क्रिप्टो करेंसी में दुगुने का लालच देकर करोड़ों लगवाने वाला मालामाल , लगाने वाले हुए कंगाल

धमतरिहा के गोठ
0

 


संजय जैन  

धमतरी 22 मई। चिटफंड कंपनियों के लाखों-करोड़ों रूपये के वारे-न्यारे के बाद आज भी ऐसे लोगों को पुलिस तलाश कर रही है, वहीं कुछ लोगों को पकडक़र उनकी संपत्तियों को नीलाम कर निवेशकों को उनकी राशि लौटाये जाने की कवायद छग शासन के आदेशानुसार की जा रही है। अभी भी ऐसे लोगों को विभिन्न प्रांतों से पकडक़र उन पर कार्यवाही की जा रही है और उनकी संपत्तियों को न्यायालयीन आदेश के पश्चात नीलाम कर उपेक्षित, शोषित और ठगे हुए निवेशकों को राशि लौटाये जाने की कवायद चल रही है। इसी कड़ी में अब ऐसे लोगों द्वारा इसका तरीका बदलकर उन्हें लाखों रूपये के लाभ का सब्जबाग दिखाकर करोड़ों रूपये का हेरफेर किये जाने का सनसनीखेज मामला एक बार फिर प्रकाश में आया है जिसके चलते गरीब, अमीर बनने के चक्कर में अपना सबकुछ लुटा बैठा, वहीं दूसरी ओर कल के गरीब आज मालामाल होकर आज ऐशो-इशरत की जिंदगी जी रहे हैं जिन पर न जाने पुलिस कार्यवाही करने से क्यों पीछे हटती है जबकि ऐसे कुछ लोगों के खिलाफ सिटी कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई गई है। कुल मिलकर  क्रिप्टो करेंसी में दुगुने का  लालच देकर करोड़ों लगवाने वाला मालामाल और  लगाने वाले कंगाल हो चुके हैं | 

मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि फिंटोच वॉलेट के नाम पर चलने वाली इस योजना में भारी-भरकम लाभ दिखाकर एक दिन से एक महीना, दो महीना से आठ महीना, 12 महीना, इस प्रकार उन्हें पैसा जमा कर भारी लाभ मिलने की आस दिलाकर लाखों, करोड़ों रूपये का वारे-न्यारे किये गये हैं। कुछ पीडि़त लोगों ने बताया कि एक दिन के बाद 20 प्रतिशत, एक महीने के बाद 720 रूप्ये का मुनाफा, दो महीने की कंपाउंडिंग के बाद 2 हजार रूपये का मुनाफा, 8 महीने की चक्रवृद्धि के बाद 16 हजार का मुनाफा, 12 महीने की चक्रवृद्धि के बाद 1 लाख 20 हजार का मुनाफा, इस तरह भोले-भाले लोगों को मूर्ख बनाकर इस फिंटोच वॉलेट के कुछ लोगों द्वारा करोड़ों रूपये की कमाई की गई है। ऐसे लोगों ने जब टाईम लिमिट समाप्त होने के बाद पैसे के लिये संबंधितजनों से संपर्क साधा तो इन्होंने इधर-उधर की बात कहकर उन्हें लगातार चक्कर लगवाया। ऐसे पीडि़त लोगों में से कुछ ने इसकी शिकायत सिटी कोतवाली में दर्ज कराई है। लेकिन अब तक ऐसे लोगों पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद हैं। खबर तो यह भी है कि अल्याशा कंपनी के नाम पर अलग राशि वसूली गई है जबकि क्रिप्टो करेंसी के नाम पर भी ऐसे लोगों द्वारा लगभग 10 करोड़ रूपये की वसूली जिले से की गई है।

जिले में अल्याशा कंपनी के नाम पर वर्ष 2009 से 2012 तक ऐसे लोगों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों से भारी मात्रा में राशि वसूली की गई है जबकि इन्हीं लोगों के द्वारा क्रिप्टो करेंसी के नाम पर सैकड़ों लोगों से 10 करोड़ रूपये से अधिक ठगने की चर्चा समूचे जिले में चर्चित है। अल्याशा कंपनी के विरूद्ध शिकायतों पर विराम लगाने ऐसे लोगों ने अपना चेहरा बदलने की कोशिश की और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर जिले में खूब वसूली की है। जालसाजों ने क्रिप्टो करेंसी को मोहरा बनाया और इसके नाम से मार्केटिंग नेटवर्क चलाकर लोगों को ठगते रहे। बाद में पता चला कि इस कंपनी के दिवालिया घोषित होने के बाद ऐसे लोग फिर भूमिगत हो गये हैं। डिजिटल करेंसी को चिटफंड बनाकर रूपये जमा करने का वैसे तो यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे लोगों द्वारा यही कार्य किया गया है। पुलिस विभाग की कार्यवाही से बचने के लिये विभाग के ईर्दगिर्द घूमकर अपने विरूद्ध होने वाली कार्यवाही को दिग्भ्रमित कर पुलिस विभाग को दूसरी ओर मोड़ दिया गया। यही कारण है कि अल्याशा एवं चिटफंड कंपनियों के कुछ लोग आज भी पुलिस की कार्यवाही से बचने के लिये अपने चेहरे बदलते फिर रहे हैं। चिटफंड कंपनी के मामले को लेकर वैसे तो पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेघा टेम्भुरकर साहू, उप पुलिस अधीक्षक श्री बाजपेयी के द्वारा चिटफंड कंपनियों के विरूद्ध सघन कार्यवाही किये जाने का निर्देश दिया गया है।

पिछले दो वर्षों में जिस प्रकार क्रिप्टो करेंसी के नाम पर वसूली की गई है, जब इसके जमाकर्ताओं ने इसके पैसे वापसी की मांग की गई तो ऐसे षडय़ंत्रकारियों द्वारा उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर गुमराह करते हुए उनसे कुछ कोरे कागजों में यह कहकर हस्ताक्षर कराया गया कि आपका आवेदन पैसा वापसी का बनाना है, और यह कागज जब कंपनी में जायेगा तब पैसा आपको वापस मिलेगा। इस तरह कोरे कागज पर हस्ताक्षर लेकर उन्हें बाद में यह कहा गया कि आपको पैसा प्राप्त हो गया है, आपका यह हस्ताक्षर है, इसलिये ऐसे लोग मन मसोस कर रह गये। उपरोक्त प्रक्रिया को बदलते हुए इन्हीं जैसे लोगों द्वारा फिंटोज वॉलेट के नाम पर भारी भरकम राशि जिले से वसूली की गई है। लेकिन वापसी के लिये ऐसे लोगों को पैसा वापसी के लिये ना-नुकुर किया जा रहा है। अब देखना है कि पुलिस विभाग, सिटी कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर संबंधितों पर क्या कार्यवाही करता है।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)