संजय जैन
धमतरी Iकुरूद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बगौद में नौ दिवसीय श्री राम कथा अमृत महोत्सव संगम मानस मंथन
कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरू संत शिरोमणि श्री रामस्वरूपचार्य जी महाराज श्री कामतानाथ
प्रमुख द्वारा श्री चित्रकुट धाम के श्रीमुख से किया जा रहा है, जहाँ नीलम चंद्राकर
अध्यक्ष कृषि उपज मंडी समिति कुरुद व तारिणी चंद्राकर सभापति जिला पंचायत धमतरी विशेष
आथित्य के रूप में शामिल होकर जगद्गुरू संत शिरोमणि श्री रामस्वरूपचार्य जी के कथा
का श्रवण के लिए पहुंचे एवं कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरू संत शिरोमणि श्री रामस्वरूपाचार्य
जी महाराज का आशीर्वाद लिए।
रामकथा
लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाती है। जो मनुष्य भगवान श्रीराम की कथा
का श्रवण करता है वह मोक्ष को प्राप्त करता है। कुरुद क्षेत्र के ग्राम बगौद में चल
रही श्रीराम कथा के सातवें दिन स्वामी रामस्वरूप आचार्य जी ने प्रवचन में कहा कि भगवान
श्रीराम का चरित्र उत्तम है। वे पिता भक्त होने के साथ.साथ मर्यादा का पालन करने वाले
है। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। पिता की प्रतिज्ञा झूठी न हो, इसी
कारण उन्होंने राज पाठ त्यागकर 14 वर्ष वन में बिताए। हमें भगवान श्रीराम के आदर्श
पर चलना चाहिए। उनके आदर्श पर चलने से परेशानी हो सकती है लेकिन विजय अवश्य मिलेगी।
कथा में शंकर.पार्वती विवाह की कथा का बखान हुआ। युवाओं को संस्कृति व संस्कारों से
जोडने का संदेश दिया। उन्होंने भरत के चरितार्थ का वर्णन करते हुए कहा कि रामायण में
भरत ही एक ऐसा पात्र है, जिसमें स्वार्थ व परमार्थ दोनों को समान दर्जा दिया गया। इसलिए
भरत का चरित्र अनुकरणीय है। भरत चरित्र का प्रत्येक प्रसंग धर्म सार है क्योंकि भरत
का सिद्धांत लक्ष्य की प्राप्ति व राम के प्रेम को दर्शाता है। सेवा भाव से संसार में
प्रत्येक कार्य संभव है। समाज में रहकर प्रत्येक व्यक्ति को समाज की सेवा करनी चाहिए।
बच्चों को माता.पिता की सेवा करनी चाहिए। शिष्य में गुरुजनों के प्रति सम्मान व समर्पण
का भाव होना चाहिए। गुरु की सेवा में समय व स्थान का विचार नहीं करना चाहिए। भगवान
राम ने ससुराल में भी गुरु सेवा कर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। सदगुरु की सेवा
में अर्थ, धर्म,काम व मोक्ष चारों की प्राप्ति होती है। उन्होंने देवी पार्वती के जन्म,
नारद मोह व भगवान शिव के विवाह की कथा का भी वर्णन किया। बताया कि भगवान शिव की भक्ति
के बिना प्रभु श्री राम की भक्ति प्राप्त नहीं की जा सकती है। कथा विराम के समय आरती
और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर कुलेश्वर चंद्राकर, तृप्ति चंद्राकर, मंशा साहू,
थानसिंह चंद्राकर, भुनेश्वरी चंद्राकर, एलपी गोस्वामी, शिवप्रसाद साहू, हिरा राम साहू,कमलेश
चंद्राकर,गोलू ध्रुवंशी, श्याम लाल साहू, नोहर साहू, देवानंद पाठक, शेषनारायण साहू,
नीलकमल साहू, शिला चंद्राकर, देवेंद्र साहू, यमन साहू, घनश्याम चंद्राकर, योगेश्वर
पाठक, मिलाप साहू, लोकसिह साहू, कुपु साहू, छगन साहू, दीपक साहू, रवि पटेल, मनोज,ध्रुववंशी,
चोवा साहू सभी उपस्थित थे।


