संजय जैन
धमतरी | भरत देश के युग पुरुष स्व. राजीव गांधी जी को उनके शहादत दिवस पर सिहावा विधानसभा के कार्यकर्ताओ ने उनके गोद ग्राम राजीव ग्राम दुगली में राजीवगांधी जी प्रतिमा स्थल पहुच कर विनयपूर्वक पुष्पमाला अर्पण कर श्रद्धा सुमन के साथ श्रद्धांजलि दी गई, इस मौके पर नगरी मंडी के सदस्य राजेंद्र सोनी ने कहा कि भारत रत्न राजीव गांधी एक ऐसे कर्मयोगी रहे हैं, जिनकी जीवन यात्रा में मानवता, सहजता, सरलता, निष्छलता के कई मुकाम रहे हैं। राष्ट्रहित उनके चिंतन के केन्द्र में था। सर्वधर्म सद्भाव उनके मानस में रचा-बसा था।
राजीव गांधी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय था। नियति ने समय के कैनवास पर उन्हें बहुत कम समय बख्शा, लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने इतिहास के कैनवास पर अपनी अनूठी और अमिट छाप छोड़ी। विलक्षण प्रतिभा के धनी राजीव जी में सादगी और दृढ़ता का आदर्श समावेश था। बेहद शांत और गंभीर प्रवृत्ति के राजीव गांधी जी का संपूर्ण जीवन सत्यम्, शिवम, सुंदरम् का मूर्तिमान रूप था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 से 1991 के बीच राजीव गांधी देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री रहे. इन पांच वर्षों में ही इस युवा प्रधानमंत्री ने अपने कार्यों से देश की जनता के दिलोदिमाग में अमिट छाप छोड़ी. एक ही कार्यकाल में कई ऐसे कार्य किए, जिसके लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है. युवा सोच वाले राजीव गांधी को 21 वीं सदी के भारत का निर्माता भी कहा जाता है. 40 वर्ष में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी ने आधुनिक भारत की नींव रखने की दिशा में काम किया.
दूररसंचार क्रांति
यह राजीव गांधी ही
थे, जिन्होंने भारत
में दूरसंचार क्रांति
लाई.आज जिस
डिजिटल इंडिया की चर्चा
है, उसकी संकल्पना
राजीव गांधी अपने
जमाने में कर
चुके थे. उन्हें
डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट
और सूचना तकनीक
और दूरसंचार क्रांति
का जनक कहा
जाता है. राजीव
गांधी की पहल
पर अगस्त 1984 में
भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की
स्थापना के लिए
सेंटर पार डिवेलपमेंट
ऑफ टेलीमैटिक्स(C-DOT)की
स्थापना हुई. इस
पहल से शहर
से लेकर गांवों
तक दूरसंचार का
जाल बिछना शुरू
हुआ. जगह-जगह
पीसीओ खुलने लगे.
जिससे गांव की
जनता भी संचार
के मामले में
देश-दुनिया से
जुड़ सकी. फिर
1986 में राजीव की पहल
से ही एमटीएनएल
की स्थापना हुई,
जिससे दूरसंचार क्षेत्र
में और प्रगति
हुई.
वोट देने की उम्र सीमा घटाई
पहले
देश में वोट
देने की उम्रसीमा
21 वर्ष थी. मगर
युवा प्रधानमंत्री राजीव
गांधी की नजर
में यह उम्रसीमा
गलत थी. उन्होंने
18 वर्ष की उम्र
के युवाओं को
मताधिकार देकर उन्हें
देश के प्रति
और जिम्मेदार तथा
सशक्त बनाने की
पहल की. 1989 में
संविधान के 61 वें संशोधन
के जरिए वोट
देने की उम्रसीमा
21 से घटाकर 18 वर्ष
कर दी गई.
इस प्रकार अब
18 वर्ष के करोड़ों
युवा भी अपना
सांसद, विधायक से लेकर
अन्य निकायों के
जनप्रतिनिधियों को चुन
सकते थे.
कंप्यूटर क्रांति
देश
में पहले कंप्यूटर
आम जन की
पहुंच से दूर
थे. मगर राजीव
गांधी ने अपने
वैज्ञानिक मित्र सैम पित्रोदा
के साथ मिलकर
देश में कंप्यूटर
क्रांति लाने की
दिशा में काम
किया. राजीव गांधी
का मानना था
कि विज्ञान और
तकनीक की मदद
के बिना उद्योगों
का विकास नहीं
हो सकता.उन्होंने
कंप्यूटर तक आम
जन की पहुंच
को आसान बनाने
के लिए कंप्यूटर
उपकरणों पर आयात
शुल्क घटना की
पहल की. भारतीय
रेलवे में टिकट
जारी होने की
कंप्यूटरीकृत व्यवस्था भी इन्हीं
पहलों की देन
रही. हालांकि राजीव
गांधी के प्रधानमंत्री
बनने से पहले
1970 में देश में
पब्लिक सेक्टर में कंप्यूटर
डिविजन शुरू करने
के लिए डिपार्टमेंट
ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स की
शुरुआत हो गई
थी. 1978 तक आईबीएम
पहली कंपनी थी,
बाद में दूसरी
प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों
ने कंप्यूटर निर्माण
शुरू किया.
पंचायतों को किया सशक्त
पंचायतीराज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने देश में पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त किया. राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सबल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता. उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायतीराज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया. 21 मई 1991 को हुई हत्या के एक साल बाद राजीव गांधी की सोच को तब साकार किया गया, जब 1992 में 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतीराज व्यवस्था का उदय हुआ. राजीव गांधी की सरकार की ओर से तैयार 64 वें संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर नरसिम्हा राव सरकार ने 73 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया. 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई. जिससे सभी राज्यों को पंचायतों के चुनाव कराने को मजबूर होना पड़ा. पंचायतीराज व्यवस्था का मकसद सत्ता का विकेंद्रीकरण रहा

