद भी उक्त महिला का चयन किये जाने से हमें भारी मायूसी हुई है। कुछ अभ्यर्थियों द्वारा धमतरिहा के गोठ से रूबरू होते हुए यह भी कहा कि छग शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों को पूरा करने के उद्देश्य से जो समिति बनाई जाती है, उसमें संबंधित अभ्यर्थियों के रिश्तेदार किसी भी सूरत में दस्तावेज परीक्षण समिति में नहीं रखे जाते किंतु धमतरी जिला एक ऐसा जिला है जहां शासन के द्वारा निर्धारित नियमों को बलाये ताक रखकर वरिष्ठ अधिकारियों के होते हुए चयनित अभ्यर्थी के पति को दस्तावेज परीक्षण समिति में रखा गया था। इसी वजह से हम पात्र होते हुए भी समन्वयक पद पर चयनित नहीं किये जा सके जिसका हमें खेद है। इनमें से कुछ ने शासन एवं जिला प्रशासन से जांच की मांग की है।
धमतरिहा के गोठ में पिछले दिनों इस परिप्रेक्ष्य में एक समाचार प्रसारित किया गया था। जिसे लेकर बंटी-बबली अर्थात जिला पंचायत में पदस्थ पति-पत्नि के द्वारा यह पता लगाया जा रहा है कि उक्त समाचार किसने उजागर किया और किसने हमसे पंगा लेने की कोशिश की, इसे लेकर वे कुछ लोगों को प्रताडि़त भी कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उक्त ब्लॉग के संबंधितों को यह सूचना किसने दी। वास्तविकता यह है कि इसकी जानकारी उक्त विज्ञापन के आधार पर जिन शिक्षित बेरोजगारों ने फॉर्म भरा था, उनमें से कुछ के द्वारा सार्वजनिक की गई है और इस प्रतिनिधि को भी जानकारी उन्हीं मे से कुछ लोगों ने दी है जिसके आधार पर उक्त समाचार प्रसारित किया गया जिसे लेकर इनके द्वारा यह कहा जा रहा है कि जितना भी समाचार छपे, शिकायत हो, हमको इससे कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है, हमारी पहुंच प्रदेश के एक दबंग मंत्री तक है, इस वजह से हमारा कोई बाल बांका नहीं कर सकता। उनके इस बोल को सुनकर कुछ लोगों ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे नादिरशाह समन्वयकों के व्यवहार के चलते ही सरकार की छवि धूमिल हो रही है। ब्लॉग में प्रसारित समाचार से उद्वेलित होकर जिस प्रकार पति-पत्नि द्वारा वहां के कर्मचारियों को प्रताडि़त किया जा रहा है, पूछताछ की जा रही है, उससे ये लोग इतने त्रस्त हो चुके हैं कि इनमें से कुछ लोग अपनी नौकरी से त्यागपत्र दिये जाने का भी मन बना लिये हैं।
उल्लेखनीय रहे कि कार्यक्रम प्रबंधक बिहान के लिये जिस महिला को चयनित किया गया है उनके द्वारा प्रस्तुत मार्कशीट के अलावा कम्प्यूटर डिप्लोमा का भी एक प्रमाण पत्र है जिस पर संदेह व्यक्त करते हुए कुछ लोगों ने बताया कि राष्ट्रव्यापी बहुद्देशीय सूचना भिलाई का प्रमाण पत्र पेश किया गया है जबकि नियमानुसार एआईसीटीई से उक्त संस्था का मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य था। लेकिन राष्ट्रव्यापी बहुद्देशीय शिक्षण संस्था जो कि शासकीय नौकरी हेतु मान्यता प्राप्त नहीं है। जिसका प्रमाण पत्र लगाया गया है वह आईएसओ सर्टिफाईड है। तीन सदस्यीय समिति ने उपरोक्त प्रमाण पत्र को कैसे मान्य कर लिया जबकि अन्य अभ्यर्थियों ने नियमानुसार सभी दस्तावेज प्रस्तुत किये थे। अनुभव के मामले में भी दिलचस्प बात सामने आई है। इस कार्य हेतु जो अभ्यर्थी है, उसे ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं एवं गरीबी उन्मूलन आजीविका का भी अनुभव होना चाहिये परंतु उक्त महिला के द्वारा एनजीओ का प्रमाण पत्र लगाया गया है, वह भी संदेह के दायरे में है। जिला पंचायत में संविदा के पद पर अधिकारी एवं उनकी पत्नि को लेकर यह भी कहा जाता है कि, हैं तो ये संविदाकर्मी, लेकिन इनके ठाटबाट किसी आइएएस, आईपीएस से कम नहीं है। इनके जलवे का आलम यह है कि सिर्फ इनके चेंबर में ही एसी लगा है। शासकीय वाहन इनके कंपाउंड में इनकी सेवा हेतु समर्पित रहती है और इन्ही के नादिरशाही रवैये से अनेक लोग त्रस्त हैं। अब देखना है कि शासन, प्रशासन इनके पति के चैलेंज को किस प्रकार लेकर कार्यवाही करता है अथवा उपरोक्त गंभीर तथ्यों को नजरअंदाज कर उनका बचाव करता है। यहां यह बताना जरूरी है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विकलांगता के नाम पर विभिन्न विभागों में नौकरी पाने वालों पर जांच के आदेश जारी किये हैं। लेकिन इधर बिहान योजना से संबंधित अधिकारी ऐसी गंभीर त्रुटियों को नजरअंदाज कर प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रयासों को विफल करने के मूड में दिखाई पड़ते हैं।

